Bareilly में ओवरहेड टैंक गिरने पर बड़ा एक्शन: जल निगम की अधिशासी अभियंता कुमकुम गंगवार निलंबित, शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट
News-Desk
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Bareilly news, Bareilly Overhead Tank Collapse, Jal Nigam news, Kumkum Gangwar Suspended, Sardar Nagar Tank Accident, बरेली ओवरहेड टैंक हादसाBareilly जिले में ग्राम पंचायत सरदारनगर में ओवरहेड टैंक ढहने के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जल निगम ग्रामीण की अधिशासी अभियंता Kumkum Gangwar को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस हादसे ने ग्रामीण जलापूर्ति परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अधिशासी अभियंता पर अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन न करने के आरोप पाए गए हैं। निलंबन के बाद उन्हें जल निगम ग्रामीण के मुख्य अभियंता, बुंदेलखंड क्षेत्र झांसी कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
डेढ़ साल पहले बना था करोड़ों का ओवरहेड टैंक
जानकारी के अनुसार बरेली के आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत सरदारनगर में करीब डेढ़ वर्ष पहले जल निगम की ओर से 3.62 करोड़ रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था। यह टैंक गांव में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
लेकिन 4 मई 2026 की शाम अचानक यह ओवरहेड टैंक भरभराकर गिर पड़ा। टंकी गिरने की आवाज सुनते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों में दहशत फैल गई और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
हादसे में कई ग्रामीण घायल, बड़ा हादसा टला
ओवरहेड टैंक गिरने के समय उसके आसपास कुछ ग्रामीण मौजूद थे। हादसे में गांव के डोलीलाल (32 वर्ष), अर्जुन (30 वर्ष), वीरपाल (45 वर्ष), रविंद्र (50 वर्ष) और नन्कू (45 वर्ष) घायल हो गए थे। इसके अलावा चार अन्य लोगों को भी मामूली चोटें आई थीं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक अगर हादसा कुछ देर बाद होता, जब आसपास अधिक लोग मौजूद रहते, तो जनहानि कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री और लापरवाही बरती गई थी।
हादसे ने खोली निर्माण कार्य में अनियमितताओं की पोल
टंकी ढहने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर भी टंकी गिरने के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने लगीं।
जिलाधिकारी और शासन स्तर से कराई गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और शासन स्तर पर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम की विशेष टीम को मौके पर भेजा गया।
सूत्रों के अनुसार जल निगम की तकनीकी टीम दो दिनों तक बरेली में रुकी और घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने टंकी के मलबे से कंक्रीट, लोहे और अन्य निर्माण सामग्री के नमूने एकत्र किए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया।
15 जून तक मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
शासन ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी Vikram Pratap Singh को सौंपी है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि 15 जून तक पूरी जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए।
अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हादसा तकनीकी खामी, निर्माण में लापरवाही या घटिया सामग्री के उपयोग के कारण हुआ। रिपोर्ट के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।
जल निगम के एमडी डॉ. राजशेखर ने लिया बड़ा फैसला
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक Dr. Rajshekhar ने अधिशासी अभियंता Kumkum Gangwar के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
सरकारी आदेश में स्पष्ट कहा गया कि निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की गई।
ग्रामीणों में नाराजगी, गुणवत्ता जांच की मांग तेज
गांव सरदारनगर और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कार्य सुरक्षित नहीं है तो यह सीधे जनता की जिंदगी से खिलवाड़ है।
कई ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल अधिकारियों पर ही नहीं बल्कि निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों और तकनीकी एजेंसियों की भी जांच होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।
प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सरकारी निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। पिछले कुछ वर्षों में कई जिलों में सड़क, पुल, भवन और जल परियोजनाओं में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्यों की नियमित तकनीकी जांच और स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य किए जाने चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन और लोगों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सके।
तकनीकी रिपोर्ट के बाद हो सकती है और बड़ी कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल जांच जारी है और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। शासन स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण के दौरान किन अधिकारियों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय होती है।
संभावना जताई जा रही है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

