Balrampur पॉक्सो केस: 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के सुरक्षित गर्भपात की अदालत से अनुमति, मेडिकल बोर्ड गठित करने के आदेश
Balrampur POCSO Case में विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के सुरक्षित गर्भपात (Medical Termination of Pregnancy) की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने पीड़िता की कम आयु, चिकित्सकीय स्थिति, मानसिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को मेडिकल बोर्ड गठित कर विधिक प्रावधानों के अनुसार गर्भपात की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो राहुल सिंह की अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में नाबालिग पीड़िता का स्वास्थ्य, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित सर्वोपरि हैं। आदेश के बाद संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
पीड़िता के पिता ने अदालत से लगाई थी गुहार
मामले में पीड़िता के पिता ने विशेष अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी कथित दुष्कर्म की घटना के बाद गर्भवती हो गई है।
उन्होंने अदालत को बताया कि किशोरी लगभग दो माह दस दिन की गर्भवती है। कम आयु और शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण गर्भावस्था जारी रहने से उसके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि सामाजिक और मानसिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षित गर्भपात की अनुमति देना आवश्यक है। आवेदन के अनुसार स्वयं पीड़िता भी गर्भपात के पक्ष में थी।
अदालत ने पुलिस और सीएमओ से मांगी रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने निर्णय लेने से पहले पचपेड़वा थाना पुलिस तथा मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार 13 जुलाई को कराए गए दोबारा अल्ट्रासाउंड में गर्भावस्था 9 सप्ताह 3 दिन की पाई गई।
वहीं सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गर्भावस्था लगभग दो माह दस दिन की है और वर्तमान स्थिति में प्रचलित विधिक एवं चिकित्सकीय प्रावधानों के अनुसार सुरक्षित गर्भसमापन कराया जा सकता है।
चिकित्सकीय अभिलेखों के परीक्षण के बाद मिला आदेश
विशेष न्यायाधीश राहुल सिंह ने पुलिस रिपोर्ट, सीएमओ की रिपोर्ट तथा उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद सुरक्षित गर्भपात की अनुमति प्रदान की।
अदालत ने अपने आदेश में मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया कि—
- मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए।
- सभी चिकित्सकीय मानकों का पालन किया जाए।
- लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार गर्भसमापन की प्रक्रिया पूरी की जाए।
- पूरी प्रक्रिया के दौरान नाबालिग के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
नाबालिग के हित को सर्वोपरि माना अदालत ने
अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता का शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, आयु तथा भविष्य से जुड़े पहलुओं को गंभीरता से देखा जाना आवश्यक है।
इसी आधार पर अदालत ने माना कि उपलब्ध चिकित्सकीय रिपोर्टों और परिस्थितियों के मद्देनज़र सुरक्षित गर्भसमापन की अनुमति देना उचित होगा।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार यह मामला थाना पचपेड़वा क्षेत्र का है।
आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले धर्मपाल यादव ने नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म किया।
घटना के बाद दर्ज मुकदमे में पुलिस ने जांच शुरू की और पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया।
पुलिस के अनुसार मेडिकल परीक्षण में दर्ज आरोपों के समर्थन में आवश्यक चिकित्सकीय तथ्य सामने आए, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
6 जून को गिरफ्तार हुआ था आरोपी
पचपेड़वा पुलिस ने मामले में नामजद आरोपी धर्मपाल यादव को 6 जून को गिरफ्तार किया था।
प्रभारी निरीक्षक ओपी सिंह चौहान के अनुसार आरोपी वर्तमान में जिला कारागार में निरुद्ध है तथा मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
इस प्रकरण में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।
पॉक्सो मामलों में अदालतें क्यों अपनाती हैं संवेदनशील दृष्टिकोण?
पॉक्सो (POCSO) से जुड़े मामलों में न्यायालय पीड़ित बच्चों के अधिकारों, स्वास्थ्य, गरिमा और सर्वोत्तम हित को विशेष महत्व देते हैं।
ऐसे मामलों में यदि गर्भावस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो अदालतें उपलब्ध चिकित्सकीय रिपोर्ट, विशेषज्ञों की राय, गर्भावस्था की अवधि तथा लागू कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती हैं। प्रत्येक मामला उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग विचारणीय होता है।

