Hezbollah पर टकराव: ईरान के खुले समर्थन से भड़का लेबनान, संप्रभुता बनाम ‘प्रतिरोध अक्ष’ की जंग तेज
पश्चिम एशिया एक बार फिर गंभीर भू-राजनीतिक तनाव की गिरफ्त में है। Iran Hezbollah support को लेकर ईरान और लेबनान के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हिज़बुल्लाह को लेकर ईरान का रुख पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक दिखाई दे रहा है, जबकि लेबनान इसे अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता के लिए खतरा मान रहा है।
इस टकराव ने न केवल लेबनान की आंतरिक राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि इजराइल, अमेरिका और पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा रणनीति पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।
ईरान का स्पष्ट संदेश: हिज़बुल्लाह को समर्थन जारी रहेगा
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने रविवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान, हिज़बुल्लाह को इजराइल के खिलाफ संघर्ष में पूरी ताकत से समर्थन देता रहेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हिज़बुल्लाह हालिया युद्धों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के चलते कमजोर स्थिति में माना जा रहा है।
वेलायती के इस बयान से यह साफ हो गया है कि Iran Hezbollah support ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का स्थायी हिस्सा बना रहेगा, चाहे इसके राजनीतिक या कूटनीतिक परिणाम कुछ भी हों।
‘प्रतिरोध अक्ष’ की रणनीति: सिर्फ हिज़बुल्लाह नहीं, पूरा नेटवर्क
ईरान हिज़बुल्लाह को केवल एक लेबनानी संगठन नहीं, बल्कि इजराइल के खिलाफ अपने तथाकथित “प्रतिरोध अक्ष” (Axis of Resistance) का सबसे मजबूत स्तंभ मानता है।
इस रणनीति के तहत ईरान—
लेबनान में हिज़बुल्लाह
गाजा में हमास
यमन में हूती विद्रोहियों
को राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक समर्थन देता है।
ईरान का मानना है कि इन समूहों के जरिए वह इजराइल और उसके सहयोगियों पर बहुआयामी दबाव बना सकता है। Iran Hezbollah support इसी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है।
लेबनान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव, हिज़बुल्लाह को हथियार डालने की मांग
दूसरी ओर, लेबनान की सरकार अमेरिका और इजराइल के भारी दबाव में है।
इन देशों की मांग है कि—
हिज़बुल्लाह को हथियार छोड़ने के लिए मजबूर किया जाए
खासकर दक्षिणी लेबनान में उसकी सैन्य गतिविधियों पर रोक लगे
लेबनान के लिए यह स्थिति बेहद जटिल है, क्योंकि हिज़बुल्लाह न केवल एक सशस्त्र संगठन है, बल्कि देश की राजनीति और समाज में उसकी गहरी पकड़ भी है।
इसी दबाव और असंतुलन ने Iran Hezbollah support को लेबनान के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना दिया है।
एक साल से ज्यादा चला संघर्ष, हिज़बुल्लाह हुआ कमजोर
हालिया घटनाओं ने हिज़बुल्लाह की सैन्य क्षमता को भी प्रभावित किया है।
इजराइल के साथ एक साल से अधिक चले संघर्ष
और सीरिया में बशर अल-असद सरकार का गिरना
इन दोनों घटनाओं ने हिज़बुल्लाह को रणनीतिक रूप से कमजोर कर दिया।
सीरिया, जो लंबे समय तक ईरान से हिज़बुल्लाह तक हथियार पहुंचाने का मुख्य रास्ता था, अब उस रूप में उपलब्ध नहीं रहा। इससे Iran Hezbollah support की लॉजिस्टिक व्यवस्था को भी झटका लगा है।
हथियार सप्लाई का नया नेटवर्क: हवाई, समुद्री और इराकी रास्ते
ईरान वर्षों से हिज़बुल्लाह को—
रॉकेट
मिसाइल
ड्रोन
एंटी-टैंक हथियार
विस्फोटक सामग्री
सप्लाई करता रहा है।
पहले यह सप्लाई सीरिया के ज़मीनी रास्तों से होती थी, लेकिन 2024 में असद सरकार के पतन के बाद यह मार्ग लगभग बंद हो गया।
अब ईरान—
हवाई जहाजों
समुद्री जहाजों (यूरोपीय बंदरगाहों को कवर के तौर पर इस्तेमाल करते हुए)
और इराक के रास्ते सीमित मात्रा में हथियार
भेजने की कोशिश कर रहा है।
2024 के इजराइल के साथ संघर्ष में हिज़बुल्लाह के बड़े पैमाने पर हथियार नष्ट हो गए थे, इसलिए ईरान अब उसे फिर से री-आर्म (Re-arm) करने में जुटा है। यही प्रक्रिया Iran Hezbollah support को और विवादास्पद बना रही है।
लेबनान की नाराज़गी: संप्रभुता पर सवाल
ईरान के इस रवैये से लेबनान में असंतोष खुलकर सामने आ गया है।
हाल ही में अली अकबर वेलायती ने यह बयान दिया कि लेबनान के लिए हिज़बुल्लाह का होना रोज़ी-रोटी से भी ज्यादा जरूरी है।
इस बयान ने लेबनानी राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी।
लेबनान के विदेश मंत्री का कड़ा जवाब
लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ राजी ने सोशल मीडिया के जरिए तीखा पलटवार किया।
उन्होंने साफ कहा कि—
लेबनान के लिए सबसे अहम उसकी संप्रभुता है
उसकी आज़ादी है
और अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है
यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि लेबनान अब Iran Hezbollah support को बिना सवाल किए स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
तेहरान का न्योता ठुकराया, कूटनीतिक दूरी बढ़ी
तनाव बढ़ने के बीच ईरान ने विदेश मंत्री यूसुफ राजी को बातचीत के लिए तेहरान आने का न्योता भी दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया।
यह इनकार दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी को दर्शाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ शब्दों की लड़ाई नहीं, बल्कि लेबनान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन से जुड़ा बड़ा संकेत है।
मध्य-पूर्व में नई अनिश्चितता, आगे क्या?
ईरान का हिज़बुल्लाह को समर्थन और लेबनान की बढ़ती नाराज़गी आने वाले समय में—
क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का सकती है
लेबनान की राजनीतिक स्थिरता को खतरे में डाल सकती है
और इजराइल के साथ टकराव की आशंका बढ़ा सकती है
Iran Hezbollah support अब सिर्फ एक सैन्य या रणनीतिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह संप्रभुता, कूटनीति और क्षेत्रीय सत्ता संघर्ष का केंद्र बिंदु बन चुका है।

