Featureवैश्विक

TWA Flight 847 Hijacking-: 17 दिनों का खौफनाक खेल, गोलियों, सौदों और बंधकों की कहानी?

TWA Flight 847 Hijacking आधुनिक विमानन इतिहास की उन घटनाओं में से एक है, जिसने दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। 14 जून 1985 को शुरू हुआ यह हाईजैकिंग ड्रामा सिर्फ एक विमान अपहरण नहीं था, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, आतंकवाद और मानवीय संकट का भयावह संगम बन गया। इस घटना में 145 यात्रियों और 8 क्रू मेंबर्स की जान दांव पर लग गई थी, और आने वाले 17 दिनों तक दुनिया की नजरें इसी विमान पर टिकी रहीं।


शुरुआत में सब कुछ सामान्य, फिर अचानक बदली कहानी

ट्रांस वर्ल्ड एयरलाइंस (TWA) की फ्लाइट 847 ने काहिरा से अपने निर्धारित समय पर उड़ान भरी थी। इसका रूट एथेंस, रोम, बोस्टन और लॉस एंजिल्स होते हुए सैन डिएगो तक तय था। काहिरा से एथेंस तक की यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हुई।

एथेंस में कुछ नए यात्री और क्रू सदस्य फ्लाइट में सवार हुए, और यहीं से इस भयावह कहानी की नींव रखी गई। फ्लाइट ने जैसे ही एथेंस से रोम के लिए उड़ान भरी और एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंची, तभी दो संदिग्ध यात्री अपनी सीटों से उठे और सीधे कॉकपिट की ओर बढ़ गए।


कॉकपिट में घुसते ही हिंसा की शुरुआत

फ्लाइट सर्विस मैनेजर उली डेरिकसन ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो दोनों हमलावरों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। इसके बाद वे जबरन कॉकपिट में घुस गए और वहां मौजूद कैप्टन जॉन टेस्ट्रेक, फर्स्ट ऑफिसर फिल मारेस्का और फ्लाइट इंजीनियर क्रिश्चियन जिम्मरमैन पर हमला कर दिया।

पायलट के सिर पर पिस्तौल तानते हुए उन्होंने विमान को हाईजैक करने की घोषणा की। एक हमलावर ने खुद को हिज्बुल्लाह से जुड़ा मोहम्मद अली हम्मादी बताया और विमान को यूरोप की बजाय मिडिल ईस्ट ले जाने का आदेश दिया।


बेरूत की ओर मजबूर उड़ान और खतरनाक बातचीत

पायलट के पास कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने विमान को लेबनान के बेरूत इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया। लेकिन वहां की एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने शुरुआत में लैंडिंग की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।

काफी देर तक चली बहस के बाद जब पायलट ने चेतावनी दी कि हाईजैकर्स हैंडग्रेनेड से विमान को उड़ा सकते हैं, तब जाकर बेरूत एटीसी ने लैंडिंग की अनुमति दी। सुबह करीब 11:55 बजे विमान बेरूत में उतरा।


19 जिंदगियों के बदले मिला ईंधन

बेरूत एयरपोर्ट पर विमान घंटों तक खड़ा रहा। इस दौरान हाईजैकर्स ने पहले कोई मांग नहीं रखी। बाद में उन्होंने फ्यूल की मांग की, जिसे पहले ठुकरा दिया गया।

आखिरकार एक सौदा हुआ—19 यात्रियों की रिहाई के बदले विमान में ईंधन भरा गया। यह हाईजैकिंग की पहली बड़ी डील थी, जिसने इस घटना को और खतरनाक मोड़ दे दिया।


अल्जीरिया में खुला मांगों का पिटारा

विमान को बेरूत से अल्जीरिया के अल्जीयर्स एयरपोर्ट ले जाया गया। वहां पांच घंटे के इंतजार के बाद हाईजैकर्स ने अपनी मांगों का खुलासा किया।

उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था:

  • कुवैत 17 समूह की रिहाई

  • इजराइल की जेलों में बंद 766 शिया कैदियों की रिहाई

  • दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी

  • अमेरिका और इजराइल की अंतरराष्ट्रीय निंदा

इन मांगों ने इस घटना को एक साधारण अपहरण से निकालकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संकट में बदल दिया।


बार-बार उड़ान, बार-बार सौदेबाजी

अल्जीयर्स में 21 यात्रियों की रिहाई के बदले विमान में फिर ईंधन भरा गया और विमान ने दोबारा उड़ान भरी। इस समय विमान में 115 लोग बचे थे।

इसके बाद विमान फिर बेरूत पहुंचा, जहां हालात और ज्यादा भयावह हो गए।


बेरूत में क्रूरता की पराकाष्ठा

बेरूत पहुंचते ही हाईजैकर्स ने अमेरिकी यात्रियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। यूएस नेवी के रॉबर्ट स्टेथम को बेरहमी से पीटने के बाद गोली मार दी गई। उनका शव रनवे पर फेंक दिया गया, जो इस घटना का सबसे भयावह पल बन गया।

इसके अलावा, यहूदी नाम वाले यात्रियों को अलग कर कैद में डाल दिया गया। इस दौरान और भी आतंकी विमान में सवार हो गए, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।


अंतरराष्ट्रीय दबाव और लगातार बातचीत

अल्जीरिया और बेरूत के बीच कई बार उड़ान भरते हुए यह विमान एक चलता-फिरता संकट केंद्र बन गया था। ग्रीक सरकार ने भी हस्तक्षेप करते हुए एक आतंकी साथी को रिहा किया, जिसके बदले कई ग्रीक नागरिकों को छोड़ा गया।

धीरे-धीरे बातचीत के जरिए कई बंधकों को रिहा किया गया, लेकिन संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।


17 दिनों बाद खत्म हुआ खौफनाक अध्याय

यह हाईजैकिंग 14 जून से शुरू होकर 30 जून 1985 तक चली। अंततः लेबनान के नेता नबीह बेरी और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते आखिरी 45 बंधकों को रिहा किया गया।

इसके बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और अमेरिका में उनका स्वागत किया गया। इस घटना के बाद इजराइल ने भी 700 से ज्यादा शिया कैदियों को रिहा कर दिया।


वैश्विक विमानन सुरक्षा के लिए बड़ा सबक

TWA Flight 847 Hijacking ने दुनिया को यह सिखाया कि विमानन सुरक्षा में एक छोटी सी चूक भी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। इसके बाद एयरपोर्ट सुरक्षा, बैगेज चेकिंग और इंटरनेशनल एविएशन प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव किए गए।

यह घटना आज भी इतिहास में एक चेतावनी के रूप में दर्ज है, जो बताती है कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मेल कितना खतरनाक हो सकता है।


17 दिनों तक चले इस हाईजैकिंग ड्रामे ने न सिर्फ सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाला, बल्कि पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सुरक्षा, कूटनीति और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन कितना जरूरी है। TWA फ्लाइट 847 की यह कहानी आज भी विमानन इतिहास की सबसे खौफनाक घटनाओं में गिनी जाती है, जो आने वाली पीढ़ियों को सतर्क रहने की सीख देती रहेगी

 

Shyama Charan Panwar

एस0सी0 पंवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) टीम के निदेशक हैं, समाचार और विज्ञापन अनुभाग के लिए जिम्मेदार हैं। पंवार, सी.सी.एस. विश्वविद्यालय (मेरठ)से विज्ञान और कानून में स्नातक हैं. पंवार "पत्रकार पुरम सहकारी आवास समिति लि0" के पूर्व निदेशक हैं। उन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 29 से अधिक वर्षों का अनुभव है। संपर्क ई.मेल- [email protected]

Shyama Charan Panwar has 357 posts and counting. See all posts by Shyama Charan Panwar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

13 − six =