US-Iran War की आहट? ट्रम्प के ‘निर्णायक सैन्य विकल्प’ के बीच USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर, खाड़ी में बढ़ा तनाव
US-Iran War/ military tension एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ खड़ा हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक तैनातियों के रूप में ज़मीन पर भी नजर आने लगा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस और पेंटागन ने ऐसे सैन्य विकल्पों पर काम शुरू कर दिया है, जिनका प्रभाव “निर्णायक” बताया जा रहा है। इस बीच अमेरिकी जंगी बेड़ा USS अब्राहम लिंकन के मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और हवा दे दी है।
🔴 ट्रम्प का सख्त रुख: ‘निर्णायक असर’ वाले सैन्य विकल्पों की मांग
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय से ईरान के खिलाफ ऐसे सैन्य विकल्प तैयार करने को कहा है, जिनका असर केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि व्यापक और निर्णायक हो। सूत्रों के अनुसार, इन योजनाओं में ईरानी शासन की सत्ता संरचना को कमजोर करने या सत्ता परिवर्तन तक की रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है।
व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों के बीच लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र, ईरान के भीतर संभावित ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा पर चर्चा की जा रही है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि US Iran military tension अब एक नए और अधिक गंभीर चरण में प्रवेश कर सकता है।
🔴 USS अब्राहम लिंकन की तैनाती: समुद्र से बढ़ता दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कहा कि USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में तेजी से ईरान की दिशा में बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जोन में प्रवेश कर चुका है। रणनीतिक दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस एयरक्राफ्ट कैरियर की स्ट्राइक रेंज में ईरान के कई बड़े शहर और सैन्य ठिकाने आते हैं।
USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 20 जनवरी को इसने मलक्का जलडमरूमध्य पार कर हिंद महासागर में प्रवेश किया। इसके बाद इसकी गति 20 नॉट से अधिक बताई जा रही है। रॉयटर्स के मुताबिक, जहाज ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए कुछ समय बाद ऑटोमैटिक पहचान प्रणाली भी बंद कर दी, जिससे इसकी वास्तविक स्थिति को ट्रैक करना मुश्किल हो गया।
🔴 ताकत का प्रदर्शन: फाइटर जेट्स और न्यूक्लियर पनडुब्बियां साथ
USS अब्राहम लिंकन अकेला नहीं है। इसके साथ कई डिस्ट्रॉयर जहाज और परमाणु पनडुब्बियां भी चल रही हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर पर 48 से 60 F/A-18 फाइटर जेट तैनात हैं, जो बिना ईंधन भरे लगभग 2300 किलोमीटर तक हमला करने की क्षमता रखते हैं। यह तैनाती साफ संकेत देती है कि अमेरिका केवल चेतावनी नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
🔴 जॉर्डन में अमेरिकी जेट्स: इजराइल की सुरक्षा पर नजर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने जॉर्डन में कम से कम 12 F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इसके अलावा और भी विमान रास्ते में बताए जा रहे हैं। 20 से 22 जनवरी के बीच अमेरिकी C-17 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान कई बार जॉर्डन के मफराक अल-खवाजा एयरबेस पहुंचे।
इन विमानों के जरिए पैट्रियट-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम लाए जाने की खबर है। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य इजराइल को ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से बचाना है, क्योंकि तेहरान पहले ही बदले की धमकी दे चुका है।
🔴 डिएगो गार्सिया बेस पर हलचल: रसद और सैनिकों की तैनाती
हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया भी इन दिनों गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। लगातार कार्गो विमान यहां उतर रहे हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका संभावित सैन्य ऑपरेशन के लिए रसद, हथियार और सैनिकों की तैनाती कर रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर भी विचार चल रहा है, ताकि ईरान की ओर से किसी भी संभावित मिसाइल या ड्रोन हमले से अमेरिकी ठिकानों की रक्षा की जा सके।
🔴 ईरान का पलटवार: ‘हमारी मिसाइलें तैयार हैं’
US Iran military tension के बीच ईरान की प्रतिक्रिया भी उतनी ही सख्त रही है। ईरानी सुप्रीम काउंसिल के जावेद अकबरी ने बयान दिया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सभी सैन्य अड्डे ईरान के निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मिसाइलें आदेश का इंतजार कर रही हैं और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने हमला किया तो न केवल उसके सैन्य अड्डे, बल्कि इजराइल के प्रमुख केंद्र भी ईरान के निशाने पर होंगे।
🔴 IRGC का संदेश: ‘उंगली ट्रिगर पर है’
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर ने एक लिखित बयान में कहा कि ईरानी सेना पहले से कहीं अधिक तैयार है। उन्होंने कहा कि उनकी सेनाएं हर स्थिति का सामना करने के लिए अलर्ट मोड में हैं और किसी भी उकसावे पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाएगी।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।
🔴 इजराइल की चेतावनी: ‘सात गुना ताकत से जवाब’
इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने स्विट्जरलैंड के दावोस में मीडिया से बात करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ कोई नया हमला किया, तो जवाब पहले से “सात गुना ज्यादा ताकत” से दिया जाएगा।
बरकात ने दावा किया कि पिछली सैन्य कार्रवाइयों में इजराइल ने ईरान की सैन्य कमजोरियों को उजागर किया है और भविष्य में किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
🔴 ईरान में प्रदर्शन और मौतों का दावा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में 28 दिसंबर से महंगाई के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद हालात लगातार बिगड़े हैं। एक ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अब तक 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
अमेरिकी मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, 4519 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और करीब 9,049 मामलों की अभी जांच चल रही है। इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान एक बार फिर ईरान की आंतरिक स्थिति की ओर खींचा है।
🔴 सत्ता परिवर्तन पर ट्रम्प का बयान, खामेनेई का पलटवार
डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत की। उन्होंने कहा कि अब ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का समय आ गया है और ईरानी नागरिकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।
इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर ईरान में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता को हुए नुकसान और मौतों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जिम्मेदार हैं।
ट्रम्प ने भी पलटवार करते हुए खामेनेई पर ईरान की बदहाली का दोष मढ़ा और कहा कि वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है।
🔴 वैश्विक चिंता: क्या खाड़ी में युद्ध का खतरा?
US Iran military tension का असर अब केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र के कई देश, यूरोप और एशिया की बड़ी ताकतें भी इस स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। तेल की कीमतों से लेकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा तक, हर क्षेत्र पर इस तनाव का सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई भी पक्ष एक गलत कदम उठाता है, तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

