Bareilly में ₹118 करोड़ का जीएसटी घोटाला बेनकाब: फर्जी फर्मों का नेटवर्क ध्वस्त, दो आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों के दस्तावेज और चेक बरामद
News-Desk
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bareilly, Bareilly news, crime news, GST fraud, uttar pradesh news, आर्थिक अपराध, उत्तर प्रदेश पुलिस, एसएसपी अनुराग आर्य, जीएसटी घोटाला, फर्जी फर्म, बरेली, मनीष सोनकर, साइबर थानाBareilly से एक बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा हुआ है। पुलिस ने फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के जीएसटी फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में एक फर्म के माध्यम से करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार दिखाकर कर चोरी का मामला सामने आया था, लेकिन जांच का दायरा बढ़ने पर करीब ₹118 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पुलिस का मानना है कि यह फर्जीवाड़ा संगठित तरीके से कई फर्जी फर्मों के माध्यम से अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक से जुड़े रिकॉर्ड और करोड़ों रुपये के हस्ताक्षरित चेक बरामद हुए हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
फर्जी फर्मों के नेटवर्क से करोड़ों का कारोबार दिखाकर किया गया फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच पीसी इंटरप्राइजेज नामक एक फर्म से शुरू हुई। जांच में सामने आया कि इस फर्म के जरिए लगभग ₹20 करोड़ का फर्जी कारोबार दर्शाया गया और इसी आधार पर ₹1.28 करोड़ से अधिक का जीएसटी फर्जीवाड़ा किया गया।
जब जांच एजेंसियों ने दस्तावेजों और लेन-देन की गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि मामला केवल एक फर्म तक सीमित नहीं है। जांच में लगभग एक दर्जन संदिग्ध फर्जी फर्मों का नेटवर्क सामने आया, जिनके माध्यम से कुल ₹118 करोड़ की जीएसटी धोखाधड़ी किए जाने के संकेत मिले।
गाजियाबाद से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार
एसपी क्राइम मनीष सोनकर के अनुसार, पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए 21 जुलाई को बरेली के मालगोदाम रोड क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—
- योगेंद्र शर्मा
- टिंपू
के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, योगेंद्र शर्मा मूल रूप से बुलंदशहर का निवासी है, जबकि टिंपू मध्य प्रदेश के दमोह जिले का रहने वाला है। दोनों पिछले कुछ समय से गाजियाबाद में रह रहे थे और वहीं से इस कथित नेटवर्क से जुड़े थे।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
ऐसे काम करता था कथित फर्जीवाड़े का पूरा नेटवर्क
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि गिरोह कथित तौर पर फर्जी फर्मों का निर्माण कर उनके नाम पर कागजी कारोबार दर्शाता था। इसके बाद इन फर्मों के माध्यम से जीएसटी से संबंधित वित्तीय लेन-देन और दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि—
- फर्जी फर्में किन नामों पर बनाई गईं,
- उनका वास्तविक संचालन कौन कर रहा था,
- कारोबार से जुड़े दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए,
- और इस कथित नेटवर्क से अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
छापेमारी में मिले लैपटॉप, मोबाइल और करोड़ों के हस्ताक्षरित चेक
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
बरामद सामग्री में शामिल हैं—
- दो लैपटॉप
- छह मोबाइल फोन
- फर्जी आधार कार्ड
- बैंक चेकबुक
- ₹3.18 करोड़ से अधिक मूल्य के हस्ताक्षरित चेक
- एक लाल रंग की डायरी
पुलिस के अनुसार, लाल डायरी में करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन, संदिग्ध फर्मों और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी दर्ज मिली है। इन दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक एवं तकनीकी जांच कराई जाएगी।
साइबर और आर्थिक पहलुओं की भी होगी गहन जांच
मामले में बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन से डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फर्जी फर्मों के संचालन में ऑनलाइन माध्यम, डिजिटल दस्तावेजों या अन्य तकनीकी साधनों का किस प्रकार उपयोग किया गया।
विशेषज्ञों की मदद से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विश्लेषण किया जाएगा, ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।
पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दो आरोपियों की गिरफ्तारी जांच का पहला महत्वपूर्ण चरण है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित जीएसटी फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—
- फर्जी फर्मों के वास्तविक संचालक कौन थे।
- बैंक खातों के माध्यम से धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ।
- किन-किन राज्यों तक नेटवर्क फैला हो सकता है।
- फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही।
यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
साइबर थाना टीम को मिला सम्मान
इस बड़े आर्थिक अपराध के खुलासे के बाद एसएसपी अनुराग आर्य ने साइबर थाना प्रभारी धनंजय पांडेय और उनकी टीम की सराहना की है।
मामले के सफल अनावरण पर टीम को ₹25,000 का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच और समन्वित कार्रवाई के कारण इस कथित फर्जीवाड़े का खुलासा संभव हो सका।
जीएसटी धोखाधड़ी क्या होती है?
जीएसटी धोखाधड़ी में आमतौर पर फर्जी कंपनियां या फर्जी व्यापारिक लेन-देन दिखाकर कर प्रणाली का अनुचित लाभ लेने की कोशिश की जाती है। इसमें नकली बिल, फर्जी इनवॉइस, काल्पनिक कारोबार या अन्य गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट अथवा अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, डिजिटल दस्तावेज और संबंधित कंपनियों के संचालन की विस्तृत जांच करती हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

