फिल्मी चक्कर

अलीगढ़ में एक्टर Chandrachur Singh की पुश्तैनी हवेली पर कब्जे का आरोप, चाची समेत 7 पर FIR; 1870 की ‘जलालपुर एस्टेट’ और करोड़ों की जमीन का विवाद

अभिनेता Chandrachur Singh और उनके परिवार की अलीगढ़ स्थित पुश्तैनी संपत्ति को लेकर चल रहा पुराना विवाद उस समय सुर्खियों में आ गया, जब उनके भाई अभिमन्यु सिंह की शिकायत पर रोरावर थाने में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई।

शिकायत में करोड़ों रुपये की जमीन और करीब डेढ़ सदी पुरानी ऐतिहासिक हवेली पर कथित रूप से कब्जा करने, फर्जी वसीयत तैयार कराने और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में चंद्रचूड़ सिंह की चाची गायत्री देवी सिंह समेत सात लोगों को नामजद किया गया है।

अभिमन्यु सिंह का आरोप है कि परिवार की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर पैतृक संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया और जमीनों पर अधिकार जताने की कोशिश हुई। उनका कहना है कि संपत्ति को लेकर सिविल कोर्ट में पहले से मामला चल रहा था, लेकिन अब कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों को लेकर आपराधिक कार्रवाई शुरू कराई गई है।

मामला सामने आने के बाद चंद्रचूड़ सिंह भी अपने भाई के साथ पुलिस के सामने पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया।

1870 में बनी ऐतिहासिक हवेली बनी विवाद का केंद्र

इस पूरे विवाद के केंद्र में सिर्फ जमीन का मामला नहीं है। परिवार की ओर से जिस संपत्ति का उल्लेख किया गया है, उसमें 1870 में बनी ऐतिहासिक हवेली ‘द जलालपुर एस्टेट’ भी शामिल बताई गई है।

परिवार के अनुसार, यह हवेली उनकी पुश्तैनी संपत्ति का हिस्सा है और ऐतिहासिक महत्व रखने वाली प्रॉपर्टी है।

अभिमन्यु सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि परिवार की बेशकीमती जमीनों और हवेली पर कथित रूप से अधिकार हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

पुरानी हवेली और उससे जुड़ी जमीनों का मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यह केवल आर्थिक संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की कई पीढ़ियों से जुड़ी विरासत बताई जा रही है।

चाची समेत सात लोगों पर दर्ज हुआ मामला

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक इस मामले में कुल सात लोगों को नामजद किया गया है। इनमें परिवार के सदस्य, एक विदेशी नागरिक, दो गवाह और एक वकील भी शामिल बताए गए हैं।

परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कथित फर्जी वसीयत, जमीन पर कब्जा, राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव और संपत्ति के अवैध हस्तांतरण जैसे गंभीर बिंदु शामिल हैं।

हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। FIR में नाम होना अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है।

अभिमन्यु सिंह का आरोप- दादा की मौत से एक दिन पहले तैयार हुई वसीयत

अभिमन्यु सिंह ने दावा किया है कि उनके दादा की मृत्यु से ठीक एक दिन पहले एक कथित फर्जी वसीयत तैयार की गई थी।

उनके मुताबिक, उनके दादा अलीगढ़ के बड़े जमींदारों में गिने जाते थे और वर्ष 1997 में उनका निधन हुआ था। अभिमन्यु का आरोप है कि निधन से ठीक पहले तैयार की गई कथित वसीयत के जरिए परिवार की बेशकीमती संपत्तियों को चुनिंदा लोगों के नाम स्थानांतरित करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने इसे एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बताया और दावा किया कि इसमें परिवार के कुछ सदस्यों के साथ बाहरी लोग भी शामिल थे।

इन आरोपों की सत्यता की जांच अब पुलिस और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगी।

प्रोबेट नहीं कराया गया, फिर कैसे बदले राजस्व रिकॉर्ड?

अभिमन्यु सिंह ने अपने आरोपों में वसीयत की वैधता से जुड़े सवाल भी उठाए हैं।

उनका कहना है कि कथित वसीयत का कोई प्रोबेट नहीं कराया गया था। इसके बावजूद राजस्व दस्तावेजों में कथित तौर पर नाम बदलने और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।

इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है। फिलहाल, पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दस्तावेजों में वास्तव में क्या बदलाव हुए और वे किस प्रक्रिया के तहत किए गए।

सालों तक जमीन बेचने का भी लगाया आरोप

अभिमन्यु सिंह ने आरोप लगाया कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव के बाद इन जमीनों को वर्षों तक अवैध रूप से बेचने की कोशिश की गई।

उनका दावा है कि परिवार को अलीगढ़ से दूर रहने के कारण लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।

अगर जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल पारिवारिक संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित दस्तावेजी धोखाधड़ी और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े कई कानूनी पहलू भी सामने आ सकते हैं।

मुंबई में रहता था परिवार, अलीगढ़ की संपत्ति से दूर रहे

अभिमन्यु सिंह के मुताबिक, उनका परिवार लंबे समय से मुंबई में रह रहा था। अलीगढ़ से दूर रहने के कारण उन्हें कथित रूप से यह जानकारी नहीं मिल सकी कि पुश्तैनी संपत्तियों को लेकर क्या गतिविधियां चल रही हैं।

उनका कहना है कि जब उन्हें कथित धोखाधड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने अपनी कानूनी टीम को सक्रिय किया।

परिवार ने पुराने दस्तावेजों और संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड जुटाने शुरू किए। इसके बाद अधिकारियों के सामने शिकायत रखी गई और अब पुलिस में आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है।

सिविल कोर्ट में पहले से चल रहा था संपत्ति विवाद

अभिमन्यु सिंह ने स्पष्ट किया कि संपत्ति को लेकर विवाद अचानक शुरू नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, इस मामले में अलीगढ़ की अदालत में पहले से सिविल सूट चल रहा था।

यानी संपत्ति के अधिकार और स्वामित्व को लेकर परिवार की कानूनी लड़ाई पहले से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।

अब कथित फर्जीवाड़े और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों को लेकर आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

अभिमन्यु के मुताबिक, उन्होंने करीब दो महीने तक लगातार दस्तावेज और सबूत जुटाए और इसके बाद पुलिस में FIR दर्ज कराई।

‘अब पुलिस ही डील करेगी’, बोले अभिमन्यु सिंह

अभिमन्यु सिंह ने कहा कि सिविल कोर्ट में मामला पहले से चल रहा था और अब उन्होंने क्रिमिनल एक्शन शुरू कराया है। उनका कहना है कि आगे मामले को पुलिस और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति विवाद में परिवार के सदस्यों के अलावा कुछ स्थानीय राजनेता भी गलत तरीके से हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की गई है।

इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

जलालपुर एस्टेट परिवार की पहचान से जुड़ी बताई गई

अभिमन्यु सिंह के अनुसार, उनका परिवार अलीगढ़ के पुराने जमींदार परिवारों में गिना जाता है और उनकी जमीनें जलालपुर तथा आसपास के कई गांवों में फैली हुई हैं।

इसी संपत्ति में जलालपुर एस्टेट की ऐतिहासिक हवेली भी शामिल बताई गई है।

परिवार के इतिहास और पुरानी संपत्ति के कारण यह विवाद सामान्य जमीन विवाद से अलग महत्व रखता है। हवेली से जुड़ी संपत्ति को लेकर परिवार के भीतर लंबे समय से अधिकार और दावेदारी का विवाद होने की बात कही जा रही है।

अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह का परिवार अलीगढ़ के पुराने जमींदार परिवार से

चंद्रचूड़ सिंह हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने ‘माचिस’, ‘जोश’ और ‘क्या कहना’ जैसी फिल्मों में काम किया है।

उनका पारिवारिक संबंध अलीगढ़ के जलालपुर एस्टेट से बताया जाता है। उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह भारतीय सेना में अधिकारी रहे थे और वर्ष 1985 में सदर विधानसभा सीट से विधायक भी बने थे।

परिवार की संपत्तियां जलालपुर और आसपास के कई गांवों में फैली होने की जानकारी दी गई है।

इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि की वजह से मौजूदा संपत्ति विवाद ने अब व्यापक ध्यान खींचा है।

चाचा गंगा सिंह की मौत के बाद बढ़ा विवाद

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, चंद्रचूड़ सिंह के चाचा गंगा सिंह लंबे समय तक स्वीडन में रहते थे।

बताया गया है कि बाद में वह जलालपुर की पुश्तैनी हवेली में आकर रहने लगे थे। अक्टूबर 2025 में गंगा सिंह का निधन हो गया।

परिवार के मुताबिक, उनके निधन के बाद पुश्तैनी संपत्ति, हवेली और ट्रस्ट से जुड़ी जमीनों पर अधिकार और दावेदारी को लेकर विवाद और गहरा गया।

इसके बाद संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेजों और वसीयत को लेकर सवाल उठने लगे।

मौत के बाद संपत्ति पर दावेदारी का विवाद गहराया

किसी बड़े पारिवारिक संपत्ति विवाद में उत्तराधिकार और वसीयत सबसे महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दों में होते हैं।

इस मामले में भी परिवार के सदस्यों के बीच यह सवाल प्रमुख है कि संपत्तियों पर वैध अधिकार किसका है और कथित वसीयत की कानूनी स्थिति क्या है।

अभिमन्यु सिंह की ओर से वसीयत को फर्जी बताया गया है, जबकि पुलिस की जांच में दस्तावेजों की वास्तविकता और उनके आधार पर किए गए किसी भी राजस्व बदलाव की जांच होना बाकी है।

यही कारण है कि मामले का अगला चरण दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों पर निर्भर करेगा।

चंद्रचूड़ सिंह खुद पुलिस के सामने पहुंचे

मामले को लेकर अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह भी सक्रिय नजर आए। वह अपने भाई अभिमन्यु सिंह के साथ शनिवार को थाना रोरावर की जलालपुर चौकी पहुंचे।

यहां पुलिस के सामने उनका बयान दर्ज कराया गया।

अभिनेता ने अपनी पैतृक संपत्ति को कथित फर्जी वसीयत के जरिए हड़पने की कोशिश का आरोप लगाया।

उन्होंने बताया कि संपत्ति को लेकर चाचा के परिवार के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा है और बेशकीमती पैतृक संपत्ति पर अधिकार जताने के लिए कथित रूप से फर्जी वसीयत का सहारा लिया गया।

‘सभी सबूत पुलिस को उपलब्ध कराए’

चंद्रचूड़ सिंह ने पुलिस को सभी संबंधित सबूत उपलब्ध कराने की बात कही है।

परिवार का कहना है कि संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेज जुटाए गए हैं और संबंधित अधिकारियों को भी शिकायत दी गई है।

अब जांच एजेंसियों के सामने दस्तावेजों की प्रमाणिकता, राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव, कथित वसीयत की परिस्थितियां और संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करना महत्वपूर्ण होगा।

मामले में वकील और गवाह भी नामजद

इस FIR की एक खास बात यह भी है कि परिवार के सदस्यों के अलावा दो गवाह और एक वकील समेत कुल सात लोगों को नामजद किया गया है।

परिवार की शिकायत के मुताबिक कथित वसीयत और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया में इन लोगों की भूमिका होने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निर्धारण पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

स्थानीय राजनेताओं पर भी हस्तक्षेप का आरोप

अभिमन्यु सिंह ने संपत्ति विवाद में कुछ स्थानीय राजनेताओं के कथित हस्तक्षेप का आरोप भी लगाया है।

उनका कहना है कि कुछ राजनीतिक लोग गलत तरीके से मामले में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह आरोप भी अब जांच के दायरे में आ सकता है, यदि शिकायत में इससे जुड़े तथ्य और साक्ष्य पुलिस के सामने प्रस्तुत किए गए हैं।

संबंधित राजनीतिक लोगों का पक्ष सामने आने के बाद इस आरोप की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

पुरानी जमींदारी संपत्ति अब कानूनी विवाद में

अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में पुरानी जमींदारी परिवारों की जमीनों को लेकर उत्तराधिकार विवाद कोई नया विषय नहीं है। कई मामलों में पीढ़ियों के बीच संपत्ति का बंटवारा, पुराने दस्तावेज, वसीयत और राजस्व रिकॉर्ड विवाद का कारण बनते हैं।

चंद्रचूड़ सिंह के परिवार से जुड़ा मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें एक प्रसिद्ध अभिनेता का नाम होने के साथ-साथ ऐतिहासिक जलालपुर एस्टेट और पुरानी पुश्तैनी हवेली का भी उल्लेख है।

इसके अलावा मामले में कथित फर्जी वसीयत और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे आरोपों ने इसे और गंभीर बना दिया है।

अब दस्तावेजों की जांच से खुलेगा विवाद का सच

पुलिस के सामने अब सबसे अहम सवाल दस्तावेजों की प्रमाणिकता का है।

कथित वसीयत कब तैयार हुई, उसे तैयार कराने की परिस्थितियां क्या थीं, उसमें किन संपत्तियों का उल्लेख था, संबंधित लोगों के हस्ताक्षर और गवाहों की भूमिका क्या थी और उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में कोई बदलाव हुआ या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक होगी।

साथ ही जमीनों के पुराने रिकॉर्ड और कथित बिक्री या हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है।

सिविल और क्रिमिनल दोनों स्तर पर आगे बढ़ेगा मामला

यह मामला अब दो अलग कानूनी पहलुओं से जुड़ा दिखाई दे रहा है।

एक तरफ संपत्ति के अधिकार, स्वामित्व और उत्तराधिकार से संबंधित सिविल विवाद है। दूसरी तरफ कथित जालसाजी, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोपों को लेकर आपराधिक कार्रवाई शुरू हुई है।

दोनों प्रक्रियाओं के अपने अलग कानूनी पहलू हैं। संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व और वसीयत की वैधता अंततः सक्षम न्यायिक प्रक्रिया में तय होगी।

परिवार ने कानूनी टीम को किया सक्रिय

अभिमन्यु सिंह के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने अपनी लीगल टीम को सक्रिय कर दिया।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब दो महीने से दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे थे। पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए और संबंधित संपत्तियों से जुड़े कागजात एकत्र किए गए।

इसके बाद पुलिस के सामने आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई।

अब परिवार की ओर से अदालत और पुलिस दोनों स्तर पर कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की तैयारी है।

जलालपुर की हवेली सिर्फ संपत्ति नहीं, परिवार की विरासत का हिस्सा

परिवार के लिए 1870 में बनी जलालपुर एस्टेट की हवेली का महत्व केवल आर्थिक नहीं बताया जा रहा है।

पुरानी हवेली कई पीढ़ियों की पारिवारिक विरासत से जुड़ी हुई है। इसलिए इसके स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद परिवार के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।

यदि संपत्ति के रिकॉर्ड और ऐतिहासिक दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से सामने आते हैं तो इससे हवेली और उससे जुड़ी जमीनों के इतिहास को समझने में भी मदद मिल सकती है।

चंद्रचूड़ सिंह की फिल्मों से अलग अब निजी संपत्ति विवाद चर्चा में

चंद्रचूड़ सिंह लंबे समय से फिल्म और टेलीविजन जगत में सक्रिय रहे हैं। ‘माचिस’, ‘जोश’ और ‘क्या कहना’ जैसी फिल्मों में उनके काम को दर्शकों ने देखा है।

अब उनके निजी पारिवारिक संपत्ति विवाद के सार्वजनिक होने से उनका नाम एक अलग वजह से चर्चा में है।

हालांकि मामला पूरी तरह पारिवारिक संपत्ति, दस्तावेजों और कानूनी दावेदारी से जुड़ा है। इसलिए इसमें सामने आए आरोपों और सिद्ध तथ्यों के बीच अंतर रखना जरूरी है।

FIR में दर्ज आरोप जांच का आधार होते हैं, अंतिम सत्य नहीं।

पुलिस जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे

जांच के दौरान पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल होंगे। कथित वसीयत वास्तव में कब बनी? उसमें किन संपत्तियों का उल्लेख था? क्या वसीयत वैधानिक रूप से प्रमाणित हुई थी? उसके आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में किस तरह के बदलाव हुए? संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण किसके नाम से हुआ? और इन प्रक्रियाओं में नामजद लोगों की कथित भूमिका क्या थी?

इन सवालों के जवाब दस्तावेजों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से तलाशे जाएंगे।

अब आगे क्या होगा?

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की विवेचना करेगी। नामजद लोगों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन जांच का हिस्सा हो सकता है।

वहीं, परिवार की ओर से पहले से चल रहे सिविल मुकदमे में संपत्ति के अधिकार से जुड़े मुद्दे न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय होंगे।

अगर जांच में कथित दस्तावेजी हेरफेर या अन्य अपराधों के पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो पुलिस उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

अलीगढ़ की पुरानी हवेली से जुड़ा विवाद अब पहुंचा पुलिस तक

चंद्रचूड़ सिंह के परिवार की पुश्तैनी संपत्ति से जुड़ा विवाद अब खुले तौर पर पुलिस और अदालत के सामने है। 1870 की ऐतिहासिक जलालपुर एस्टेट, आसपास के गांवों में फैली जमीनें, कथित फर्जी वसीयत, राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और परिवार के सदस्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही दावेदारी—इन सभी पहलुओं ने मामले को गंभीर बना दिया है।

अभिमन्यु सिंह की शिकायत के बाद सात लोगों पर FIR दर्ज होने और चंद्रचूड़ सिंह के पुलिस के सामने बयान देने से मामला अब अगले कानूनी चरण में पहुंच चुका है।

परिवार ने आरोपों से संबंधित दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही है। दूसरी ओर, आरोपों में नामजद लोगों का पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

फिलहाल अलीगढ़ की इस ऐतिहासिक पुश्तैनी संपत्ति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों पुराने दस्तावेजों और दावेदारियों के बीच आखिर वैध अधिकार किसका है—और कथित वसीयत व राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की सच्चाई जांच में क्या सामने आती है।

अलीगढ़ में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह की पुश्तैनी संपत्ति और ऐतिहासिक जलालपुर एस्टेट से जुड़े विवाद में उनके भाई अभिमन्यु सिंह की शिकायत पर रोरावर थाने में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में चंद्रचूड़ सिंह की चाची गायत्री देवी सिंह समेत अन्य लोगों पर कथित फर्जी वसीयत, संपत्ति पर कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं। परिवार के अनुसार, विवाद में 1870 में बनी जलालपुर एस्टेट की हवेली और आसपास की बेशकीमती जमीनें भी शामिल हैं। अभिमन्यु सिंह का दावा है कि उनके दादा की वर्ष 1997 में मृत्यु से एक दिन पहले कथित रूप से फर्जी वसीयत तैयार की गई थी और बाद में उसके आधार पर संपत्तियों पर अधिकार जताने का प्रयास हुआ। परिवार का कहना है कि इस संबंध में सिविल कोर्ट में पहले से मामला चल रहा था और अब कथित धोखाधड़ी को लेकर आपराधिक कार्रवाई शुरू कराई गई है। चंद्रचूड़ सिंह ने भी अपने भाई के साथ जलालपुर चौकी पहुंचकर पुलिस के सामने बयान दर्ज कराया और सभी उपलब्ध साक्ष्य सौंपने की बात कही। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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