Muzaffarnagar में AIMIM का प्रदर्शन: मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई रोकने की मांग, राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
Muzaffarnagar News: रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मुजफ्फरनगर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
‘यह छात्रों के भविष्य का मामला है’
प्रदर्शन के दौरान एआईएमआईएम नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और यदि संस्थान पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई होती है तो इसका सबसे अधिक प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।
संगठन के नेताओं ने सरकार से इस मामले में पुनर्विचार करने और शिक्षा संस्थान के हित में सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
इंतजार अंसारी ने उठाए सवाल
एआईएमआईएम के पश्चिमी उत्तर प्रदेश महासचिव इंतजार अंसारी ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के कुछ भवनों के नक्शों को लेकर प्रशासन को आपत्ति है, तो नियमानुसार उनकी स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराई जानी चाहिए, न कि पूरे संस्थान को नुकसान पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार ऐसी कार्रवाई से प्रदेश सरकार की छवि भी प्रभावित हो सकती है।
इंतजार अंसारी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि बिना स्वीकृत नक्शों वाले भवनों पर कार्रवाई की जा रही है, तो क्या अन्य राजनीतिक दलों के कार्यालयों या इसी प्रकार के अन्य भवनों पर भी समान मानकों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए।
जिलाध्यक्ष इमरान कासमी का बयान
एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष मौलाना इमरान कासमी ने कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान है, जहां गरीब और मध्यम वर्ग के हजारों छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यदि सरकार को विश्वविद्यालय के नाम पर आपत्ति है, तो नाम बदलने जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है, लेकिन शिक्षा के इस केंद्र को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को समाप्त करने के बजाय उसके संरक्षण और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार से कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग
प्रदर्शन के दौरान एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से प्रस्तावित कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन करना नहीं, बल्कि शिक्षा, छात्रों के भविष्य और शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उठाना है।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा संस्थानों के विरुद्ध इस प्रकार की कार्रवाई जारी रहती है, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराता रहेगा।
ज्ञापन के माध्यम से रखी मांगें
प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में विश्वविद्यालय पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई को रोकने तथा मामले में उचित समाधान निकालने की मांग की गई।
एआईएमआईएम नेताओं ने कहा कि शिक्षा से जुड़े संस्थानों के संबंध में कोई भी निर्णय लेते समय वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मामला न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा
गौरतलब है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित मामला विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरणों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। मंगलवार को मुजफ्फरनगर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान एआईएमआईएम नेताओं ने अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक मांगों को ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया।

