Moradabad के काली माता मंदिरों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: जूना अखाड़े ने बदले महंत, नए नामों की घोषणा के साथ विकास के लिए 1 करोड़ की यो
Moradabad के लालबाग स्थित काली माता मंदिर और प्राचीन सिद्ध पीठ श्री नौ देवी काली माता मंदिर में जूना अखाड़े ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिवर्तन करते हुए नए महंतों की नियुक्ति कर दी है। लंबे समय से चल रहे विवाद और अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद लिए गए इस फैसले ने धार्मिक क्षेत्र में व्यापक चर्चा पैदा कर दी है।
अखाड़े की ओर से जारी प्रमाणपत्र के अनुसार महंत महाकाल गिरि को लालबाग काली माता मंदिर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि महंत हितेश्वर गिरि को प्राचीन सिद्ध पीठ श्री नौ देवी काली माता मंदिर का महंत बनाया गया है। इसके साथ ही महंत इच्छा गिरि और महंत वशिष्ठ गिरि को दोनों मंदिरों में मुख्य पुजारी की जिम्मेदारी दी गई है।
नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही
नए महंतों की घोषणा से पहले मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। संभावित विरोध और संवेदनशीलता को देखते हुए लालबाग और काली माता मंदिर क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रखा गया था।
स्थानीय स्तर पर इस बदलाव को लेकर लोगों में उत्सुकता भी दिखाई दी और पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रशासनिक हलचल बनी रही।
बैठक के बाद सामने आया निर्णय, साधु-संतों की मौजूदगी में हुई प्रक्रिया
निर्णय से पहले श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि और सेक्रेटरी महंत कंचन गिरि के नेतृत्व में साधु-संतों का दल मंदिर परिसर पहुंचा था। यहां आयोजित बैठक में पूर्व महंत सज्जन गिरि और महंत राम गिरि से जुड़े विवादों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान सभी पक्षों को सुना गया और इसके बाद पूरी रिपोर्ट अखाड़े के शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की गई।
जिलाधिकारी से मुलाकात कर प्रशासन को दी गई औपचारिक जानकारी
बैठक के बाद अखाड़े के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर मंदिर प्रबंधन में प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी। प्रशासन को यह भी बताया गया कि दोनों मंदिरों में नए महंतों की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।
इस घटनाक्रम के सार्वजनिक होते ही धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं और मंदिर प्रशासन से जुड़े मुद्दे प्रमुख विषय बन गए।
हटाए गए महंतों ने लगाए गंभीर आरोप
निर्णय के बाद महंत सज्जन गिरि और महंत राम गिरि ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर अखाड़े के फैसले पर आपत्ति जताई। दोनों ने आरोप लगाया कि उनसे धनराशि की मांग की गई थी और बिना पूर्व सूचना दिए प्रशासन को उनके पद से हटाए जाने की जानकारी दे दी गई।
इन आरोपों के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और विवाद और अधिक चर्चा में आ गया।
आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी कर नई जिम्मेदारियों की घोषणा
बृहस्पतिवार शाम साधु-संतों की मौजूदगी में पुनः बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद प्रमाणपत्र जारी कर नई नियुक्तियों की औपचारिक घोषणा कर दी गई। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन की नई संरचना प्रभावी रूप से लागू कर दी गई।
अखाड़ा प्रतिनिधियों ने बताया कि मंदिरों में नियुक्तियों की संख्या परंपरागत व्यवस्था के अनुसार तय की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर इसमें परिवर्तन भी संभव है।
पूर्व महंतों को कई बार भेजे गए थे नोटिस
जूना अखाड़े के प्रवक्ता महंत नारायण गिरि ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज के निर्देश पर दोनों पूर्व महंतों को कई बार नोटिस भेजे गए थे।
उनका कहना था कि अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो गई थी। सभी पक्षों की बात सुनने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार कर नेतृत्व को भेजी गई थी, जिसके आधार पर नई नियुक्तियों का निर्णय लिया गया।
स्थानांतरण के तहत प्रयागराज भेजे गए दोनों महंत
निर्णय के तहत महंत सज्जन गिरि को जूना अखाड़ा दशाश्वमेध घाट प्रयागराज भेजा गया है, जबकि महंत राम गिरि को दत्त मंदिर जूना अखाड़ा प्रयागराज में नई जिम्मेदारी दी गई है। अखाड़े के अनुसार यह स्थानांतरण संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है।
मंदिर विकास के लिए एक करोड़ रुपये की घोषणा
नई नियुक्तियों के साथ मंदिर विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण घोषणा की गई। अखाड़े के सेक्रेटरी महंत कंचन गिरि ने बताया कि काली माता मंदिर परिसर के विकास के लिए एक करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस राशि से महंत निवास का निर्माण कराया जाएगा और मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कार्य किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस योजना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्थानीय श्रद्धालुओं की नजर अब नए प्रशासनिक ढांचे पर
मंदिर प्रशासन में बदलाव के बाद श्रद्धालुओं और साधु-संत समाज की निगाहें अब नई टीम की कार्यप्रणाली पर टिक गई हैं। विकास योजनाओं की घोषणा से लोगों में सकारात्मक उम्मीद दिखाई दे रही है कि आने वाले समय में मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं और मजबूत होंगी।
धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए प्रशासनिक सुधारों की दिशा में उठाए गए इस कदम को क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

