उत्तर प्रदेश

Bareilly में बिजली बिल समायोजन के नाम पर रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, एंटी करप्शन टीम ने लाइन कुली को रंगे हाथ दबोचा

Bareilly में बिजली विभाग में कथित भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन टीम ने बिजली बिल समायोजन के नाम पर एक उपभोक्ता से 18 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए विद्युत निगम के संविदाकर्मी लाइन कुली अनस कादरी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया।

एंटी करप्शन टीम का दावा है कि आरोपी संविदा कर्मी यह रकम डीडीपुरम उपकेंद्र के जूनियर इंजीनियर जितेंद्र केसरवानी के कहने पर ले रहा था। मामले में जेई को भी नामजद किया गया है, जबकि तकनीकी कर्मचारी रतन लाल की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


बिजली बिल समायोजन के लिए मांगी गई थी रिश्वत

एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर Praveen Sanyal के अनुसार मॉडल टाउन निवासी नितिन आनंद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बिजली बिल के समायोजन के लिए उनसे रिश्वत मांगी जा रही है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि डीडीपुरम उपकेंद्र के जेई जितेंद्र केसरवानी ने उन्हें बुधवार को रुपये लेकर बुलाया था। इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले की निगरानी शुरू कर दी और जाल बिछाया गया।


कैफे के पास हुई कार्रवाई, रंगे हाथ दबोचा गया आरोपी

बुधवार दोपहर बाद शिकायतकर्ता नितिन आनंद तय योजना के अनुसार रिश्वत की रकम लेकर पहुंचे। आरोप है कि जेई के निर्देश पर संविदा पर तैनात लाइन कुली अनस कादरी रकम लेने के लिए बैकबेल कैफे के पास पहुंचा।

वहां पहले से मौजूद एंटी करप्शन टीम ने जैसे ही आरोपी को रिश्वत लेते देखा, तुरंत उसे पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से रिश्वत की रकम भी बरामद की गई।

घटना के बाद मौके पर काफी देर तक हलचल का माहौल बना रहा। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।


जेई समेत अन्य कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में

एंटी करप्शन टीम ने मामले में जेई जितेंद्र केसरवानी को भी नामजद किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि रिश्वत मांगने और लेने की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी।

तकनीकी कर्मचारी रतन लाल के बारे में भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां विभागीय रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।


बिजली विभाग में पहले भी सामने आ चुका है करोड़ों के खेल का मामला

बिजली बिल समायोजन को लेकर भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिजली बिलों में गड़बड़ी और राजस्व हानि से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आ चुका है।

जानकारी के अनुसार बिजली बिल संशोधन और समायोजन के नाम पर करीब 67 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला पहले भी उजागर हुआ था। हालांकि कई महीनों बाद भी उसकी जांच पूरी नहीं हो सकी है।

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी Riya Kejriwal के निर्देश पर जनवरी में इस पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी।


67 लाख रुपये की गड़बड़ी में अधिकारियों पर कार्रवाई

जांच में सामने आया था कि बिजली बिलों के संशोधन के दौरान राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुरेंद्र गौतम और अनुज गुप्ता को इस मामले में चार्जशीट भी दी जा चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक इकाइयों के बिजली बिलों में संशोधन के नाम पर लाखों रुपये का समायोजन किया गया था। जांच में पाया गया कि कई मामलों में नियमों के विपरीत बदलाव किए गए।

बताया गया कि अनुज गुप्ता के कार्यकाल के दौरान नौ मामलों में लगभग 17.34 लाख रुपये और सुरेंद्र गौतम के कार्यकाल में 135 बिलों के संशोधन के दौरान करीब 49.67 लाख रुपये के समायोजन में गड़बड़ी पाई गई।

इस मामले में लेखा विभाग के एक अधिकारी, दो लिपिक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका की भी जांच जारी है।


बिजली उपभोक्ताओं में बढ़ी नाराजगी

लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों से बिजली उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि बिल संशोधन और समायोजन के नाम पर आम उपभोक्ताओं को परेशान किया जाता है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि बिजली विभाग में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और रिश्वतखोरी में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम को और मजबूत करके ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।


एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से विभाग में मचा हड़कंप

एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में खलबली मच गई है। सूत्रों के अनुसार कई कर्मचारी अब जांच के दायरे में आने की आशंका से सतर्क हो गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच की जाएगी।


बरेली में बिजली बिल समायोजन के नाम पर रिश्वत लेते संविदाकर्मी की गिरफ्तारी ने बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इससे पहले सामने आए लाखों रुपये के गबन के मामलों के बीच यह कार्रवाई विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई तक पहुंचकर कितने लोगों की जिम्मेदारी तय करती हैं।

 

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