उत्तर प्रदेश

Kanpur में ITBP जवानों का कमिश्नर ऑफिस घेराव, मां का हाथ कटने पर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

Kanpur में एक निजी अस्पताल पर मेडिकल लापरवाही के गंभीर आरोपों को लेकर बड़ा हंगामा खड़ा हो गया। आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने अपनी मां निर्मला देवी का हाथ कटने के मामले में कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि करीब 100 आईटीबीपी जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए, जिससे पूरे इलाके में हलचल मच गई।

जवानों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और समय पर सही इलाज न मिलने के कारण उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। वहीं सीएमओ कार्यालय की जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए हैं। आईटीबीपी जवानों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों को बचाने की कोशिश कर रहा है।


कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP का काफिला, कई गाड़ियां और ट्रक रहे मौजूद

शनिवार सुबह करीब 11:15 बजे आईटीबीपी के जवान बड़ी संख्या में पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। परिसर में आईटीबीपी की 15 से अधिक गाड़ियां और ट्रक मौजूद रहे। जवानों ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ. विपिन कुमार ताडा से मुलाकात की।

कमिश्नर कार्यालय के बाहर अचानक बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों के पहुंचने से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया। पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया।

अधिकारियों से बातचीत के बाद आईटीबीपी की पांच से छह गाड़ियां सीएमओ कार्यालय के लिए रवाना हुईं। पूरे घटनाक्रम ने कानपुर के प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ा दी है।


‘डॉक्टरों की लापरवाही से मां का हाथ काटना पड़ा’ — जवान का आरोप

आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने आरोप लगाया कि कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उनकी मां निर्मला देवी की हालत गंभीर हो गई और आखिरकार उनका हाथ काटना पड़ा।

विकास सिंह के मुताबिक 13 मई की शाम उनकी मां को सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी, जिसके बाद उन्हें कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन करीब 12 घंटे बाद 14 मई को उनकी मां के दाहिने हाथ में तेज सूजन आ गई।

उन्होंने बताया कि जब डॉक्टरों से सूजन के बारे में पूछा गया तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि धीरे-धीरे सूजन कम हो जाएगी। हालांकि हालत बिगड़ती चली गई।


साथी जवानों की सलाह पर दूसरे अस्पताल में कराया भर्ती

विकास सिंह के अनुसार जब उन्हें स्थिति गंभीर लगने लगी तो उन्होंने अपने साथी जवानों से बातचीत की। साथियों की सलाह पर उन्होंने अपनी मां को दूसरे अस्पताल ले जाने का फैसला किया।

14 मई की शाम को निर्मला देवी को पारस हॉस्पिटल में शिफ्ट कराया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि हाथ में गंभीर संक्रमण फैल चुका है।

परिवार का आरोप है कि अगर पहले अस्पताल में समय रहते सही इलाज मिल जाता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।


17 मई को काटना पड़ा हाथ, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने संक्रमण को बेहद गंभीर बताया। संक्रमण तेजी से फैलने के कारण आखिरकार 17 मई को निर्मला देवी का हाथ काटना पड़ा।

इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। विकास सिंह का कहना है कि उनकी मां को जो पीड़ा झेलनी पड़ी, वह किसी भी परिवार के लिए बेहद दर्दनाक है।

मामले ने मेडिकल लापरवाही और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


रेल बाजार पुलिस और ACP कार्यालय के चक्कर लगाने का आरोप

आईटीबीपी जवान का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए लगातार प्रयास किए। वे दो दिनों तक रेलबाजार पुलिस और एसीपी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोप है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच मामले को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसी से नाराज होकर विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए।

यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई।


पुलिस कमिश्नर ने मांगी स्पष्ट रिपोर्ट

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने सीएमओ कार्यालय को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय की रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई। हालांकि इस रिपोर्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।

बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में “संभावनाओं” के आधार पर बातें कही गई थीं, जिस पर पुलिस कमिश्नर ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संभावनाओं पर नहीं बल्कि स्पष्ट तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि दोष तय कर अभियोग दर्ज करने संबंधी स्पष्ट संस्तुति प्रस्तुत की जाए।


सीएमओ पर डॉक्टरों को बचाने का आरोप

शनिवार को आईटीबीपी जवान फिर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और सीएमओ पर डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया।

विकास सिंह और उनके समर्थकों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही। उनका आरोप है कि रिपोर्ट को इस तरह तैयार किया गया ताकि अस्पताल और डॉक्टरों पर सीधी जिम्मेदारी तय न हो सके।

इस आरोप के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।


मेडिकल लापरवाही के मामलों को लेकर बढ़ती चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में मेडिकल लापरवाही के मामलों को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। कई बार इलाज में देरी, गलत इंजेक्शन, संक्रमण या लापरवाही के कारण मरीजों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ता है।

ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और मरीजों की निगरानी को लेकर सख्त प्रोटोकॉल लागू होने चाहिए।


कानपुर में बढ़ा दबाव, कार्रवाई की मांग तेज

मामला अब केवल एक परिवार की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। आईटीबीपी जवानों के खुलकर सामने आने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।

कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में पोस्ट साझा कर रहे हैं।


कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ कटने का मामला अब मेडिकल लापरवाही, प्रशासनिक जवाबदेही और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कदम इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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