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Muzaffarnagar चरथावल के रोनी हरजीपुर में तेंदुए का आतंक! किसान पर हमला, प्रशासन हाई अलर्ट… डीएफओ की टीम ने जंगल में लगाई घेराबंदी

चरथावल। Muzaffarnagar जिले के ग्राम रोनी हरजीपुर में मंगलवार सुबह अचानक दहशत फैल गई जब जंगलों में घूम रहे एक तेंदुए ने खेत की ओर जा रहे एक किसान पर हमला करने का प्रयास किया। हमले से किसान तो किसी तरह बच गया, लेकिन ग्रामीणों में leopard spotted village की खबर तेजी से फैल गई।
ग्रामीणों ने तुरंत शोर मचाया, जिसके बाद तेंदुआ गन्ने के खेतों और जंगल की ओर भाग निकला।

पिछले कई दिनों से तेंदुए की हलचल की सूचना मिल रही थी, जिसके बारे में भारतीय किसान यूनियन के नेता व जिला पंचायत सदस्य विकास शर्मा लगातार प्रशासन को आगाह भी करते रहे थे। गांव में बच्चों, महिलाओं और किसानों का बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है।


भाकियू नेता विकास शर्मा की सक्रियता—वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर दी त्वरित जानकारी

आज की घटना के तुरंत बाद विकास शर्मा ने एक बार फिर जिले के उच्च अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि गांव के आसपास घने जंगल, गन्ने के खेत और ईख की ऊँचाई तेंदुए के लिए सुरक्षित छिपने की जगह बन जाती है।

इसके बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक किसी ठोस कार्रवाई का इंतज़ार किया जा रहा था।
आज के हमला-प्रयास के बाद प्रशासन की नींद आखिर टूट गई और तत्काल एक टीम गांव के लिए रवाना हुई।


डीएफओ राजीव कुमार खुद पहुंचे गांव—रेंजर एवं पूरी फॉरेस्ट टीम के साथ शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन

leopard spotted village की घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ राजीव कुमार, रेंजर और वन विभाग का पूरा स्टाफ रोनी हरजीपुर गांव पहुंचा।
टीम ने मौके का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से तेंदुए की गतिविधियों से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

पूरी फॉरेस्ट टीम—

  • जंगलों में

  • खेतों की मेंड़ों पर

  • गन्ने की ऊँची फसलों के बीच

  • तालाब और नालों के पास

कई घंटों तक चलती रही और तेंदुए के पैरों के निशान चिन्हित किए।
इन निशानों से यह स्पष्ट हुआ कि तेंदुआ पिछले कई दिनों से इसी इलाके में सक्रिय है।


गन्ने के खेत में लगाया गया पिंजरा—तेंदुए को जाल में फंसाने के लिए घेराबंदी तेज

निरीक्षण के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी।
फॉरेस्ट टीम ने गन्ने के खेत के किनारे एक बड़ा पिंजरा (ट्रैप केज) स्थापित किया, ताकि तेंदुआ भोजन की तलाश में आते ही फंस सके।

पिंजरा लगाने के बाद टीम ने आसपास के क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी—

  • ग्रामीणों को खेतों में अकेले न जाने की सलाह

  • पशुओं को बांधकर रखने के निर्देश

  • बच्चों को खेत और जंगल की तरफ न जाने का आदेश

  • रात में निगरानी के लिए अतिरिक्त फॉरेस्ट गार्ड तैनात

वन विभाग के मुताबिक तेंदुए की गतिविधियों पर पूरे 24 घंटे नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और भी पिंजरे लगाए जाएंगे।


ग्रामीणों में भय का माहौल—सैकड़ों लोग मौके पर जमा

जब फॉरेस्ट टीम गांव पहुंची तो मौके पर सैकड़ों ग्रामीण एकत्र हो गए
लोगों में डर, जिज्ञासा और चिंता का मिला-जुला माहौल था।
गांव की महिलाओं ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से रात में बाहर निकलने से डर रही हैं।
बच्चों को खेलने और स्कूल जाने में भी परेशानी हो रही है।

तेंदुए का जंगल से बाहर आ जाना इस इलाके के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति है क्योंकि—

  • आसपास गन्ने की ऊँची फसलें

  • खेतों के बीच संकरे रास्ते

  • जंगलों से सीधा संपर्क

  • छोटे पशुओं की मौजूदगी

यह सब तेंदुए को छिपने और घूमने का सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं।


वन विभाग की चेतावनी—तेंदुए को उकसाने या पीछा करने की भूल न करें

फॉरेस्ट टीम ने ग्रामीणों को चेतावनी दी कि—

  • तेंदुए को देखने पर शोर न करें

  • भीड़ इकट्ठी करके पीछा न करें

  • खेत और जंगल के रास्तों पर अकेले न जाएं

  • रात के समय बिल्कुल सावधानी से चलें

  • पशुओं को खुले में न छोड़ें

टीम ने यह भी कहा कि तेंदुआ तब तक किसी पर हमला नहीं करता जब तक उसे खतरा महसूस न हो।
इसलिए ग्रामीणों को शांत और सतर्क रहने की अपील की गई।


क्या तेंदुआ भटक गया है या स्थायी रूप से क्षेत्र में है? वन विभाग ने शुरू की विस्तृत जांच

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि—

  • तेंदुआ जंगल से भटककर आया है

  • या यह इस क्षेत्र में स्थायी रूप से रह रहा है

  • क्या इसके साथ कोई दूसरा तेंदुआ या शावक भी हो सकता है

  • आसपास के जिलों में भी कोई गतिविधि दर्ज हुई है या नहीं

इसके लिए टीम ने फुटप्रिंट मैपिंग, क्षेत्रीय निरीक्षण और स्थानीय लोगों से इनपुट एकत्र करना शुरू कर दिया है।


ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगी सुरक्षा—विकास शर्मा ने कहा, ‘जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, खतरा बढ़ता रहेगा’

भाकियू नेता विकास शर्मा ने कहा कि ग्रामीण अत्यधिक भयभीत हैं और प्रशासन को तुरंत एक दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए।
उन्होंने मांग की—

  • गांव की निगरानी बढ़ाई जाए

  • अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती हो

  • बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित मार्ग बनाया जाए

  • रात में टॉर्चिंग और पेट्रोलिंग जारी रखी जाए

उन्होंने कहा, “जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, तब तक खतरा लगातार बना रहेगा। वन विभाग को पूरे इलाके की तलाशी तेज करनी चाहिए।”


ग्राम रोनी हरजीपुर में तेंदुए की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को सतर्क कर दिया है और वन विभाग द्वारा लगाया गया पिंजरा अब उम्मीद की बड़ी किरण बन गया है। डीएफओ राजीव कुमार और उनकी टीम लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही है, जबकि ग्रामीण प्रशासन से पूरी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। गांव में तेंदुए का पकड़ा जाना अब सभी की प्राथमिकता बन चुका है, और आने वाले 24–48 घंटे इस खोज अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

 

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