खेल जगत

IOC Transgender Policy: 2028 लॉस एंजिल्स ओलिंपिक से महिला वर्ग में ट्रांसजेंडर एथलीट्स पर रोक, SRY जीन टेस्ट होगा अनिवार्य

International Olympic Committee (IOC) ने महिला खेल स्पर्धाओं में भागीदारी को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। नई IOC Transgender Policy के अनुसार 2028 में होने वाले 2028 Summer Olympics से ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला वर्ग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 🏅

इस फैसले के तहत अब केवल वे खिलाड़ी ही महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी जो जन्म से जैविक रूप से महिला होंगी।


SRY जीन टेस्ट से होगी लिंग की पुष्टि

नई IOC Transgender Policy के तहत महिला वर्ग में भाग लेने के लिए SRY जीन स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। यह टेस्ट खिलाड़ी के जैविक लिंग की पुष्टि करेगा।

यह जांच थूक, गाल के स्वैब या रक्त के नमूने के जरिए की जा सकती है। इसका उद्देश्य प्रतियोगिता में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बताया गया है।

IOC का कहना है कि एक समान वैश्विक नीति लागू करने से अलग-अलग खेल संगठनों के अलग नियमों की समस्या खत्म होगी।


ट्रांसजेंडर पुरुष महिला वर्ग में खेल सकेंगे

IOC Transgender Policy में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी रखा गया है कि वे खिलाड़ी जो जन्म के समय महिला थे लेकिन बाद में स्वयं को ट्रांसजेंडर पुरुष के रूप में पहचानते हैं, उन्हें महिला वर्ग में खेलने की अनुमति जारी रहेगी।

यह फैसला अंतरराष्ट्रीय खेल संरचना में संतुलन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।


पहले क्या था नियम, अब क्या बदला

इससे पहले IOC ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला वर्ग में खेलने की अनुमति देता था, यदि उनके टेस्टोस्टेरोन स्तर निर्धारित सीमा से कम हों। कई मामलों में यह निर्णय संबंधित अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों पर छोड़ दिया जाता था।

लेकिन नई IOC Transgender Policy के तहत अब एक समान वैश्विक मानक लागू करने की दिशा में बदलाव किया गया है।


पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान उठा था विवाद

Paris Olympics 2024 के दौरान महिला बॉक्सिंग स्पर्धाओं में भाग लेने वाली दो खिलाड़ियों को लेकर विवाद सामने आया था।

66 किलोग्राम वर्ग में Imane Khelif और 57 किलोग्राम वर्ग में Lin Yu-ting की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए थे।

हालांकि IOC ने दोनों खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी थी और दोनों ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल भी जीते।


IBA की जांच में पहले ही उठ चुके थे सवाल

International Boxing Association (IBA) ने 2023 में जेंडर पात्रता जांच के आधार पर लिन यू-टिंग और इमान खलीफ को महिला वर्ग में खेलने के लिए अयोग्य घोषित किया था।

इसके बावजूद IOC ने इन प्रक्रियाओं को विश्वसनीय नहीं माना और दोनों खिलाड़ियों को ओलिंपिक में खेलने की अनुमति दी थी। यही विवाद बाद में वैश्विक बहस का कारण बना।


IOC अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने फैसले का किया समर्थन

IOC की अध्यक्ष Kirsty Coventry ने कहा कि ओलिंपिक स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत और हार का अंतर बेहद कम होता है।

उनका कहना था कि जैविक रूप से पुरुष खिलाड़ियों की भागीदारी महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए यह निर्णय आवश्यक माना गया।


वैज्ञानिक रिसर्च का भी दिया गया हवाला

IOC Transgender Policy के पीछे संस्था ने वैज्ञानिक शोधों का हवाला दिया है। इन अध्ययनों के अनुसार जन्म से पुरुष खिलाड़ियों को ताकत, सहनशक्ति और विस्फोटक क्षमता वाले खेलों में जैविक बढ़त मिल सकती है।

संस्था का मानना है कि हार्मोनल परिवर्तन के बाद भी यह अंतर पूरी तरह समाप्त नहीं होता।


DSD एथलीटों पर भी पड़ेगा असर

नई IOC Transgender Policy केवल ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। यह नियम उन खिलाड़ियों पर भी लागू होगा जिनमें Difference of Sex Development (DSD) की स्थिति होती है।

इससे Caster Semenya जैसी खिलाड़ियों पर असर पड़ सकता है। सेमेन्या ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे बहिष्कार की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

उन्होंने 2012 और 2016 ओलिंपिक में महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था।


पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स ने लागू किया था जेंडर टेस्ट नियम

World Athletics पहले ही SRY जीन टेस्ट आधारित नियम लागू कर चुका है, जिसे 1 सितंबर 2025 से प्रभावी बनाया गया।

इसके तहत वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में केवल वही महिला खिलाड़ी भाग ले सकीं जिन्होंने जेंडर पात्रता टेस्ट पास किया।


ट्रंप के आदेश के बाद तेज हुई बहस

Donald Trump ने फरवरी 2025 में एक एग्जीक्यूटिव आदेश जारी कर लॉस एंजिल्स ओलिंपिक में ट्रांसजेंडर महिलाओं को वीजा न देने की बात कही थी।

इसके बाद इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर बहस और तेज हो गई थी, जिसने IOC Transgender Policy के फैसले को और अधिक चर्चा में ला दिया।


नियम केवल प्रोफेशनल खेलों पर लागू होगा

IOC ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल प्रोफेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं पर लागू होगा। ग्रासरूट या स्थानीय स्तर के खेलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

संस्था का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।


वैश्विक खेल जगत में फैसले पर बढ़ सकती है बहस

IOC Transgender Policy ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया भर में महिला खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर लगातार चर्चा चल रही है।

जहां कुछ विशेषज्ञ इसे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं मानवाधिकार संगठनों और खेल अधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध की संभावना भी जताई जा रही है।


IOC Transgender Policy के तहत महिला खेल स्पर्धाओं में पात्रता के नियमों में बड़ा बदलाव वैश्विक खेल व्यवस्था में नई दिशा तय कर सकता है। लॉस एंजिल्स 2028 ओलिंपिक से लागू होने वाला यह निर्णय आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल संरचना और महिला प्रतिस्पर्धाओं की परिभाषा को प्रभावित करता दिखाई दे सकता है।

 

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: [email protected]

News-Desk has 21102 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

two + 4 =