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Guru Nanak Jayanti पर ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत – SGPC ने श्रद्धालुओं को सौंपे पासपोर्ट, पाकिस्तान के गुरुद्वारों के दर्शन को तैयार जत्था 🌸

अमृतसर में आज का दिन बेहद खास रहा। Guru Nanak Jayanti  के उपलक्ष्य में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने उन श्रद्धालुओं को पासपोर्ट वितरित किए जो पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए रवाना होने वाले हैं।
आज, 31 अक्टूबर को, सुबह से ही अमृतसर स्थित एसजीपीसी मुख्यालय में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। संगत अपने हाथों में पासपोर्ट पाकर भावुक नज़र आई।

एसजीपीसी ने पहले ही घोषणा की थी कि यह पवित्र जत्था 4 नवंबर को रवाना होगा और 13 नवंबर को भारत लौट आएगा। पाकिस्तान सरकार की ओर से 1800 में से 1794 संगतों को वीज़ा जारी कर दिए गए हैं।


भावनाओं से भरा माहौल – पहली बार पाकिस्तान जाने को उत्साहित श्रद्धालु

पासपोर्ट प्राप्त करने आए श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपार खुशी थी। बरनाला से आए श्रद्धालु सुरजीत सिंह ने कहा,

“मैं पहली बार पाकिस्तान जा रहा हूं। इस बार वीज़ा मिल गया है, बहुत खुशी हो रही है। महाराज जी के आगे अरदास है कि जितनी भी संगत जाए, सबकी यात्रा मंगलमय हो और सभी को गुरु दर्शनों का सुख मिले।”

कई श्रद्धालु अपने परिजनों के साथ पहुंचे और एसजीपीसी के प्रबंधकों का धन्यवाद किया। माहौल में श्रद्धा, उत्साह और आनंद का अनूठा संगम देखने को मिला।


सीमा खुलते ही उमड़ा उत्साह – ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन को तैयार जत्था

पिछले वर्ष युद्ध जैसी परिस्थितियों और सीमा बंद रहने के कारण श्रद्धालु पाकिस्तान नहीं जा पाए थे। लेकिन अब सीमा खुलते ही संगत में दोबारा उमंग लौट आई है।

जत्थे के इंचार्ज कुलविंदर सिंह ने बताया कि इस बार संगत का जोश देखने लायक है।

“इस यात्रा का हर क्षण आध्यात्मिक अनुभव से भरा रहेगा। संगत लंबे समय से इस पल का इंतज़ार कर रही थी। अब जब गुरु दरबार का बुलावा आया है, तो सभी बेहद प्रसन्न हैं।”


पवित्र स्थलों की यात्रा – ननकाना साहिब से करतारपुर तक

कुलविंदर सिंह ने बताया कि जत्था 4 नवंबर की सुबह 8:30 बजे अमृतसर स्थित एसजीपीसी कार्यालय से रवाना होगा।
इस यात्रा में श्रद्धालु निम्नलिखित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे:

  • गुरुद्वारा ननकाना साहिब – गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान

  • गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल) – गुरु नानक जी द्वारा छोड़े गए पंजे के निशान का स्थल

  • गुरुद्वारा डेरा साहिब (लाहौर) – गुरु अर्जन देव जी की शहादत स्थल

  • गुरुद्वारा करतारपुर साहिब – वह स्थान जहाँ गुरु नानक देव जी ने अपने अंतिम वर्ष बिताए

यह यात्रा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानी जाती है।


अनुशासन और भक्ति का संगम – SGPC ने दी जरूरी हिदायतें

एसजीपीसी ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि यात्रा के दौरान अनुशासन, संयम और श्रद्धा बनाए रखें।
जत्थे के इंचार्ज कुलविंदर सिंह ने कहा –

“यह यात्रा केवल गुरु दर्शन के लिए है। कृपया सभी श्रद्धालु जत्थे से अलग न हों, समय का पालन करें और हर क्षण गुरु मर्यादा का ध्यान रखें।”

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान में स्थानीय गुरुद्वारा समितियों ने भी भारतीय संगत के स्वागत की तैयारी पूरी कर ली है।


गुरु नानक देव जी के संदेश के साथ – शांति और प्रेम की यात्रा

यह जत्था केवल धार्मिक नहीं, बल्कि शांति और भाईचारे का प्रतीक भी माना जा रहा है।
गुरु नानक देव जी का संदेश — “न को बैरी, नहीं बेगाना; सगल संग हमको बन आई” — इस यात्रा का मूल भाव है।

एसजीपीसी के पदाधिकारियों का कहना है कि यह यात्रा भारत और पाकिस्तान के बीच आस्था और मानवता की डोर को मजबूत करने का अवसर है।


1794 श्रद्धालु – दो देशों के बीच भक्ति का पुल

वीज़ा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 1794 तीर्थयात्री इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनेंगे।
इनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं।
सभी ने SGPC के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और समस्त टीम का आभार जताया।


गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सराहना – श्रद्धालुओं ने जताया आभार

SGPC ने इस यात्रा के लिए पासपोर्ट, स्वास्थ्य जांच, बीमा और सुरक्षा की संपूर्ण व्यवस्था की है।
अमृतसर कार्यालय में जब श्रद्धालुओं को पासपोर्ट दिए गए, तो वहां वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह के जयकारे गूंज उठे।
श्रद्धालुओं ने कहा कि यह आयोजन “गुरु नानक देव जी की कृपा और संगत की एकता” का प्रतीक है।


गुरुद्वारा ननकाना साहिब – इस यात्रा का भावनात्मक केंद्र

गुरुद्वारा ननकाना साहिब, जहाँ गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था, इस यात्रा का सबसे प्रमुख पड़ाव है। हर साल लाखों श्रद्धालु वहां जाकर प्रकाश पर्व मनाते हैं
इस वर्ष सुरक्षा और आतिथ्य के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। पाकिस्तान के इवैक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने पुष्टि की है कि भारतीय श्रद्धालुओं का स्वागत पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा।


गुरु नानक देव जी की जयंती के अवसर पर SGPC द्वारा आयोजित यह यात्रा श्रद्धा, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। अमृतसर से ननकाना तक की यह यात्रा दो देशों की सीमाओं को नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ती है। “सतनाम श्री वाहेगुरु” के स्वर जब ननकाना की गलियों में गूंजेंगे, तो यह केवल संगत नहीं — बल्कि पूरी सिख कौम के लिए गर्व का पल होगा।

 

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