Muzaffarnagar बीएसएनएल कर्मचारियों और पेंशनरों का तीन दिवसीय धरना शुरू: थर्ड पीआरसी, पेंशन संशोधन और संविदा कर्मियों की सुरक्षा को लेकर बुलंद हुई आवाज
News-Desk
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धरने के पहले दिन कर्मचारियों और पेंशनरों ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए संबंधित विषयों पर शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। आंदोलन 22 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर शुरू हुआ संयुक्त आंदोलन
धरने में शामिल संगठनों ने बताया कि उनका आंदोलन मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगों पर केंद्रित है। इनमें तीसरे वेतन पुनरीक्षण (Third PRC) को लागू करना, बीएसएनएल पेंशनरों की पेंशन का संशोधन तथा संविदा कर्मियों की छंटनी पर रोक लगाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।
प्रतिनिधियों का कहना था कि इन मुद्दों का संबंध केवल कर्मचारियों और पेंशनरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बीएसएनएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण दूरसंचार संस्थान की कार्यक्षमता और मानव संसाधन से भी जुड़ा हुआ है।
पटेलनगर टेलीफोन एक्सचेंज परिसर में जुटे कर्मचारी और पेंशनर
धरना कार्यक्रम का आयोजन पटेलनगर स्थित टेलीफोन एक्सचेंज परिसर में किया गया, जहां बड़ी संख्या में वर्तमान कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी और पेंशनर उपस्थित रहे। धरना शांतिपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एन. पी. निगम ने की, जबकि संचालन आर. यू. सिंह ने किया।
परिमंडलीय पदाधिकारियों ने भी रखे अपने विचार
धरना स्थल पर संचार निगम पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश (पश्चिम) के परिमंडलीय सचिव रामबीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में पेंशनरों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए तथा संगठित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में गणेश दत्त शर्मा, जनार्दन शर्मा तथा एन. डी. त्यागी ने भी कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों से संबंधित अपने विचार रखे।
इसके अतिरिक्त परिमंडलीय अध्यक्ष मोहम्मद इसराईल ने भी उपस्थित कर्मचारियों और पेंशनरों को संबोधित करते हुए संगठन की ओर से आंदोलन के उद्देश्यों की जानकारी दी और सभी से एकजुट रहने का आह्वान किया।
थर्ड पीआरसी और पेंशन संशोधन पर जताई चिंता
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से वेतन पुनरीक्षण और पेंशन संशोधन से जुड़े विषय लंबित हैं। उनका कहना था कि इन मामलों पर समयबद्ध निर्णय होने से कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनरों को राहत मिल सकती है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि पेंशनर अपने पूरे सेवाकाल के दौरान संस्थान के विकास में योगदान देते हैं, इसलिए सेवा निवृत्ति के बाद उनकी लंबित मांगों का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
संविदा कर्मियों से जुड़े मुद्दे भी रहे प्रमुख
धरने में शामिल प्रतिनिधियों ने संविदा कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संस्थान में कार्यरत संविदा कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके रोजगार से जुड़े विषयों पर भी संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि संविदा कर्मियों की छंटनी पर रोक लगाने के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनरों की रही भागीदारी
धरने के पहले दिन बड़ी संख्या में कर्मचारियों और पेंशनरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से आर. यू. सिंह, गणेश दत्त शर्मा, एन. डी. त्यागी, जनार्दन शर्मा, एस. पी. सिंह, ओमकार शर्मा, सुल्तान सिंह, देवेंद्र वर्मा, जे. पी. गुप्ता, सतीश कुमार, खेमचंद, राजबीर सिंह, यू. एन. त्रिपाठी, सुरेश शर्मा, आदिल, रामबली, राधेश्याम सैनी, जय प्रकाश, यू. एन. मिश्रा, रामाधार, घनश्याम, राम अवतार, जयकिशन, जय सिंह, आर. पी. शर्मा, लालचंद, बृजमोहन शर्मा, हरिश्चंद्र, वी. के. शुक्ला, मंजू, यू. सी. शर्मा, रामशरण, सुरेंद्र, राम सिंह सहित अनेक कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों ने आंदोलन के दौरान संगठनात्मक एकजुटता का परिचय देते हुए आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में भागीदारी बनाए रखने की बात कही।
तीन दिनों तक जारी रहेगा आंदोलन
आयोजकों के अनुसार यह संयुक्त धरना 22 जुलाई से 24 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न चरणों में कर्मचारी एवं पेंशनर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
संगठनों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य अपनी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाना तथा कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े विषयों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
संगठित प्रयासों पर दिया गया जोर
वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संगठनों के बीच समन्वय से कर्मचारियों से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है। उन्होंने सभी सदस्यों से अनुशासन बनाए रखते हुए संगठनात्मक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र के दूरसंचार संस्थानों की भूमिका, कर्मचारियों के योगदान तथा सेवानिवृत्त पेंशनरों के हितों से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए।

