Iran IRGC Power Struggle: ईरान में सत्ता पर IRGC का कब्जा? राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian किनारे, सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से संपर्क भी टूटा
News-Desk
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Ahmed Vahidi IRGC, Iran IRGC power struggle, Iran political crisis, IRGC Iran news, Masoud Pezeshkian, Middle East geopolitics, Mojtaba Khamenei, Pezeshkia, Strait of Hormuz Iran, Tehran Times report, US-Iran Tensionsमध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब Iran IRGC power struggle को लेकर नई रिपोर्ट्स सामने आईं। बताया जा रहा है कि ईरान की ताकतवर सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच सत्ता को लेकर गंभीर टकराव की स्थिति बन गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के कई रणनीतिक फैसले अब सीधे IRGC के नियंत्रण में चले गए हैं, जिससे ईरान की पारंपरिक सत्ता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei से भी नहीं हो पा रही है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता की आशंका और गहरी हो गई है।
Iran IRGC power struggle: क्या ईरान की कमान अब सैन्य परिषद के हाथों में?
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों की एक “मिलिट्री काउंसिल” रोजमर्रा के महत्वपूर्ण फैसले ले रही है। यह स्थिति ईरान के प्रशासनिक ढांचे में असाधारण मानी जा रही है, क्योंकि आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक निर्णय सर्वोच्च नेता की मंजूरी से लिए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य परिषद की भूमिका लगातार बढ़ती रही तो इससे ईरान की राजनीतिक संरचना में स्थायी बदलाव संभव है।
ट्रम्प के बयान के बाद उठा सवाल—ईरान में असली नियंत्रण किसके पास?
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम कुछ “समझदार” ईरानी नेताओं के संपर्क में है और समाधान खोजने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि ईरान के अधिकारियों ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वार्ता नहीं चल रही है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह सवाल और गहरा हो गया कि ईरान में निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति आखिर किसके पास है।
Iran IRGC power struggle: राष्ट्रपति की नियुक्ति रोकने तक पहुंचा विवाद
रिपोर्ट के अनुसार 26 मार्च को राष्ट्रपति पजशकियान ने नए खुफिया मंत्री के रूप में Hossein Dehghan की नियुक्ति करने की कोशिश की थी, लेकिन IRGC प्रमुख Ahmad Vahidi ने इस फैसले को रोक दिया।
बताया गया कि युद्ध जैसी स्थिति में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति का अधिकार IRGC अपने पास रखना चाहता है। यह कदम राष्ट्रपति और सैन्य नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेदों का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
सुप्रीम लीडर से संपर्क नहीं हो पाने की खबरों ने बढ़ाई राजनीतिक अनिश्चितता
Iran IRGC power struggle के बीच सबसे गंभीर दावा यह सामने आया है कि राष्ट्रपति पजशकियान हाल के दिनों में सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से संपर्क नहीं कर पाए हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार प्रयास के बावजूद उनकी मुलाकात संभव नहीं हो सकी।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान की व्यवस्था में सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में अंतिम निर्णय का अधिकार सुप्रीम लीडर के पास होता है।
अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद बढ़ी सत्ता की जटिलता
रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के दिन सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद कुछ दिनों में मुजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता घोषित किया गया।
हालांकि तब से वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं और उनके संदेश केवल टेलीविजन पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं। इससे उनकी सक्रिय भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
Iran IRGC power struggle: मुजतबा खामेनेई की स्थिति पर भी उठे सवाल
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मुजतबा खामेनेई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ सूत्रों के अनुसार वे गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि अन्य रिपोर्ट्स में उनके कोमा में होने की आशंका जताई गई है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भी संकेत दिया कि उनकी हालत प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
IRGC की ‘मिलिट्री काउंसिल’ रोज ले रही अहम फैसले
Iran IRGC power struggle की रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि IRGC ने मुजतबा खामेनेई के चारों ओर सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है और सरकारी रिपोर्ट्स तक उनकी पहुंच सीमित कर दी गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह स्थिति सही साबित होती है तो यह ईरान की पारंपरिक सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
पड़ोसी देशों को निशाना बनाने की रणनीति पर भी मतभेद
सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति पजशकियान पहले ही IRGC की क्षेत्रीय रणनीति को लेकर चिंता जता चुके थे। उनका मानना था कि पड़ोसी देशों को निशाना बनाने से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
युद्ध के कारण पहले ही ईरान की आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है और संसाधनों की कमी भी सामने आने लगी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता IRGC का नियंत्रण
Iran IRGC power struggle के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया है कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz पर भी IRGC का प्रभाव बढ़ गया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत कर IRGC अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
IRGC की आर्थिक ताकत भी बढ़ा रही राजनीतिक प्रभाव
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद गठित IRGC आज केवल सैन्य संस्था नहीं रह गया है, बल्कि तेल, बैंकिंग, परिवहन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी इसका व्यापक प्रभाव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसी आर्थिक ताकत के कारण IRGC देश की राजनीतिक संरचना में लगातार अधिक प्रभावशाली होता जा रहा है।

