उत्तर प्रदेश

प्रदेश में 5000 मेगावाट electricity उत्पादन बंद: 24 घंटे सप्लाई नहीं, फिर भी इकाइयां शटडाउन पर क्यों?

5000 MW power units shut down की खबर ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां लाखों उपभोक्ता 24 घंटे बिजली की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब पांच हजार मेगावाट की electricity  उत्पादन इकाइयां बंद पड़ी हैं। ऊर्जा विभाग की ओर से कम मांग (लो डिमांड) को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।

प्रदेश में कुल 22 उत्पादन इकाइयां रिवर्स शटडाउन (RSD), प्लांड शटडाउन (AOH) अथवा अन्य तकनीकी कारणों से बंद बताई जा रही हैं। कुछ इकाइयां मरम्मत कार्य के कारण ठप हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब उत्पादन क्षमता मौजूद है, तो उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिल पा रही?


🔴 5000 MW power units shut down और ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती

ऊर्जा विभाग का दावा है कि वर्तमान समय में बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम है, इसलिए कुछ इकाइयों को बंद रखा गया है ताकि अनावश्यक उत्पादन से बचा जा सके। लेकिन राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि यह तर्क अधूरा है। परिषद का स्पष्ट आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी 18 घंटे का रोस्टर लागू है, जबकि वास्तविक आपूर्ति 10 से 12 घंटे के बीच सिमट जाती है।

जब 5000 MW power units shut down की स्थिति है और मांग कम बताई जा रही है, तो क्या यह बेहतर नहीं होता कि सभी इकाइयों को संचालित कर ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी 24 घंटे निर्बाध बिजली दी जाती?


🔴 परिषद का कड़ा रुख, आंदोलन की चेतावनी

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर उपभोक्ता से फिक्स चार्ज लिया जाता है। उन्होंने केंद्रीय उपभोक्ता अधिकार नियमावली 2020 की धारा 10 का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक उपभोक्ता को 24 घंटे बिजली पाने का अधिकार है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ता पूर्ण शुल्क दे रहा है, तो उसे पूर्ण सेवा क्यों नहीं मिल रही? 5000 MW power units shut down की स्थिति को उन्होंने उपभोक्ता हितों के विपरीत बताया और चेतावनी दी कि यदि प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी ऊर्जा प्रबंधन पर होगी।


🔴 किन-किन इकाइयों पर लगा है ब्रेक?

राज्य विद्युत उत्पादन निगम की कई बड़ी इकाइयां इस समय बंद हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • अनपरा तापीय विद्युत परियोजना

  • हरदुआगंज तापीय विद्युत परियोजना

  • जवाहरपुर तापीय विद्युत परियोजना

  • ओबरा सी तापीय विद्युत परियोजना

  • परीछा तापीय विद्युत परियोजना

  • टांडा थर्मल पावर प्लांट (चारों इकाइयां बंद)

इन प्रमुख उत्पादन केंद्रों की इकाइयां बंद रहने से कुल मिलाकर लगभग 5000 मेगावाट क्षमता अस्थायी रूप से सिस्टम से बाहर है।


🔴 कम मांग या प्रबंधन की रणनीति?

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि कम मांग के दौरान उत्पादन इकाइयों को बंद रखना तकनीकी रूप से सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन जब जमीनी स्तर पर उपभोक्ता 24 घंटे बिजली से वंचित हों, तब 5000 MW power units shut down को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि रिवर्स शटडाउन और प्लांड शटडाउन की योजना पहले से तय होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरम्मत या ओवरहालिंग कार्य उस समय किए जाएं जब मांग न्यूनतम हो और आपूर्ति प्रभावित न हो।


🔴 ग्रामीण बनाम शहरी आपूर्ति का अंतर

प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी 18 घंटे की आधिकारिक आपूर्ति रोस्टर लागू है। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि ट्रिपिंग, लाइन फॉल्ट और स्थानीय तकनीकी कारणों से वास्तविक आपूर्ति घटकर 10-12 घंटे रह जाती है। 5000 MW power units shut down की स्थिति में यह असमानता और ज्यादा चुभने लगी है।

ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि खेती, सिंचाई और छोटे उद्योगों के लिए नियमित बिजली जरूरी है। यदि उत्पादन इकाइयां बंद हैं और मांग कम है, तो उन्हें 24 घंटे बिजली क्यों नहीं दी जा सकती?


🔴 फिक्स चार्ज और उपभोक्ता अधिकार

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि जब हर उपभोक्ता से फिक्स चार्ज लिया जाता है, तो सेवा में कटौती अनुचित है। केंद्रीय उपभोक्ता अधिकार नियमावली 2020 के तहत 24 घंटे आपूर्ति का सिद्धांत लागू है। 5000 MW power units shut down के बीच आंशिक आपूर्ति को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।


🔴 ऊर्जा विभाग के सामने चुनौती

अब ऊर्जा प्रबंधन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर आर्थिक संतुलन बनाए रखना और दूसरी ओर उपभोक्ता असंतोष को शांत करना। यदि उत्पादन क्षमता उपलब्ध है, तो आपूर्ति बढ़ाने का दबाव स्वाभाविक है। वहीं, यदि तकनीकी या आर्थिक कारणों से इकाइयां बंद हैं, तो पारदर्शिता जरूरी है।

5000 MW power units shut down की स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की ऊर्जा नीति और वितरण प्रणाली को लेकर व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है।


प्रदेश में 5000 मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयों का बंद होना केवल एक तकनीकी मसला नहीं, बल्कि लाखों उपभोक्ताओं के रोजमर्रा जीवन से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। जब उपभोक्ता पूर्ण शुल्क अदा कर रहे हैं, तो 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना ऊर्जा प्रबंधन की जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में यह विषय प्रशासन और उपभोक्ता संगठनों के बीच बड़ा विमर्श और संभावित आंदोलन का रूप ले सकता है।

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