Kanpur Kidney Racket Case: नौकरी का झांसा, करोड़ों का खेल और 9.5 लाख में खरीदी किडनी 90 लाख में बेची—ईडी जांच के बीच बड़ा खुलासा
News-Desk
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ED investigation Kanpur, Ghaziabad kidney racket, health department raid Kanpur, illegal organ transplant Kanpur, kanpur, Kanpur Kidney Racket case, kidney sale scandal, medical crime Kanpur, organ trafficking India, Uttar Pradesh Crime Newsउत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर Kanpur से सामने आया kidney racket case अब एक बड़े संगठित अंग तस्करी नेटवर्क का संकेत देता नजर आ रहा है। नौकरी दिलाने के बहाने गरीब लोगों को फंसाने, मेडिकल जांच के नाम पर ऑपरेशन करवाने और फिर लाखों में खरीदी गई किडनी को करोड़ों में बेचने का सनसनीखेज मामला कई नए सवाल खड़े कर रहा है।
इस पूरे प्रकरण में पहले दर्ज हुई शिकायत, उसके बाद हुई गिरफ्तारियां, करोड़ों रुपये के लेनदेन और हाल ही में सामने आए अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मामला इतना गंभीर हो गया कि इसकी जांच में Enforcement Directorate भी शामिल हो चुकी है।
2019 में सामने आया था Kanpur kidney racket case का पहला बड़ा खुलासा
इस मामले की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई थी, जब बर्रा थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया था कि उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसकी किडनी निकालने की साजिश रची गई।
महिला मूल रूप से Banda की रहने वाली थी और अपने पति के साथ साकेत नगर इलाके में रह रही थी। आरोप है कि परिचित युवक मोहित निगम और जुनैद उसे बेहतर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर Ghaziabad ले गए, जहां मेडिकल जांच के नाम पर कई परीक्षण कराए गए।
इसी दौरान महिला को बातचीत से शक हुआ कि उसे किसी अवैध किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह के जाल में फंसाया जा रहा है।
40 लाख रुपये का लालच देकर चुप कराने की कोशिश
पीड़िता ने बताया कि जब उसने आरोपियों की बातचीत सुनी तो उसे अंदेशा हुआ कि उसकी किडनी निकालने की योजना बनाई जा रही है। विरोध करने पर उसे 40 लाख रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया।
इस घटना ने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और 17 फरवरी को Kolkata निवासी टी. राजकुमार राव समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में जांच के दौरान कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
10 करोड़ से अधिक के लेनदेन का खुलासा, ED की एंट्री से बढ़ी जांच की गति
Kanpur kidney racket case में जब अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच हुई तो 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का खुलासा हुआ। इसके बाद मामले में प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हुई।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई शहरों और राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं।
9.5 लाख में खरीदी गई किडनी 90 लाख में बेचने का सनसनीखेज मामला
जांच के दौरान सामने आया कि एक अन्य मामले में उत्तराखंड के एक युवक से लगभग 9.5 से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा किया गया। इसके बाद उसी किडनी को जरूरतमंद मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया।
यह खुलासा दर्शाता है कि अंग तस्करी का यह नेटवर्क अत्यंत संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें दलालों के साथ-साथ मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोगों की भी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
Kanpur kidney racket case में अस्पतालों पर छापेमारी, डॉक्टर दंपती समेत 10 हिरासत में
कल्याणपुर क्षेत्र में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिलने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने कई अस्पतालों में छापेमारी की। जांच के दौरान दलाल, अस्पताल संचालक और एक डॉक्टर दंपती सहित कुल दस लोगों को हिरासत में लिया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर उन्हें अंग बेचने के लिए मजबूर करता था।
IMA से जुड़े पदाधिकारी के अस्पताल का नाम भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एक अस्पताल का संबंध Indian Medical Association के एक बड़े पदाधिकारी से बताया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी है।
उत्तराखंड के युवक को दिया गया था 10 लाख रुपये का प्रस्ताव
Kanpur kidney racket case के दूसरे हिस्से में कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल पर आरोप है कि उसने Uttarakhand के एक युवक को 10 लाख रुपये में किडनी बेचने का प्रस्ताव दिया था।
बताया जा रहा है कि युवक को आर्थिक जरूरत का फायदा उठाकर इस सौदे के लिए तैयार किया गया था। बाद में इसी किडनी को भारी रकम में बेच दिया गया।
अवैध ट्रांसप्लांट नेटवर्क के तार कई राज्यों तक फैले होने की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह गिरोह केवल कानपुर तक सीमित नहीं था। इसमें गाजियाबाद, कोलकाता और उत्तराखंड समेत कई अन्य राज्यों के लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
ऐसे मामलों में आमतौर पर दलाल, निजी अस्पताल, नकली दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट और फर्जी रिश्तेदार बनाकर ट्रांसप्लांट कराने वाले लोग शामिल होते हैं।
गरीब और बेरोजगार लोगों को बनाया जाता था निशाना
Kanpur kidney racket case ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अंग तस्करी के ऐसे गिरोह समाज के कमजोर वर्गों को कैसे निशाना बनाते हैं। नौकरी का झांसा, इलाज का बहाना या आर्थिक सहायता का लालच देकर लोगों को फंसाना इस नेटवर्क की सामान्य रणनीति बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जागरूकता और कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जारी
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संदिग्ध अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेज, मरीजों की पहचान और डॉक्टरों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो जल्द ही अतिरिक्त गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।

