Kanpur में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ा: पहाड़ों की बारिश और सहायक नदियों के पानी से अलर्ट, अगले 2-3 दिन रहेंगे अहम
Kanpur Ganga Water Level में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश और गंगा की सहायक नदियों से बढ़ते जलप्रवाह के कारण कानपुर में गंगा का जलस्तर तेजी से ऊपर जा रहा है। सोमवार को जलस्तर में 11 सेंटीमीटर की और बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, वर्तमान में नदी का जलस्तर अभी भी चेतावनी बिंदु से लगभग 1.95 मीटर नीचे है, लेकिन सिंचाई विभाग ने अगले दो से तीन दिनों में जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई है।
जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग ने गंगा किनारे बसे क्षेत्रों, घाटों तथा कटरी इलाके में विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह इसी तरह जारी रहा तो नदी का स्तर और बढ़ सकता है।
सोमवार को 11 सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर
रविवार रात तक गंगा का जलस्तर 110.94 मीटर दर्ज किया गया था। सोमवार को इसमें 11 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
सिंचाई विभाग के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और विभिन्न बांधों एवं बैराजों से छोड़े जा रहे पानी का प्रभाव अब कानपुर में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
हरिद्वार और नरोरा से छोड़ा गया बड़ी मात्रा में पानी
सोमवार को ऊपरी क्षेत्रों से गंगा में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- हरिद्वार से 66,236 क्यूसेक पानी
- नरोरा से 53,211 क्यूसेक पानी
गंगा में छोड़ा गया।
इन जलधाराओं के कारण नदी के प्रवाह में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका असर कानपुर सहित गंगा के मध्य प्रवाह वाले क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
कानपुर गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोले गए
बढ़ते जलप्रवाह को नियंत्रित रखने के लिए कानपुर गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं।
सोमवार को बैराज से लगभग 1,29,930 क्यूसेक पानी आगे की ओर छोड़ा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार बैराज के सभी गेट खोलने का उद्देश्य बढ़ते दबाव को नियंत्रित करना और नदी के प्रवाह को सुचारु बनाए रखना है, ताकि किसी एक स्थान पर अत्यधिक जलभराव की स्थिति न बने।
अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में दर्ज हुआ जलस्तर
सोमवार रात लगभग आठ बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- अपस्ट्रीम (बिठूर से बैराज तक) गंगा का जलस्तर 113.04 मीटर दर्ज किया गया।
- डाउनस्ट्रीम (बैराज से शुक्लागंज तक) जलस्तर 112.35 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
अधिकारियों के अनुसार दोनों क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है और जलस्तर के हर बदलाव पर नजर बनाए रखी गई है।
इन सहायक नदियों से भी बढ़ रहा है गंगा का प्रवाह
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल पहाड़ी क्षेत्रों की बारिश ही नहीं, बल्कि कई सहायक नदियों का पानी भी लगातार गंगा में मिल रहा है।
इनमें प्रमुख रूप से—
- हरदोई की गर्रा नदी
- कन्नौज क्षेत्र की काली नदी
- ईशन नदी
- नोन नदी
- फतेहगढ़ के पास मिलने वाली रामगंगा
- पांडु नदी
का जलप्रवाह शामिल है।
इन सभी नदियों से लगातार पानी आने के कारण कानपुर के अपस्ट्रीम क्षेत्र में जलराशि तेजी से बढ़ रही है।
अगले दो से तीन दिन रहेंगे महत्वपूर्ण
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अजय कुमार ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगले दो से तीन दिनों तक गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की संभावना बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों से लगातार पानी आने के कारण स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को समय-समय पर सूचना दी जाएगी।
घाटों और कटरी क्षेत्रों में बढ़ाई गई सतर्कता
जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने गंगा घाटों और कटरी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने स्थानीय कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों और घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं से भी सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।
यदि जलस्तर में अपेक्षित वृद्धि जारी रहती है, तो प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।
बारिश का असर मैदानी इलाकों तक पहुंचा
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश का असर अब गंगा के मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
जब ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा अधिक होती है और सहायक नदियों का प्रवाह बढ़ता है, तो कुछ समय बाद उसका प्रभाव गंगा के मध्य और निचले हिस्सों में जलस्तर बढ़ने के रूप में सामने आता है।
इसी कारण सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन जलस्तर की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

