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Israel Opposition Alliance: नेतन्याहू को चुनौती देने के लिए फिर साथ आए नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड, ‘टुगेदर’ पार्टी से बदल सकती है चुनावी तस्वीर

Israel Opposition Alliance:  इजराइल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett और Yair Lapid ने मौजूदा प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को सत्ता से हटाने के लक्ष्य के साथ संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। दोनों नेताओं ने मिलकर नई राजनीतिक पार्टी ‘टुगेदर’ के गठन की घोषणा की है, जिसकी अगुवाई बेनेट करेंगे और वे ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी होंगे।

इजराइल में अगला आम चुनाव अक्टूबर 2027 में प्रस्तावित है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह संभावना जताई जा रही है कि संसद भंग कर चुनाव इससे पहले भी कराए जा सकते हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विपक्ष अब रणनीतिक एकता के जरिए सत्ता परिवर्तन की दिशा में सक्रिय हो गया है।


2021 की तरह फिर दोहराने की कोशिश, पहले भी गिरा चुके हैं नेतन्याहू की सरकार

इजराइल की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब बेनेट और लैपिड साथ आए हों। वर्ष 2021 में भी दोनों नेताओं ने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को एक मंच पर लाकर 12 वर्षों से सत्ता में काबिज नेतन्याहू की सरकार को हटाने में सफलता हासिल की थी।

उस समय गठबंधन सरकार बेहद सीमित बहुमत पर आधारित थी, जिसमें दक्षिणपंथी, वामपंथी, मध्यमार्गी और एक अरब पार्टी तक शामिल थीं। इस विविध संरचना के कारण सरकार चलाना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ, लेकिन फिर भी यह गठबंधन इजराइली राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ माना गया था।

अब एक बार फिर दोनों नेताओं का साथ आना विपक्ष की रणनीतिक तैयारी का संकेत माना जा रहा है।


नई पार्टी ‘टुगेदर’ के जरिए विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश

नई पार्टी ‘टुगेदर’ का उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच फैले मतभेदों को कम करना और एक साझा राजनीतिक मंच तैयार करना बताया जा रहा है। लैपिड की पार्टी Yesh Atid पहले से ही संसद में प्रमुख विपक्षी ताकत रही है, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों में इसकी सीटों में संभावित गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

ऐसे में बेनेट के साथ गठबंधन विपक्ष को नई ऊर्जा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों में विपक्ष को संगठित रूप से सामने लाने का प्रयास है।


2022 में टूट गया था पिछला गठबंधन, वैचारिक मतभेद बने कारण

2021 के समझौते के तहत पहले नफ्ताली बेनेट प्रधानमंत्री बने थे और बाद में यह जिम्मेदारी येर लैपिड को सौंपी जानी थी। हालांकि सरकार का आधार बेहद कमजोर था और गठबंधन में शामिल दलों के बीच सुरक्षा नीति, फिलिस्तीन मुद्दा और वेस्ट बैंक बस्तियों जैसे विषयों पर लगातार मतभेद बने रहे।

अंततः स्थिति ऐसी बन गई कि सरकार चलाना कठिन हो गया और दोनों नेताओं ने संसद भंग कर नए चुनाव कराने का निर्णय लिया। इसके बाद हुए चुनावों में नेतन्याहू फिर से सत्ता में लौट आए।


बेनेट और लैपिड की राजनीतिक सोच में स्पष्ट अंतर

नफ्ताली बेनेट को लंबे समय से एक मजबूत दक्षिणपंथी यहूदी राष्ट्रवादी नेता के रूप में देखा जाता रहा है। वे वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के समर्थक रहे हैं और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के गठन के विचार का विरोध करते रहे हैं। उनके राजनीतिक दृष्टिकोण में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है।

इसके विपरीत येर लैपिड को अपेक्षाकृत उदार और व्यावहारिक नेता माना जाता है। वे शहरी मध्यम वर्ग, पेशेवर समुदाय और उदार विचारधारा वाले मतदाताओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं। उनकी राजनीति संतुलित दृष्टिकोण और प्रशासनिक सुधारों पर केंद्रित रही है।

इन दोनों नेताओं की वैचारिक भिन्नताओं के बावजूद गठबंधन का निर्णय राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


गादी आइजनकोट की भूमिका से बदल सकते हैं समीकरण

इजराइल के पूर्व सेना प्रमुख Gadi Eisenkot का नाम भी इस राजनीतिक समीकरण में अहम माना जा रहा है। उनकी मजबूत सैन्य छवि और लोकप्रियता के कारण वे सुरक्षा मुद्दों को प्राथमिकता देने वाले मतदाताओं के बीच प्रभावशाली माने जाते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार यदि आइजनकोट इस गठबंधन में शामिल होते हैं तो विपक्ष की स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि अभी तक उन्होंने इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


लैपिड के लिए गठबंधन क्यों जरूरी माना जा रहा है

येर लैपिड की पार्टी इस समय संसद में 24 सीटों के साथ विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों में इसकी संभावित सीटों में गिरावट की आशंका जताई गई है। ऐसी स्थिति में बेनेट के साथ गठबंधन उन्हें राजनीतिक मजबूती देने का प्रयास माना जा रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कदम विपक्षी वोटों के बिखराव को रोकने में मदद कर सकता है।


बेनेट के लिए भी रणनीतिक रूप से अहम कदम

दूसरी ओर नफ्ताली बेनेट के सामने भी राजनीतिक आधार मजबूत बनाए रखने की चुनौती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि गादी आइजनकोट जैसे नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता उनके समर्थक आधार को प्रभावित कर सकती थी।

ऐसे में लैपिड के साथ गठबंधन करना उनके लिए राजनीतिक रूप से व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।


सरकारी फंडिंग के समीकरण भी बने गठबंधन का कारण

इजराइल की राजनीतिक व्यवस्था में पार्टियों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता संसद में सीटों की संख्या के आधार पर तय होती है। लैपिड की पार्टी के पास अधिक सीटें होने के कारण उसे अधिक फंडिंग प्राप्त होती है, जिससे गठबंधन की रणनीति को आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार इससे चुनावी अभियान को मजबूत आधार मिल सकता है।


क्या यह गठबंधन नेतन्याहू को चुनौती दे पाएगा?

इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार यदि बेनेट, लैपिड और आइजनकोट एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो वे लगभग 38 सीटें हासिल कर सकते हैं। इससे वे सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकते हैं, हालांकि सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक गठबंधन की आवश्यकता बनी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गठबंधन का सबसे बड़ा प्रभाव मनोवैज्ञानिक स्तर पर पड़ सकता है। यदि मतदाताओं को विपक्ष मजबूत और एकजुट दिखाई देता है, तो मतदान प्रतिशत बढ़ सकता है और चुनावी परिणामों पर इसका असर पड़ सकता है।


आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत

इजराइल की राजनीति में आने वाले महीनों में गठबंधन और समीकरण तेजी से बदलने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष की एकजुटता और संभावित नए सहयोगियों की भूमिका आगामी चुनावों की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।

विशेष रूप से गादी आइजनकोट का अंतिम निर्णय इस पूरे राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दे सकता है।


नफ्ताली बेनेट और येर लैपिड का फिर से साथ आना इजराइल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। नई ‘टुगेदर’ पार्टी के जरिए विपक्षी एकता का संदेश देने की कोशिश ने आगामी चुनावों को पहले से अधिक दिलचस्प बना दिया है, जहां अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह गठबंधन बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक प्रभुत्व को चुनौती देने में सफल हो पाएगा।

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