खतरनाक चाइनीज मांझे पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, प्रदेशभर में अभियान चलाने का आदेश- Allahabad High Court
Allahabad High Court की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में लगातार बढ़ रही चाइनीज मांझे (Chinese Manja) से होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि खतरनाक चाइनीज मांझे के उत्पादन, बिक्री और उपयोग को रोकने के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक अभियान चलाया जाए और इस अपराध में शामिल लोगों को जवाबदेह बनाया जाए।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हाल ही में सरकार की ओर से जवाबी हलफनामे दाखिल किए गए हैं, लेकिन समाचार रिपोर्टों से स्पष्ट है कि चाइनीज मांझे से लोगों के घायल होने और मौत जैसी घटनाएं अब भी जारी हैं।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर अदालत ने जताई चिंता
पीठ ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें चाइनीज मांझे से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कई मामलों में जान भी गई है। अदालत ने इन घटनाओं को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए सरकार से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है।
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश
न्यायमूर्ति Rajan Roy और न्यायमूर्ति Manjeev Shukla की खंडपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता Motilal Yadav द्वारा वर्ष 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में प्रदेश में चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और इसके उत्पादन व बिक्री पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि हाल के समय में लगभग 20 लोग इसके कारण घायल हुए हैं और कुछ मामलों में मौत भी हुई है।
ऑनलाइन बिक्री पर भी नियंत्रण की उठी मांग
याचिका में यह भी कहा गया कि चाइनीज मांझे की ऑनलाइन खरीद-बिक्री पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। इसके साथ ही इसके निर्माण और वितरण से जुड़े लोगों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अदालत ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से ठोस नीति बनाने को कहा।
पहले भी कोर्ट ने सरकार से मांगी थी कार्य योजना
इससे पहले 11 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि आखिर ऐसी घटनाएं सुर्खियों में आने के बाद ही प्रशासन सक्रिय क्यों होता है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समुचित और प्रभावी कार्य योजना तैयार की जाए।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा था कि मांझे से घायल होने वाले लोगों के इलाज का खर्च और मुआवजे के विषय में भी सरकार विचार करे।
जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर
अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि जिम्मेदारी केवल चाइनीज मांझे का उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल करने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि रोकथाम के दायित्व का निर्वहन न करने वाले संबंधित तंत्र की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पीठ ने चेतावनी दी थी कि यदि प्रतिबंध के बावजूद बिक्री और उपयोग जारी रहता है तो सरकार को पीड़ितों के इलाज और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जा सकता है।
चार विभागों को नीति निर्माण में शामिल करने की जानकारी
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता Shailendra Kumar Singh ने अदालत को अवगत कराया कि पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन में नीति निर्माण के लिए पर्यावरण विभाग, कमर्शियल टैक्स विभाग, एमएसएमई विभाग, विधि विभाग और गृह विभाग को शामिल किया जा रहा है।
सरकार ने संकेत दिया कि समन्वित कार्य योजना के माध्यम से चाइनीज मांझे की रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाए जाएंगे।

