H-1B Visa Bill 2026 Shock: ट्रम्प समर्थित नए बिल से भारतीयों पर बड़ा असर, 3 साल रोक और कोटा घटाकर 25 हजार करने का प्रस्ताव
अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में प्रस्तावित बड़े बदलावों ने भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बढ़ा दी है। H-1B Visa Bill 2026 के तहत तीन साल तक वीजा पर अस्थायी रोक, कोटा में भारी कटौती और वेतन संबंधी कड़े प्रावधान जैसे कदम सुझाए गए हैं। यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन सांसदों की ओर से पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार अवसर बढ़ाना बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल पारित होता है तो इसका सबसे व्यापक प्रभाव भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि एच-1बी वीजा का सबसे बड़ा हिस्सा भारतीयों को ही मिलता है।
रिपब्लिकन सांसदों ने पेश किया ‘एच-1बी दुरुपयोग रोकथाम बिल-2026’
एरिजोना से रिपब्लिकन सांसद Eli Crane ने कांग्रेस में यह विधेयक पेश किया। उनके साथ ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स सहित कुल सात सांसदों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को कुछ डेमोक्रेट सांसदों का भी सीमित समर्थन मिल सकता है।
अमेरिकी संसद की 100 सदस्यीय सीनेट में यदि 60 सांसदों का समर्थन प्राप्त हो जाता है, तो वर्ष के अंत तक इस पर मतदान संभव माना जा रहा है।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
हर वर्ष जारी होने वाले लगभग 85 हजार एच-1बी वीजा में से करीब 63 हजार भारतीय नागरिकों को मिलते हैं। यही वजह है कि प्रस्तावित बदलावों का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय आईटी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और तकनीकी पेशेवरों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीति बदलाव से अमेरिकी टेक सेक्टर की कार्यप्रणाली और वैश्विक प्रतिभा प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है।
तीन साल की संभावित रोक और कोटा में भारी कटौती का प्रस्ताव
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार तीन वर्ष बाद वीजा प्रक्रिया दोबारा शुरू होने पर वार्षिक कोटा को वर्तमान 85 हजार से घटाकर 25 हजार करने का सुझाव दिया गया है। यह बदलाव एच-1बी प्रणाली की संरचना में सबसे बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम विदेशी पेशेवरों की संख्या को नियंत्रित करने की दिशा में निर्णायक बदलाव साबित हो सकता है।
उच्च न्यूनतम वेतन की अनिवार्यता का प्रस्ताव
नए प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वीजा दिया जाए जिनके लिए अमेरिकी नियोक्ता कम से कम 1 करोड़ 86 लाख रुपये वार्षिक वेतन देने को तैयार हों। वर्तमान व्यवस्था में न्यूनतम वेतन की ऐसी स्पष्ट अनिवार्यता नहीं है।
यदि यह प्रावधान लागू होता है तो मध्यम स्तर के तकनीकी पदों के लिए विदेशी नियुक्तियों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
लॉटरी सिस्टम समाप्त करने की तैयारी
एच-1बी वीजा चयन प्रक्रिया में वर्तमान में लागू लॉटरी सिस्टम को समाप्त करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसके स्थान पर उच्च वेतन आधारित चयन प्रणाली लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस बदलाव से कंपनियों के लिए भर्ती प्रक्रिया का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
परिवार साथ ले जाने पर प्रतिबंध का सुझाव
प्रस्तावित नियमों के अनुसार एच-1बी वीजा धारकों के लिए अपने जीवनसाथी और बच्चों को साथ ले जाने की अनुमति सीमित या समाप्त की जा सकती है। अभी तक इस श्रेणी के वीजा धारक अपने परिवार को अमेरिका ले जा सकते हैं और वहां जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
यह बदलाव प्रवासी पेशेवरों के दीर्घकालिक प्रवास निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
ओपीटी कार्यक्रम समाप्त करने का प्रस्ताव
मास्टर्स डिग्री प्राप्त करने वाले विदेशी छात्रों को मिलने वाली ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) सुविधा समाप्त करने का सुझाव भी इस विधेयक में शामिल है। वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत छात्रों को अतिरिक्त दो वर्षों तक अमेरिका में रहकर काम करने का अवसर मिलता है।
यदि यह प्रावधान लागू होता है तो विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में करियर संभावनाएं सीमित हो सकती हैं।
वीजा फीस में भारी वृद्धि पहले ही बढ़ा चुकी है मुश्किलें
एच-1बी वीजा प्रक्रिया पहले से ही महंगी हो चुकी है। हाल के वर्षों में वीजा फीस में भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे इस श्रेणी के वीजा के लिए आवेदन करना कई पेशेवरों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इसके साथ ही वीजा स्टैम्पिंग इंटरव्यू की उपलब्धता में कमी के कारण भी आवेदकों को लंबी प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रीन कार्ड पेंडेंसी बढ़कर 15 साल तक पहुंची
अमेरिका में स्थायी निवास प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड प्रतीक्षा अवधि भी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में यह अवधि कई मामलों में 15 वर्षों तक पहुंच चुकी है।
चूंकि एच-1बी वीजा अधिकतम छह वर्षों के लिए मान्य होता है, इसलिए लंबी प्रतीक्षा अवधि कई पेशेवरों के लिए अनिश्चितता का कारण बन रही है।
टेक कंपनियों पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव
भारतीय आईटी कंपनियां जैसे Infosys, TCS, Wipro, Cognizant और HCL Technologies एच-1बी वीजा के प्रमुख प्रायोजकों में शामिल रही हैं। इन कंपनियों के माध्यम से बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में योगदान देते रहे हैं।
नीति में संभावित बदलाव से इन कंपनियों की वैश्विक भर्ती रणनीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
भारतीय प्रतिभा का रुख अन्य देशों की ओर मुड़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो भारतीय तकनीकी प्रतिभा यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मध्य-पूर्व जैसे विकल्पों की ओर अधिक तेजी से आकर्षित हो सकती है। इससे वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा का संतुलन बदलने की संभावना है।

