ईंटें बिछाने से विम्बलडन तक: Marcus Willis की प्रेरणादायक वापसी, जिसने रोजर फेडरर के खिलाफ खेलकर दुनिया को चौंका दिया
News-Desk
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Marcus Willis, sports news, Wimbledon 2026, टेनिस, टेनिस समाचार, प्रेरणादायक कहानी, मार्कस विलिस, रोजर फेडरर, विम्बलडनखेल जगत में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। ब्रिटेन के टेनिस खिलाड़ी Marcus Willis की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी आर्थिक तंगी, चोटों और मानसिक संघर्ष से जूझने वाले विलिस आज एक बार फिर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट विम्बलडन में वापसी कर चुके हैं।
करीब दस वर्ष पहले उन्होंने दुनिया के महान टेनिस खिलाड़ियों में शामिल रोजर फेडरर के खिलाफ कोर्ट साझा कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अब वह एक नई सोच, नई भूमिका और नई जिम्मेदारियों के साथ फिर से विम्बलडन में उतर रहे हैं।
दुनिया के 772वें नंबर से शुरू हुआ था यादगार सफर
वर्ष 2016 में मार्कस विलिस की विश्व रैंकिंग 772 थी। उन्होंने विम्बलडन के मुख्य ड्रॉ तक पहुंचने के लिए क्वालिफाइंग मुकाबलों का कठिन रास्ता तय किया।
मुख्य दौर में उनका सामना तत्कालीन विश्व दिग्गज रोजर फेडरर से हुआ। मुकाबला भले ही फेडरर ने सीधे सेटों में जीत लिया, लेकिन मैच के दौरान विलिस द्वारा लगाया गया एक शानदार लॉब शॉट आज भी विम्बलडन के यादगार पलों में गिना जाता है।
उस एक शॉट ने उन्हें रातोंरात दुनिया भर में पहचान दिला दी।
दो अलग-अलग दुनिया के खिलाड़ियों का मुकाबला
उस समय यह मुकाबला केवल दो टेनिस खिलाड़ियों के बीच नहीं था, बल्कि दो बिल्कुल अलग परिस्थितियों की कहानी भी था।
एक ओर रोजर फेडरर थे, जो विश्व टेनिस के सबसे सफल और लोकप्रिय खिलाड़ियों में शामिल थे। दूसरी ओर मार्कस विलिस थे, जिन्होंने उस पूरे वर्ष टेनिस से बेहद कम कमाई की थी और आर्थिक संघर्ष से गुजर रहे थे।
विलिस स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि वह उस समय फिटनेस के मामले में भी आदर्श स्थिति में नहीं थे और जंक फूड के काफी शौकीन थे।
टेनिस छोड़ने का बना लिया था मन
फेडरर के खिलाफ मुकाबले से पहले मार्कस विलिस पेशेवर टेनिस छोड़ने का निर्णय लगभग ले चुके थे।
हालांकि उनकी तत्कालीन गर्लफ्रेंड, जो अब उनकी पत्नी हैं, जेनी ने उन्हें हार न मानने और एक आखिरी कोशिश करने के लिए प्रेरित किया।
उसी फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्हें विम्बलडन तक पहुंचा दिया।
शोहरत मिली, फिर मुश्किलों का दौर शुरू हुआ
फेडरर के खिलाफ मैच के बाद मार्कस विलिस मीडिया की सुर्खियों में छा गए। कई टीवी इंटरव्यू हुए और दुनिया भर में उनकी कहानी की चर्चा हुई।
लेकिन यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चला।
लगातार चोटों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों के कारण उनका करियर प्रभावित हुआ। अंततः वर्ष 2018 में उन्होंने पेशेवर टेनिस से दूरी बना ली।
परिवार चलाने के लिए किया निर्माण कार्य
कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक स्थिति और कठिन हो गई।
परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए मार्कस विलिस ने अपने भाई की निर्माण कंपनी में ईंटें बिछाने (ब्रिकलेयर) का काम किया।
एक समय विम्बलडन में खेलने वाला खिलाड़ी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए निर्माण स्थल पर मेहनत कर रहा था।
पत्नी ने फिर बढ़ाया हौसला
कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलीं। परिवार के एक करीबी मित्र ने उनके पेशेवर टेनिस में वापसी का खर्च उठाने की इच्छा जताई।
विलिस स्वयं वापसी को लेकर आश्वस्त नहीं थे, लेकिन उनकी पत्नी जेनी ने एक बार फिर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
उन्होंने कहा,
“जाओ और खेलो, जिंदगी में ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा।”
यही शब्द उनके लिए नई शुरुआत का आधार बने।
सिंगल्स नहीं, डबल्स में बनाई नई पहचान
वापसी के बाद मार्कस विलिस ने अपनी रणनीति बदली।
उन्होंने सिंगल्स की बजाय डबल्स प्रतियोगिताओं पर ध्यान केंद्रित किया। मेहनत और निरंतर प्रदर्शन के दम पर वह अब दुनिया के प्रमुख डबल्स खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं।
वर्तमान में वह विश्व डबल्स रैंकिंग में 64वें स्थान पर हैं।
अब खिलाड़ी के साथ जिम्मेदार पिता भी हैं
35 वर्षीय मार्कस विलिस अब केवल टेनिस खिलाड़ी नहीं, बल्कि चार बच्चों के पिता भी हैं।
उनका कहना है कि अब उनकी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। टेनिस के अलावा उनका अधिकांश समय बच्चों को स्कूल छोड़ने, उनकी गतिविधियों में सहयोग करने और परिवार के साथ बिताने में गुजरता है।
इसके साथ ही वह अपना एक पॉडकास्ट भी संचालित करते हैं।
फेडरर वाला मैच आज भी है सबसे बड़ी सीख
मार्कस विलिस का कहना है कि रोजर फेडरर के खिलाफ खेला गया मुकाबला केवल उनके करियर का नहीं, बल्कि पूरे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था।
उनके अनुसार उस अनुभव ने उन्हें संघर्ष करना, दबाव झेलना और जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखना सिखाया।
उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य केवल बेहतर खिलाड़ी बनना ही नहीं, बल्कि एक अच्छा पति और जिम्मेदार पिता बनना भी है।
संघर्ष, हिम्मत और वापसी की मिसाल
मार्कस विलिस की कहानी इस बात का उदाहरण है कि खेल में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि धैर्य, मेहनत और हार न मानने की सोच से भी मिलती है।
विम्बलडन में उनकी वापसी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा मानी जा रही है, जो किसी कठिन दौर के बाद अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

