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China में घटती Fertility Rate का संकट: बढ़ती इनफर्टिलिटी, आईवीएफ का उभार और सरकार की नई जनसंख्या रणनीति

China Fertility Rate आज वैश्विक जनसंख्या बहस का एक प्रमुख विषय बन चुकी है। कभी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आबादी वाले देशों में शामिल रहा चीन अब तेजी से गिरती जन्मदर और बढ़ती इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहा है। हाल के वर्षों में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि चीन में विवाह की औसत आयु बढ़ने, बदलती जीवनशैली और सामाजिक प्राथमिकताओं के कारण बच्चों के जन्म की दर में भारी गिरावट आई है।

इसके साथ ही इनफर्टिलिटी यानी संतान उत्पन्न करने में असमर्थता की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि देश में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जैसे उपचारों की मांग में अचानक बड़ा उछाल देखा जा रहा है। सरकार भी इस संकट को देखते हुए कई नीतिगत कदम उठा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति को सुधारना इतना आसान नहीं होगा।


चीन में बढ़ती इनफर्टिलिटी का संकट

चीन में पिछले डेढ़ दशक के आंकड़े बताते हैं कि संतान पैदा करने में सक्षम जोड़ों में भी इनफर्टिलिटी के मामले तेजी से बढ़े हैं।

  • वर्ष 2007 में इनफर्टिलिटी दर लगभग 12% थी

  • जबकि 2020 तक यह बढ़कर करीब 18% हो गई

यह वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय बदलाव नहीं है बल्कि सामाजिक और जैविक कारकों के गहरे प्रभाव को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका एक प्रमुख कारण यह है कि नई पीढ़ी के चीनी दंपती पहले की पीढ़ियों की तुलना में काफी देर से विवाह कर रहे हैं।

जब विवाह की आयु बढ़ती है, तो स्वाभाविक रूप से गर्भधारण की संभावना भी कम होती जाती है। खासकर महिलाओं के लिए 35 वर्ष के बाद प्रजनन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।


आईवीएफ ट्रीटमेंट की मांग में जबरदस्त वृद्धि

इनफर्टिलिटी बढ़ने के साथ ही चीन में आईवीएफ उपचार की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। पिछले दशक में इस उपचार को अपनाने वाले दंपतियों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार:

  • 2013 में लगभग 2.36 लाख लोग आईवीएफ उपचार के लिए पहुंचे

  • जबकि 2019 तक यह संख्या बढ़कर 11 लाख हो गई

आज चीन में लगभग 600 लाइसेंसी आईवीएफ क्लिनिक कार्यरत हैं। इन क्लीनिक्स में हर साल हजारों दंपती संतान प्राप्ति की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2022 में आईवीएफ तकनीक की मदद से लगभग तीन लाख बच्चों का जन्म हुआ। हालांकि यह संख्या बड़ी दिखाई देती है, लेकिन चीन जैसे विशाल देश के लिए यह अभी भी काफी कम मानी जाती है।


China Fertility Rate बढ़ाने के लिए सरकार के नए कदम

चीन की सरकार गिरती जन्मदर को राष्ट्रीय चुनौती के रूप में देख रही है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की हैं।

इन योजनाओं में आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाएं और बीमा योजनाओं में सुधार शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • 2025 में तीन वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए हर साल लगभग 47,689 रुपये का भत्ता देने की योजना शुरू की गई।

  • 2022 में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल किया गया।

  • 2024 में दस लाख से अधिक लोगों को आईवीएफ उपचार के खर्च की भरपाई की गई।

इसके अलावा 2025 के मध्य तक चीन के सभी 31 प्रांतीय प्रशासन ने आईवीएफ उपचार को अपनी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल कर लिया।

सरकार का उद्देश्य यह है कि आर्थिक बाधाओं को कम करके अधिक से अधिक दंपतियों को संतान प्राप्ति के लिए प्रेरित किया जा सके।


आईवीएफ उपचार कितना महंगा है

हालांकि सरकार कई तरह की सहायता दे रही है, लेकिन आईवीएफ उपचार अब भी काफी महंगा माना जाता है।

चीन में एक आईवीएफ चक्र का खर्च लगभग:

  • 20,000 से 50,000 युआन तक हो सकता है।

कुछ शहरों में स्थानीय प्रशासन इस खर्च में 10,000 युआन तक की सब्सिडी भी दे रहा है। इसके बावजूद कई परिवारों के लिए यह उपचार आर्थिक रूप से भारी पड़ता है।


कंडोम पर टैक्स बढ़ाने जैसे कदम भी चर्चा में

चीन की सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कुछ ऐसे कदम भी उठाए हैं जिन पर बहस जारी है।

जनवरी में सरकार ने कंडोम पर वैट की दर 13% कर दी। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से जन्मदर को प्रोत्साहित करने की नीति का हिस्सा हो सकता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कर नीति से जन्मदर में बड़ा बदलाव संभव नहीं है।


China Fertility Rate पर विशेषज्ञों की शंका

जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आईवीएफ सब्सिडी और आर्थिक सहायता से जन्मदर में बड़ी वृद्धि होना मुश्किल है।

हॉन्गकॉन्ग साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ स्टुअर्ट गीतेल बास्टेन का कहना है कि आईवीएफ तकनीक उन दंपतियों की मदद करती है जो जैविक कारणों से संतान नहीं पा सकते। लेकिन यह उन लोगों की सोच नहीं बदल सकती जो बच्चे पैदा करने को लेकर असमंजस में हैं या परिवार छोटा रखना चाहते हैं।

उनके अनुसार यह तकनीक केवल सीमित संख्या में लोगों को लाभ पहुंचाती है।


उम्र बढ़ने से सफलता दर भी कम

चीन के अस्पतालों में आने वाले कई मरीजों की आयु 35 से 40 वर्ष के बीच होती है। इस उम्र में आईवीएफ की सफलता दर अपेक्षाकृत कम होती है।

इसका मतलब यह है कि कई दंपतियों को एक से अधिक बार उपचार कराना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दबाव दोनों बढ़ते हैं।


शहरों और प्रांतों के बीच बड़ा अंतर

चीन में स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में भी काफी असमानता देखने को मिलती है।

समृद्ध शहरों में आईवीएफ क्लीनिक्स और सुविधाएं अधिक हैं, जबकि गरीब प्रांतों में यह सेवाएं सीमित हैं।

उदाहरण के लिए:

  • बीजिंग, जिसकी आबादी लगभग 2 करोड़ 22 लाख है, वहां 2023 से 2025 के बीच लगभग 53 हजार लोगों ने सरकारी बीमा के माध्यम से फर्टिलिटी उपचार कराया।

  • जबकि लगभग समान आबादी वाले उत्तर-पूर्वी प्रांत जिलिन में 2024 में केवल छह हजार से कम महिलाओं को ही इस योजना का लाभ मिला।


स्वास्थ्य प्रणाली की संरचना भी चुनौती

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ करेन एगलस्टोन का कहना है कि यह असमानता चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था की संरचना को दर्शाती है।

चीन में प्रांतीय सरकारों को अपने स्वास्थ्य बीमा खर्च का बड़ा हिस्सा स्वयं उठाना पड़ता है। इसलिए आर्थिक रूप से मजबूत प्रांत अधिक सुविधाएं दे सकते हैं, जबकि गरीब क्षेत्रों में लोगों के लिए इलाज कराना कठिन हो जाता है।


कड़े नियम भी बनते हैं बाधा

चीन में आईवीएफ उपचार से जुड़े कई नियम भी काफी सख्त हैं।

  • केवल विवाहित जोड़ों को ही इस उपचार की अनुमति है।

  • कई स्थानों पर महिला की आयु सीमा का भी ध्यान रखा जाता है।

  • एग फ्रीजिंग यानी अंडाणु संरक्षित करने के नियम भी काफी कठोर हैं।

इन नियमों के कारण संभावित लाभार्थियों की संख्या और कम हो जाती है।


दुनिया में सबसे कम फर्टिलिटी दर वाले देशों में चीन

आज चीन उन देशों में शामिल है जहां फर्टिलिटी दर दुनिया में सबसे कम मानी जाती है।

औसतन एक चीनी महिला अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बच्चा जन्म देती है।

यह आंकड़ा:

  • 2017 में 1.8 था

  • जबकि आबादी को स्थिर रखने के लिए आवश्यक दर 2.1 मानी जाती है।

इस तरह चीन की वर्तमान स्थिति जनसंख्या संतुलन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।


चीन की घटती जन्मदर और बढ़ती इनफर्टिलिटी ने सरकार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को गंभीर चिंता में डाल दिया है। आईवीएफ उपचार को बढ़ावा देने, आर्थिक सहायता देने और स्वास्थ्य योजनाओं में सुधार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक बदलाव, जीवनशैली और आर्थिक दबाव जैसे कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन इन चुनौतियों का सामना किस तरह करता है और क्या उसकी नीतियां देश की जनसंख्या संतुलन को स्थिर करने में सफल हो पाती हैं।

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