उत्तर प्रदेश

UP Terror Module Exposed: डॉक्टरों का आतंकी गैंग – अस्पताल के नाम पर सहारनपुर से चल रहा था ‘जैश-ए-मोहम्मद’ का जाल, दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी कड़ी भी सामने आई!

लखनऊ / दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला के पास हुए ब्लास्ट ने जैसे पूरे उत्तर भारत को हिला दिया, उसी के साथ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की शांत गलियों से एक खौफनाक कहानी (UP Terror Module Exposed) सामने आई है। जो डॉक्टर सफेद कोट पहनकर इलाज का वादा करते थे, वे ही जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा के लिए ‘मौत का इलाज’ तैयार कर रहे थे।

अस्पतालों की दीवारों के पीछे, धार्मिक तालीम के नाम पर, आतंक का पूरा मेडिकल नेटवर्क काम कर रहा था—जो न केवल दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा था बल्कि अयोध्या, वाराणसी और लखनऊ तक फैला हुआ था।


सहारनपुर की शांति के पीछे छुपी थी साजिश

सहारनपुर, जहां आमतौर पर दीन-तालीम के लिए सैकड़ों छात्र आते हैं, वहीं एक “मिनी रिक्रूट-कमांड सेंटर” तैयार किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस साजिश का मास्टरमाइंड था डॉ. आदिल अहमद राठर, जो पहले अनंतनाग के GSC हॉस्पिटल में डॉक्टर था।
लेकिन उसने नौकरी छोड़ दी और “इलाज के बहाने” सहारनपुर में नया ठिकाना बना लिया।

उसका मकसद साफ था —

  • युवाओं को ब्रेनवॉश कर आतंकी संगठन से जोड़ना,

  • सुरक्षित ठिकानों पर हथियार और विस्फोटक छिपाना,

  • और देशभर में हमलों की प्लानिंग करना।

एनआईए और यूपी एटीएस ने जांच में पाया कि डॉ. आदिल, डॉ. मुजाहिल शकील उर्फ मुजम्मिल, और डॉ. शाहीन शाहिद तीनों जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा के ऑपरेटिव्स से सीधे संपर्क में थे।


डॉक्टरों का टेरर नेटवर्क – इलाज नहीं, भर्ती चल रही थी

आतंकियों के इस नेटवर्क का सबसे खतरनाक हिस्सा यह था कि इसे ‘डॉक्टर्स नेटवर्क’ कहा जाता था।
इन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेशी हैंडलर्स ने तैयार किया था ताकि आम जनता को शक न हो।
“D-Gang” नाम के इस ग्रुप के ज़रिए डॉक्टरों को जमात और जिहादी फंड्स से पैसा भेजा जाता था।
सहारनपुर का यह नेटवर्क दरअसल “Recruitment Hub” बन चुका था, जहां मेडिकल छात्रों को धर्म और सेवा की आड़ में कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ा जा रहा था।

सूत्रों का कहना है कि इस नेटवर्क में युवाओं, मौलवियों और मेडिकल छात्रों को शामिल कर माइंड कंट्रोल तकनीकें इस्तेमाल की जा रही थीं।


दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ा ‘डॉ. उमर’ – हड़बड़ी में फट गया था विस्फोटक

18 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर्स लगे मिले थे, जिनमें “भारत को जला देने” की बात लिखी थी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जब इन पोस्टर्स की जांच शुरू की तो धागे सीधे डॉक्टरों के इस मॉड्यूल तक पहुंचे।

6 नवंबर को यूपी पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सहारनपुर से डॉ. आदिल को पकड़ा।
उसकी निशानदेही पर फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद डॉ. शाहीन शाहिद को भी एटीएस के जाल में लिया गया।

लेकिन मॉड्यूल का चौथा सदस्य, डॉ. उमर, फरार हो गया।
उसी ने जल्दबाज़ी में दिल्ली में कार ब्लास्ट कर दिया, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई।
एजेंसियों के मुताबिक, उमर के पास टाइमर और सर्किट अधूरे थे, जिससे विस्फोट अनियोजित तरीके से हुआ।
फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई कि यह ब्लास्ट गलती से हुआ, लेकिन यह गलती देश के लिए एक बड़ा सबक छोड़ गई।


2900 किलो विस्फोटक बरामद – फरीदाबाद में सबसे बड़ा बम जखीरा

डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल से पूछताछ में 2900 किलो विस्फोटक सामग्री का सुराग मिला।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर फरीदाबाद के एक गोदाम में छापा मारा, जहां भारी मात्रा में रसायन, फ्यूज़ वायर, और बैटरी डिवाइस बरामद हुए।
यह विस्फोटक कई छोटे हिस्सों में बांटकर उत्तर भारत के अलग-अलग शहरों में भेजने की तैयारी थी।

पुलिस ने इसे “India’s Largest Terror Explosive Catch of 2025” बताया।
एक अधिकारी ने कहा –

“अगर ये विस्फोटक सही समय पर प्रयोग में लाया जाता, तो दिल्ली और यूपी दोनों में खून की नदियाँ बह सकती थीं।”


अस्पताल बने आतंकी ठिकाने – इलाज के नाम पर मौत की फैक्ट्री

जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने सहारनपुर के कई निजी अस्पतालों में फर्जी क्लिनिक और मेडिकल रूम्स बनाए थे।
इनका इस्तेमाल बैठकें करने, विस्फोटक छिपाने और भर्ती गतिविधियाँ चलाने में होता था।
आदिल और उसके साथी मरीजों की फाइलों में गुप्त कोड्स लिखते थे, जिससे संदेश एक अस्पताल से दूसरे तक पहुँचता था।
एजेंसियों ने 3 अस्पतालों को सील किया है और करीब 17 संदिग्ध स्टाफ को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।


विदेशी हैंडलर्स और डार्क वेब के जरिए साजिश

जांच में खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद और अलकायदा से जुड़े विदेशी हैंडलर्स इन डॉक्टरों को डार्क वेब चैट प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड ऐप्स से निर्देश देते थे।
पैसे की लेनदेन क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए होती थी।
हर महीने एक कोडेड मैसेज आता था—“New Medicine Ready”—जिसका मतलब होता था “नया हमला तैयार है।”


श्रीनगर से फरीदाबाद तक फैला था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस आतंकी मॉड्यूल की शाखाएँ श्रीनगर, सहारनपुर, फरीदाबाद, दिल्ली और मेरठ तक फैली थीं। हर शहर में ‘OGW’ (Over Ground Worker) मौजूद था, जो फंडिंग, कम्युनिकेशन और हाइडआउट्स की व्यवस्था करता था।इस नेटवर्क को ‘Code D-Alpha 7’ नाम से संचालित किया जा रहा था।

एनआईए ने अब तक 9 जगहों पर छापे मारे हैं और करीब 26 संदिग्धों की निगरानी की जा रही है।


ATS की समय रहते कार्रवाई ने बचाई सैकड़ों जानें

अगर सहारनपुर मॉड्यूल कुछ दिन और सक्रिय रहता, तो यूपी के कई शहरों में श्रृंखलाबद्ध धमाकों की योजना पर अमल हो सकता था।
ATS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा –

“डॉक्टरों के गैंग के पास जो नक्शे और प्लान मिले हैं, उनमें अयोध्या, वाराणसी और लखनऊ के कई अस्पतालों के लोकेशन मार्क किए गए थे।”

यानी साजिश थी – भीड़भाड़ वाली जगहों पर बम धमाके कर अधिकतम नुकसान पहुंचाने की।


राज्य सरकार का अलर्ट – सुरक्षा एजेंसियां हाई मोड पर

उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर की सरकारों ने संयुक्त सतर्कता आदेश जारी किया है। अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, मंदिर परिसरों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई है

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा –

“जो डॉक्टर के वेश में आतंकी निकले हैं, उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। राज्य की शांति और जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।”


सहारनपुर से निकला यह ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी है कि अब आतंक का चेहरा बदल चुका है। जहाँ कभी बंदूकें और वर्दी होती थीं, अब वहां लैब कोट और स्टेथोस्कोप हैं। लेकिन एटीएस और एनआईए की सतर्कता ने इस खतरनाक जाल को समय रहते तोड़ दिया। देश एक और बड़ी त्रासदी से बच गया — पर सवाल यही है कि आतंक अब कितनी गहराई तक घुस चुका है?

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