“ईरान से इतना प्यार है तो वहां चले जाएं”: फील्ड मार्शल Asim Munir के बयान से पाकिस्तान में शिया समुदाय में नाराज़गी
News-Desk
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Asim Munir, Ayatollah Ali Khamenei protest Pakistan, Gilgit Baltistan unrest, Karachi protest Pakistan, Mohammad Ali Jinnah Shia identity, Pakistan Army News, Pakistan Politics News, Pakistan Shia community, Rawalpindi news, sectarian tension Pakistan⚠️ पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir के एक बयान ने देश के भीतर सांप्रदायिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने शिया धर्मगुरुओं से कहा कि जो लोग ईरान से ज्यादा लगाव रखते हैं, वे वहां चले जाएं। इस टिप्पणी को शिया समुदाय के नेताओं ने अपमानजनक और भड़काऊ बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।
यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले से ही क्षेत्रीय तनाव और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के दबाव से गुजर रहा है।
रावलपिंडी की इफ्तार बैठक में सामने आया विवादित बयान
🍽️ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह टिप्पणी Rawalpindi में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान की गई थी, जिसमें शिया समुदाय के कई प्रमुख उलेमा मौजूद थे। बैठक का उद्देश्य सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर संवाद बताया गया था, लेकिन बातचीत के दौरान दिए गए बयान ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।
बताया गया कि मुनीर ने कहा कि किसी भी विदेशी देश के प्रति वफादारी के आधार पर पाकिस्तान में अशांति फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
शिया नेताओं ने देशभक्ति पर सवाल उठाने का लगाया आरोप
🕌 बयान के बाद शिया धर्मगुरुओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह टिप्पणी उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने जैसी है। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था और किसी पवित्र स्थल या धार्मिक नेतृत्व से भावनात्मक जुड़ाव को देश के प्रति निष्ठा से जोड़कर देखना उचित नहीं है।
समुदाय के नेताओं ने स्पष्ट कहा—
👉 उनकी वफादारी पाकिस्तान और इस्लाम दोनों के प्रति है
👉 धार्मिक संबंधों को राजनीतिक संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए
👉 पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है
बैठक बीच में छोड़कर चले गए सेना प्रमुख, बढ़ा असंतोष
📍 रिपोर्ट्स के मुताबिक इफ्तार के बाद उलेमाओं को बताया गया था कि डिनर के पश्चात बातचीत आगे जारी रहेगी। लेकिन कार्यक्रम के बीच में ही आसिम मुनीर के अचानक चले जाने से शिया नेताओं में असंतोष और बढ़ गया।
समुदाय के प्रतिनिधियों ने इसे केवल औपचारिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी असम्मानजनक व्यवहार बताया।
खामेनेई से जुड़े प्रदर्शनों को लेकर भी जताई गई नाराज़गी
🔥 शिया धर्मगुरुओं का कहना है कि सेना प्रमुख की टिप्पणी हाल ही में Ayatollah Ali Khamenei की मौत के बाद पाकिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी प्रतिक्रिया प्रतीत होती है। उनका आरोप है कि इन प्रदर्शनों के लिए पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई।
बैठक में मौजूद धर्मगुरु Mohammad Shifa Najafi ने वहीं पर इस टिप्पणी का विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे समुदाय को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
गिलगित-बाल्टिस्तान की घटनाओं का भी किया गया उल्लेख
🌍 बैठक के दौरान Gilgit-Baltistan में हुई अशांति का जिक्र भी किया गया। शिया नेताओं का कहना है कि इन घटनाओं को सीधे शिया नेतृत्व से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की सेना और प्रशासनिक ढांचे में भी शिया समुदाय की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।
जिन्ना का उदाहरण देकर दिया जवाब
📜 शिया नेताओं ने इस मौके पर पाकिस्तान के संस्थापक Muhammad Ali Jinnah का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापना में शिया समुदाय की अहम भूमिका रही है।
उनका कहना था—
👉 पाकिस्तान के निर्माण में शिया नेताओं का योगदान रहा
👉 सेना और प्रशासन में समुदाय की भागीदारी है
👉 देशभक्ति पर सवाल उठाना अनुचित है
बताया गया कि जब यह बात उठाई गई तो मुनीर के रवैये में कुछ नरमी आई, लेकिन उन्होंने दोबारा वही टिप्पणी दोहराई कि यदि ईरान से इतना प्रेम है तो वहां जाने के लिए रास्ते खुले हैं।
कराची और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन ने बढ़ाया तनाव
🚨 मार्च में खामेनेई की मौत के बाद Karachi समेत पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
स्थिति नियंत्रण के लिए—
👉 पुलिस ने लाठीचार्ज किया
👉 इस्लामाबाद में आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ
👉 स्कार्दू में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को आग लगाई गई
👉 कई स्थानों पर जान-माल का नुकसान हुआ
इन घटनाओं ने पहले ही देश में संवेदनशील माहौल बना दिया था।
विदेश नीति के बदलते संकेतों के बीच आया बयान
🌐 विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान की विदेश नीति में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। पहले पाकिस्तान ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हाल के समय में वह सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के साथ अधिक नजदीकी बढ़ाता दिख रहा है।
हालांकि Pakistan Army की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सेना प्रमुख ने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और सांप्रदायिक तनाव से बचने की अपील की थी।
पाकिस्तान में शिया समुदाय की बड़ी आबादी
📊 पाकिस्तान में ईरान के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी रहती है। अनुमान के अनुसार देश की कुल जनसंख्या का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा शिया समुदाय से संबंधित है, जो लगभग 3.77 करोड़ लोगों के बराबर है।
ऐसे में इस तरह के बयान का सामाजिक और राजनीतिक असर व्यापक माना जा रहा है।
सांप्रदायिक संतुलन पर उठे नए सवाल
⚖️ आसिम मुनीर की टिप्पणी के बाद पाकिस्तान में सांप्रदायिक संतुलन और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणियां देश के भीतर सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकती हैं।

