ब्लैक सी हमले पर भारत का सख्त रुख: भारतीय नाविक की मौत के बाद Ukrain के राजदूत तलब, कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा पर जताई गंभीर चिंता
News-Desk
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विदेश मंत्रालय ने इस घटना को लेकर स्पष्ट किया कि नागरिक नाविकों और कमर्शियल शिपिंग पर हमला किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत ने इस मुद्दे को यूक्रेन के समक्ष मजबूती से उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं भारतीय नाविकों की यूनियनों ने हमले के लिए यूक्रेनी ड्रोन को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यूक्रेन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है पूरा मामला?
विदेश मंत्रालय के अनुसार 18 जुलाई को ब्लैक सी से गुजर रहे व्यापारी जहाज एमवी ओमोर्फी (MV Omorfi) पर हमला हुआ। मंत्रालय ने पहले जारी अपने बयान में कहा था कि यह हमला कथित तौर पर रूसी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में हुआ।
हमले के समय जहाज पर कुल 10 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे।
हमले में जहाज के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता की मृत्यु हो गई, जबकि जहाज पर मौजूद अन्य दो भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं।
यह घटना एक बार फिर रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच ब्लैक सी में संचालित व्यापारी जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
भारत ने यूक्रेन के राजदूत को क्यों किया तलब?
भारतीय नागरिक की मौत के बाद विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया।
सूत्रों के अनुसार भारत ने इस घटना पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिक जहाजों और कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाएं वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं।
भारत ने यह भी दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध व्यापार सुनिश्चित किया जाना सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी है।
भारत ने हमले की कड़ी निंदा की
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
- कमर्शियल जहाजों पर हमला स्वीकार्य नहीं है।
- नागरिक क्रू मेंबर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
- वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्ग सुरक्षित बनाए रखना आवश्यक है।
- सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मानकों का सम्मान करना चाहिए।
भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भी यही रुख अपनाता रहा है कि किसी भी प्रकार की ऐसी कार्रवाई से बचा जाए जिससे नागरिकों या वैश्विक व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
कौन थे सागर गुप्ता?
हमले में जान गंवाने वाले सागर गुप्ता जहाज एमवी ओमोर्फी पर चीफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे।
वह उन तीन भारतीय नागरिकों में शामिल थे जो इस जहाज पर तैनात थे। हमले के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, जबकि अन्य दोनों भारतीय नाविक सुरक्षित रहे।
इस घटना के बाद भारतीय समुद्री समुदाय और मर्चेंट नेवी से जुड़े संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
एमवी ओमोर्फी जहाज के बारे में जानिए
एमवी ओमोर्फी एक मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला बल्क कैरियर जहाज है।
- निर्माण वर्ष: 2010
- श्रेणी: बल्क कैरियर
- संचालन क्षेत्र: ब्लैक सी
ब्लैक सी क्षेत्र रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण पिछले कुछ वर्षों से अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। इस क्षेत्र में कई बार व्यापारी जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
ब्लैक सी क्यों बना हुआ है संवेदनशील क्षेत्र?
ब्लैक सी यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद—
- कई बंदरगाह प्रभावित हुए,
- समुद्री मार्गों पर सुरक्षा जोखिम बढ़ा,
- व्यापारी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई,
- वैश्विक खाद्यान्न और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा।
इसी कारण यहां संचालित होने वाले जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
भारतीय नाविकों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत दुनिया के सबसे बड़े मर्चेंट नेवी मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है।
हजारों भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर कार्यरत हैं और विश्वभर के समुद्री मार्गों पर सेवाएं देते हैं।
ब्लैक सी जैसी संवेदनशील समुद्री पट्टियों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर यह घटना नई चिंता लेकर आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।
शिपिंग कंपनियों और नाविकों के लिए भारत की एडवाइजरी
घटना के बाद भारतीय अधिकारियों ने नाविकों और शिपिंग कंपनियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।
एडवाइजरी में सलाह दी गई है कि—
- ब्लैक सी या आसपास के क्षेत्रों में असाइनमेंट स्वीकार करने से पहले सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन करें।
- समुद्री मार्गों की अद्यतन जानकारी प्राप्त करें।
- बीमा (Insurance) की स्थिति की जांच करें।
- आपातकालीन प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझें।
- जहाज संचालकों और संबंधित एजेंसियों के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
सरकार का कहना है कि जोखिम वाले क्षेत्रों में कार्य करने से पहले सभी सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा आवश्यक है।
यूक्रेनी ड्रोन के इस्तेमाल का आरोप, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
भारतीय नाविकों की कुछ यूनियनों ने दावा किया है कि जहाज पर हुआ हमला यूक्रेनी ड्रोन के जरिए किया गया।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
इसी प्रकार, यूक्रेन की ओर से भी इस आरोप को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने का उल्लेख नहीं है।
ऐसी परिस्थितियों में घटना की अंतिम जिम्मेदारी और पूरी परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों की पुष्टि महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
भारत का लगातार एक जैसा रुख
भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान लगातार नागरिकों और व्यापारी जहाजों की सुरक्षा पर जोर दिया है।
नई दिल्ली का कहना रहा है कि—
- वैश्विक व्यापार निर्बाध रहना चाहिए।
- समुद्री मार्ग सुरक्षित बनाए जाने चाहिए।
- नागरिक जहाजों को संघर्ष का लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
यह रुख भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी समय-समय पर दोहराया है।
पहले भी भारतीय नाविकों की मौत की घटना सामने आ चुकी है
ब्लैक सी क्षेत्र में यह पहली ऐसी घटना नहीं है जिसमें भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हों।
इससे पहले ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए कार्गो जहाज एमवी गोल्डन लियो (MV Golden Leo) पर हुए हमले में भी भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई थी। उस मामले में भारत ने कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस घटना की परिस्थितियों को लेकर संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए थे।

