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France में कृषि बिल पर सियासी भूचाल: पर्यावरण मंत्री Monique Barbu ने दिया इस्तीफा, प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरी पर सरकार घिरी

France  की पर्यावरण मंत्री Monique Barbu ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब फ्रांसीसी संसद ने एक ऐसे कृषि बिल को मंजूरी दी है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति देने और किसानों के लिए बड़े जलाशय बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

मोनिक बारबू ने स्पष्ट किया कि वह इन दोनों प्रावधानों के खिलाफ थीं और उन्हें विश्वास था कि सरकार अंतिम समय में जोड़े गए इन विवादित संशोधनों पर पुनर्विचार करेगी। उनका आरोप है कि ऐसा नहीं हुआ और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उनके मूल सिद्धांतों से समझौता करना उनके लिए संभव नहीं था। इसी कारण उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।


कृषि बिल ने क्यों बढ़ाया राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद?

फ्रांस की संसद में पेश किए गए इस कृषि विधेयक को सरकार किसानों के हितों से जुड़ा सुधार बता रही है। सरकार का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत, कम होती आय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण फ्रांस के किसान कठिन दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में उन्हें कुछ नियामकीय राहत देना आवश्यक है।

हालांकि, विधेयक में शामिल दो प्रमुख प्रावधानों ने पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों और सरकार के भीतर भी असहमति पैदा कर दी।


पहला विवाद: प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल को मिली मंजूरी

विधेयक के तहत दो विवादित कीटनाशकों—एसेटामिप्रिड (Acetamiprid) और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन (Flupyradifurone)—के सीमित और अस्थायी उपयोग की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकार के अनुसार इन रसायनों का उपयोग मुख्य रूप से—

  • चुकंदर (Sugar Beet)
  • सेब (Apple)
  • चेरी (Cherry)

जैसी फसलों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा।

सरकारी पक्ष का तर्क है कि यदि किसानों को इन कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति नहीं दी गई तो वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कई यूरोपीय देशों में इनका उपयोग पहले से अनुमत है।


वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

इस प्रस्ताव का सबसे तीखा विरोध वैज्ञानिक समुदाय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने किया है।

उनका कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों (Pollinators) के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • मधुमक्खियां कृषि उत्पादन की प्राकृतिक सहयोगी हैं।
  • फलों, सब्जियों और अनेक फसलों के परागण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • यदि इनकी संख्या घटती है तो खाद्य उत्पादन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • जैव विविधता (Biodiversity) को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक कृषि लाभ के लिए ऐसे निर्णय भविष्य में खेती और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।


दूसरा बड़ा विवाद: किसानों को बड़े जलाशय बनाने की आसान अनुमति

विधेयक का दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान किसानों के लिए सिंचाई हेतु बड़े जलाशयों या कृत्रिम तालाबों के निर्माण की प्रक्रिया को सरल बनाना है।

सरकार का कहना है कि बदलते मौसम, सूखे और अनियमित वर्षा के कारण जल भंडारण क्षमता बढ़ाना कृषि उत्पादन के लिए आवश्यक हो गया है।

लेकिन पर्यावरणविदों ने इस पर भी गंभीर आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि ऐसे बड़े जलाशयों में पानी भरने के लिए नदियों और भूजल स्रोतों से भारी मात्रा में पानी लिया जाएगा।

इसके परिणामस्वरूप—

  • गर्मियों में नदियों का जलस्तर घट सकता है।
  • भूजल स्तर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
  • प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
  • जल संसाधनों का संतुलन बिगड़ सकता है।

आखिरी समय में जोड़े गए प्रावधान बने विवाद की वजह

मोनिक बारबू के अनुसार सबसे बड़ी आपत्ति इस बात को लेकर है कि ये दोनों विवादित प्रावधान विधेयक में अंतिम समय में शामिल किए गए।

उनका आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि रूढ़िवादी बहुमत वाली सीनेट से विधेयक को आसानी से पारित कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले इन बिंदुओं पर चर्चा और पुनर्विचार का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में इस पर कोई गंभीर विचार-विमर्श नहीं किया गया।


सीनेट में भारी बहुमत से पारित हुआ विधेयक

फ्रांस की सीनेट ने मंगलवार को इस कृषि विधेयक को 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया।

सरकार ने इसे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।

सरकार का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि किसानों की आय पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में यदि प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले फ्रांसीसी किसानों को आवश्यक साधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो कृषि क्षेत्र और अधिक संकट में जा सकता है।


इस्तीफे के साथ मोनिक बारबू का भावुक संदेश

इस्तीफे की घोषणा करते हुए मोनिक बारबू ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया।

उन्होंने कहा कि पिछले नौ महीनों के दौरान उन्होंने—

  • जंगलों की सुरक्षा,
  • स्वच्छ जल,
  • साफ हवा,
  • उपजाऊ मिट्टी,
  • जैव विविधता

की रक्षा के लिए लगातार काम किया।

लेकिन उनके अनुसार पर्यावरण संरक्षण के विरोध में खड़ी शक्तियां इतनी प्रभावशाली हो गई हैं कि वह अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ा सकीं।

उन्होंने यह भी लिखा कि राजनीति उनके लिए कभी लक्ष्य नहीं रही और यदि राजनीति का स्वरूप ऐसा ही है, तो वह स्वयं को उसमें सहज महसूस नहीं करतीं।


सरकार ने क्यों बताया यह फैसला किसानों के हित में?

फ्रांस सरकार का कहना है कि कृषि क्षेत्र इस समय गंभीर आर्थिक दबाव में है।

सरकार के अनुसार—

  • उर्वरकों की लागत बढ़ी है।
  • ऊर्जा खर्च में वृद्धि हुई है।
  • उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
  • किसानों की आय पर दबाव बना हुआ है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है।

ऐसे में यदि कुछ नियंत्रित और अस्थायी राहत नहीं दी गई तो फ्रांस के किसान यूरोप के अन्य देशों की तुलना में पिछड़ सकते हैं।


कृषि मंत्री ने जताई नाराजगी

फ्रांस की कृषि मंत्री एनी जेनेवार्ड ने पर्यावरण मंत्री के विरोध पर असहमति जताते हुए कहा कि यदि यह कानून केवल राजनीतिक मतभेदों के कारण पारित नहीं होता, तो पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे किसानों की स्थिति और अधिक खराब हो सकती थी।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य पर्यावरण की अनदेखी करना नहीं बल्कि किसानों और कृषि क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है।


पहले भी विवादों में रहे हैं ये कीटनाशक

एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे कीटनाशकों को लेकर पहले भी यूरोप और दुनिया के कई देशों में बहस होती रही है।

इनके उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव और परागण करने वाले कीटों पर संभावित असर को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में समय-समय पर अलग-अलग अध्ययन सामने आते रहे हैं। इसी कारण इनके उपयोग पर विभिन्न देशों में अलग-अलग नियम लागू हैं और इनकी अनुमति या प्रतिबंध स्थानीय नियामकीय ढांचे के अनुसार तय किए जाते हैं।


पर्यावरण बनाम कृषि: फ्रांस में फिर तेज हुई बहस

मोनिक बारबू के इस्तीफे ने फ्रांस में एक बार फिर उस बहस को केंद्र में ला दिया है जिसमें एक ओर किसानों की आर्थिक चुनौतियां हैं और दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण तथा जैव विविधता की चिंता।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी कृषि नीति तैयार करने की होगी, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों, जल संरक्षण और परागण करने वाले जीवों की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित कर सके। वहीं विपक्ष और पर्यावरण संगठनों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि इन नए प्रावधानों का व्यावहारिक प्रभाव कृषि उत्पादन और पर्यावरण दोनों पर किस प्रकार पड़ता है।

महत्वपूर्ण: फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा विवादित कृषि विधेयक में शामिल दो प्रावधानों—प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग और सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमति—के विरोध में आया है। सरकार का कहना है कि ये कदम किसानों की आर्थिक मदद के लिए आवश्यक हैं, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञ इनसे जैव विविधता, मधुमक्खियों और जल संसाधनों पर संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।

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