उत्तर प्रदेश

Agra में पॉक्सो केस में समझौते का दबाव बना रहा था आरोपी, राजीनामा न करने पर किशोरी को ले जाने का आरोप

उत्तर प्रदेश के Agra में पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ के एक पुराने मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आरोप है कि कोर्ट में विचाराधीन मामले में समझौता न करने पर आरोपी पक्ष ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया और बाद में किशोरी को धमकाकर अपने साथ ले गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और परिवार ने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

मामला कमला नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि किशोरी को बरामद कर लिया गया है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी फरार चल रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।


2023 में दर्ज हुआ था छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट का मुकदमा

पीड़ित परिवार के अनुसार वर्ष 2023 में मोहल्ले के रहने वाले बबलू नामक युवक पर उनकी नाबालिग बेटी के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था। मामले में पुलिस ने छेड़छाड़, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में आरोपी को अदालत से जमानत मिल गई और तभी से कथित तौर पर पीड़ित परिवार पर राजीनामा करने का दबाव बनाया जा रहा था।

परिजनों का आरोप है कि आरोपी बबलू और उसका भाई दीपू लगातार समझौते के लिए धमकी दे रहे थे। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार इस दबाव की जानकारी आसपास के लोगों को भी दी थी।


बाजार गई किशोरी को ले जाने का आरोप, परिवार में मचा हड़कंप

परिवार के मुताबिक 30 अप्रैल की शाम करीब चार बजे उनकी बेटी बाजार गई थी। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचे और किशोरी को अपने साथ ले गए। घटना के बाद जब बेटी घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि घटना के बाद मुख्य आरोपी बबलू भी घर से गायब हो गया। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई। परिजनों ने आशंका जताई कि उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी हो सकती है।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की। इलाके में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई।


पुलिस ने दर्ज किया केस, किशोरी को किया बरामद

मामले को लेकर Syed Ali Abbas, डीसीपी सिटी ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और किशोरी को तलाश कर बरामद कर लिया गया है।

पुलिस के अनुसार किशोरी ने कोर्ट में दिए बयान में आरोपी का समर्थन किया है। हालांकि चूंकि वह नाबालिग है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रही है।


पॉक्सो मामलों में समझौते का दबाव बना गंभीर चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो और महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में समझौते का दबाव बनाना बेहद गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार कई बार सामाजिक दबाव, डर और धमकियों का सामना करता है।

कानूनी जानकारों के अनुसार पॉक्सो एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है, जिसमें नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय दोनों ही संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करते हैं।

महिला सुरक्षा से जुड़े सामाजिक संगठनों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को मानसिक और कानूनी सहायता मिलना बेहद जरूरी है ताकि वे दबाव में आए बिना न्याय प्रक्रिया का सामना कर सकें।


कमला नगर इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना

घटना के बाद कमला नगर क्षेत्र में लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में पुलिस और प्रशासन को और अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए।

इलाके के लोगों ने मांग की है कि आरोपी की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।


पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले में किशोरी के बयान, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए सतर्कता के साथ जांच में जुटी हुई है।


आगरा के कमला नगर क्षेत्र में सामने आया यह मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों में पीड़ित परिवारों पर पड़ने वाले सामाजिक और मानसिक दबाव को फिर उजागर करता है। पुलिस द्वारा किशोरी को बरामद कर लिया गया है, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष जांच अब इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता, सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया का संतुलन बेहद आवश्यक होता है।

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