Muzaffarnagar में तिरंगे के नीचे दौड़ा देशभक्ति का सैलाब, हजारों धावकों ने शहीदों को किया नमन; ‘जज्बा दौड़-12’ में गूंजे भारत माता के जयकारे
Muzaffarnagar में स्वतंत्रता दिवस की भावना और देशभक्ति के रंग से सराबोर माहौल के बीच ‘जज्बा दौड़-12’ का आयोजन उत्साह और जोश के साथ किया गया। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में सुबह पांच बजे से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे थे। 131 फीट ऊंचे तिरंगे के नीचे हजारों धावकों ने दौड़ लगाकर देश के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों और बलिदानियों को नमन किया।
इस आयोजन में बच्चों से लेकर युवाओं तक, महिलाओं से लेकर पुरुषों तक और आम नागरिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा पत्रकारों तक ने भागीदारी की। बारिश के बाद मौसम सुहाना था और मैदान में देशभक्ति का माहौल लगातार ऊर्जा से भरता रहा।
आयोजन स्थल की साज-सज्जा, युवा टीम की तैयारियां और प्रतिभागियों का उत्साह मिलकर ऐसा वातावरण बना रहे थे, जिसमें सुबह-सुबह पूरा मैदान किसी बड़े राष्ट्रीय उत्सव जैसा दिखाई दे रहा था।
131 फीट तिरंगे के नीचे उमड़ा जनसैलाब
राजकीय इंटर कॉलेज का मैदान सुबह होते-होते धावकों और प्रतिभागियों से भर गया। मैदान के बीच 131 फीट ऊंचा तिरंगा आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। तिरंगे की विशाल मौजूदगी के नीचे छात्र-छात्राओं और युवाओं का एक साथ खड़ा होना आयोजन को खास बना रहा था।
स्वतंत्रता दिवस के शहीदों को याद करने के उद्देश्य से आयोजित इस दौड़ में प्रतिभागियों ने पसीना बहाकर देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी।
बारिश के बाद मौसम ने भी आयोजन का साथ दिया। गर्मी और उमस की जगह वातावरण में ठंडक थी, जिससे प्रतिभागियों के लिए दौड़ में शामिल होना अपेक्षाकृत सहज रहा।
बारिश भी नहीं रोक सकी देशभक्ति का जोश
आयोजन से पहले और आसपास हुई बारिश के बावजूद धावकों का उत्साह कम नहीं हुआ। मैदान में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और दौड़ में भाग लिया।
कई प्रतिभागियों के लिए यह केवल एक रन नहीं था। शहीदों को श्रद्धांजलि देने और देशभक्ति की भावना को व्यक्त करने का अवसर भी था।
बारिश के बाद गीले माहौल में भी युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। जज्बा दौड़ की टी-शर्ट पहने प्रतिभागी एक साथ मैदान में दिखाई दिए तो आयोजन स्थल का दृश्य बेहद प्रभावशाली नजर आया।
लड़के-लड़कियां, महिलाएं और पुरुष सभी बने दौड़ का हिस्सा
जज्बा दौड़ की खासियत इसकी व्यापक भागीदारी रही। इसमें लड़के और लड़कियां, महिलाएं और पुरुष सभी वर्गों के प्रतिभागी शामिल हुए।
छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या ने आयोजन को युवाओं से जोड़ दिया। वहीं परिवारों और अन्य नागरिकों की मौजूदगी ने इसे केवल विद्यार्थियों तक सीमित कार्यक्रम नहीं रहने दिया।
विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लोगों ने एक साथ दौड़ लगाई। आयोजन में गरीब-अमीर, मजदूर-किसान, व्यापारी-उद्योगपति और जनप्रतिनिधियों के एक साथ दौड़ने का दृश्य भी देखने को मिला।
एक साथ दौड़े अलग-अलग वर्गों के लोग
जज्बा दौड़ में सामाजिक और आर्थिक विभाजन की जगह एक साझा मंच दिखाई दिया। प्रतिभागियों में आम नागरिकों के साथ नेता, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, कारोबारी, किसान, मजदूर और युवा भी शामिल रहे।
एक ही मार्ग पर एक साथ दौड़ते लोगों ने आयोजन को सामूहिक भागीदारी का स्वरूप दिया। तिरंगे के नीचे विभिन्न वर्गों का एक साथ खड़ा होना और दौड़ना इस आयोजन की सबसे प्रमुख तस्वीरों में रहा।
आयोजकों का उद्देश्य भी लोगों को देशभक्ति की भावना के साथ एक मंच पर लाना रहा।
‘एक देश-एक चुनाव’ का संदेश भी आयोजन से जोड़ा गया
इस वर्ष जज्बा दौड़ के साथ ‘एक देश-एक चुनाव’ का संदेश भी जोड़ा गया। आयोजकों की ओर से कहा गया कि इसका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया और नागरिक भागीदारी को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम के दौरान इस विषय को लेकर नारे भी लगाए गए। आयोजकों ने इसे उन मतदाताओं की भागीदारी से जोड़ने की बात कही जो किसी कारण से मतदान नहीं कर पाते।
हालांकि ‘एक देश-एक चुनाव’ एक व्यापक संवैधानिक और राजनीतिक विषय है, आयोजन में इसे नागरिक जागरूकता और मतदान के संदेश के साथ प्रस्तुत किया गया।
सुबह पांच बजे से ही मैदान में शुरू हो गई थी हलचल
जज्बा दौड़ में भाग लेने वाले प्रतिभागी सुबह जल्दी ही राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में पहुंचने लगे थे। सुबह पांच बजे तक आयोजन स्थल पर लोगों की मौजूदगी दिखाई देने लगी।
सुबह का समय, बारिश के बाद का सुहाना मौसम और विशाल तिरंगे की मौजूदगी ने माहौल को और आकर्षक बना दिया।
युवा स्वयंसेवकों की टीम आयोजन की तैयारियों में जुटी रही। प्रतिभागियों को व्यवस्थित करने, दौड़ के लिए तैयार करने और कार्यक्रम को निर्धारित तरीके से आगे बढ़ाने में स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
समर्पित युवा समिति की तैयारियों ने संभाली व्यवस्था
आयोजन से जुड़ी तैयारियों में समर्पित युवा टीम की भूमिका प्रमुख रही। सत्यप्रकाश रेशू और अमित पटपटिया ने कार्यक्रम को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजकों के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए नए रजिस्ट्रेशन बंद करने का निर्णय लिया गया और सभी को निशुल्क फार्म भरकर दौड़ में शामिल होने का आह्वान किया गया।
इसके बाद प्रतिभागियों की संख्या और फार्म की मांग काफी बढ़ गई। इससे आयोजन को लेकर लोगों के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों के पहुंचते ही गूंजा भारत माता का जयकारा
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल, नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी सहित कई प्रमुख लोग पहुंचे।
राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्ष संजय राठी के साथ अशोक कंसल, शरद शर्मा, प्रवीण खेड़ा, विशाल गर्ग, नीति अग्रवाल, राजेश कुमारी, सतीश कुकरेजा, हिमांशु कौशिक और शोभित गुप्ता समेत अन्य लोग भी आयोजन में मौजूद रहे।
जनप्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख लोगों की मौजूदगी के दौरान कार्यक्रम स्थल भारत माता के जयकारों से गूंज उठा।
पहले बालक वर्ग की दौड़ को दिखाई गई हरी झंडी
दौड़ का पहला चरण बालक वर्ग से शुरू हुआ। गेट नंबर दो से बालकों की दौड़ शुरू कराई गई।
इस अवसर पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से केसरिया झंडी दिखाकर दौड़ का शुभारंभ किया। झंडी मिलते ही बड़ी संख्या में युवा प्रतिभागी दौड़ के लिए आगे बढ़े।
प्रतिभागियों में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया और पूरा माहौल देशभक्ति के नारों से भर गया।
15 मिनट बाद बालिका वर्ग ने भी लगाई दौड़
बालक वर्ग की दौड़ शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद बालिका वर्ग की दौड़ शुरू की गई। गेट नंबर एक से बालिकाओं ने दौड़ में भाग लिया।
जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से केसरिया झंडी दिखाकर बालिका वर्ग की दौड़ को रवाना किया।
बड़ी संख्या में छात्राओं और युवतियों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया। लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग प्रारंभिक बिंदु निर्धारित किए गए थे।
जज्बा की टी-शर्ट में नजर आए हजारों प्रतिभागी
दौड़ में शामिल प्रतिभागियों के लिए विशेष टी-शर्ट की व्यवस्था की गई थी। जज्बा की टी-शर्ट पहने बड़ी संख्या में प्रतिभागी जब एक साथ मैदान और सड़क पर दिखाई दिए तो पूरा वातावरण एक रंग में रंगा नजर आया।
युवाओं में इस टी-शर्ट को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। आयोजकों की ओर से इसे जज्बा और देशभक्ति की सामूहिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रतिभागियों के समूह और विशाल तिरंगे की तस्वीरें आयोजन की सबसे आकर्षक तस्वीरों में शामिल रहीं।
शहीदों को याद करने का अनोखा अंदाज
जज्बा दौड़ का केंद्रीय संदेश स्वतंत्रता दिवस के शहीदों को याद करना रहा। आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजकों का मानना रहा कि शहीदों की कुर्बानी को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय युवा पीढ़ी को सक्रिय गतिविधियों से जोड़कर भी याद किया जा सकता है।
दौड़ इसी सोच के साथ आयोजित की गई, जिसमें हजारों लोगों ने शारीरिक गतिविधि के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की।
‘जज्बा दौड़ सिर्फ दौड़ नहीं’—आयोजकों का संदेश
आयोजन से जुड़े लोगों ने जज्बा दौड़ को केवल खेल प्रतियोगिता के रूप में नहीं देखा। उनके अनुसार यह युवा पीढ़ी में देशभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।
जब अलग-अलग वर्गों के लोग एक ही उद्देश्य के साथ एकत्र होते हैं तो इससे सामाजिक एकजुटता का संदेश भी जाता है।
मुजफ्फरनगर में इस आयोजन की व्यापक भागीदारी ने इसी भावना को सामने रखा।
भारत माता और जय श्री राम के नारों से गूंजा वातावरण
दौड़ के दौरान कई स्थानों पर भारत माता के जयकारे और जय श्री राम के नारे सुनाई दिए। इसके साथ ‘एक देश-एक चुनाव’ जैसे नारों से भी वातावरण गूंजता रहा।
देशभक्ति के गीतों और नारों के बीच प्रतिभागियों का उत्साह लगातार बढ़ता रहा।
विशाल तिरंगे के नीचे हजारों लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को दृश्य रूप से भी खास बना दिया।
मुजफ्फरनगर की युवा शक्ति का दिखा प्रदर्शन
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी रही। आयोजकों के अनुसार युवाओं ने कार्यक्रम की तैयारियों से लेकर प्रतिभागियों के प्रबंधन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुजफ्फरनगर की युवा शक्ति को इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया। युवाओं की सक्रियता से कार्यक्रम को ऊर्जा मिली और प्रतिभागियों को भी उत्साहित किया गया।
देशभक्ति के साथ खेल और फिटनेस को जोड़ना भी युवाओं के बीच इस तरह के आयोजनों की लोकप्रियता का एक कारण बन सकता है।
दौड़ के साथ फिटनेस का संदेश भी
देशभक्ति के अलावा दौड़ का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य और फिटनेस भी रहा। नियमित दौड़ और शारीरिक गतिविधि युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित कर सकती है।
सुबह के समय दौड़ का आयोजन लोगों को शारीरिक सक्रियता के लिए प्रोत्साहित करने का भी माध्यम बना।
हालांकि कार्यक्रम का मुख्य संदेश शहीदों को श्रद्धांजलि और देशभक्ति रहा, लेकिन इसके साथ फिटनेस और सामुदायिक भागीदारी भी जुड़ी रही।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया उत्साह
दौड़ के अलावा कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इनके माध्यम से देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारी यानी सिविक सेंस से जुड़े संदेश देने का प्रयास किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन के माहौल को और जीवंत बनाया। मंच पर प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों और प्रतिभागियों में उत्साह दिखाई दिया।
देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों को सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ जोड़ने से बच्चों और युवाओं की भागीदारी भी बढ़ी।
सिविक सेंस का संदेश भी मंच से पहुंचा
आयोजन में केवल राष्ट्रभक्ति के नारों पर जोर नहीं रहा, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी की बात भी की गई।
सड़क पर अनुशासन, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, कानून का पालन, मतदान और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषय नागरिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से इन विषयों को सरल तरीके से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
पत्रकारों के लिए भी रखा गया लकी ड्रॉ
जज्बा दौड़ में पत्रकारों के लिए भी विशेष लकी ड्रॉ आयोजित किया गया। आयोजन में केवल धावकों के लिए पुरस्कारों की व्यवस्था नहीं थी, बल्कि पत्रकारों को भी इसमें शामिल किया गया।
इससे कार्यक्रम में मीडिया की भागीदारी को भी अलग पहचान मिली।
पत्रकारों और अन्य प्रतिभागियों के लिए पुरस्कारों की व्यवस्था ने आयोजन में उत्साह को और बढ़ाया।
लकी ड्रॉ में स्कूटर से लेकर साइकिल तक पुरस्कार
लकी ड्रॉ के दौरान कई प्रतिभागियों को विभिन्न पुरस्कार जीतने का अवसर मिला। प्रशांत कुमार, विभु कुमार और आकांक्षा को स्कूटर मिलने की जानकारी दी गई।
रिया को सोलर पैनल का पुरस्कार मिला। पलक, सागर और अलीशा को साइकिल मिली, जबकि सागर के नाम एलईडी टीवी का पुरस्कार रहा।
इसके अलावा अन्य छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न प्रकार के पुरस्कार जीतने का अवसर मिला।
लकी ड्रॉ ने कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागियों के उत्साह को और बढ़ा दिया।
छात्र-छात्राओं की भारी भागीदारी बनी आकर्षण
जज्बा दौड़ में छात्र-छात्राओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में विद्यार्थी 131 फीट तिरंगे के नीचे एकत्र हुए।
स्वतंत्रता दिवस के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए छात्रों का एक साथ पहुंचना आयोजन के मुख्य उद्देश्यों में से एक को पूरा करता दिखाई दिया।
युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय पर्वों और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
गरीब से अमीर तक, सबके लिए एक मंच
जज्बा दौड़ की एक खास तस्वीर यह रही कि अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग एक साथ दौड़ते दिखाई दिए।
मजदूर, किसान, व्यापारी, उद्योगपति, राजनेता और आम नागरिक एक ही दौड़ में शामिल हुए। इस सामूहिक भागीदारी ने आयोजन को एक व्यापक सामाजिक मंच का रूप दिया।
तिरंगे के नीचे सभी प्रतिभागियों की समान भागीदारी ने एकता का संदेश दिया।
सोशल मीडिया पर भी पहुंचा तिरंगे का संदेश
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर साझा किए गए। 131 फीट तिरंगे के नीचे हजारों लोगों की मौजूदगी और एक साथ दौड़ते प्रतिभागियों के दृश्य सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बने।
देशभक्ति कार्यक्रमों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे आयोजनों के संदेश को डिजिटल माध्यमों के जरिए अधिक लोगों तक पहुंचाने में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुलिस प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था रही मजबूत
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के कारण सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण रही। कार्यक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई।
बड़ी भीड़ को देखते हुए आयोजन स्थल और दौड़ के मार्ग पर निगरानी रखी गई। प्रतिभागियों की आवाजाही और दौड़ के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे।
आयोजन से जुड़े लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संतोष व्यक्त किया।
सुबह का मौसम बना आयोजन का साथी
बारिश के बाद मौसम सुहाना होने से धावकों को भी राहत मिली। सुबह के समय तापमान अपेक्षाकृत अनुकूल रहा और वातावरण में गर्मी का असर कम दिखाई दिया।
दौड़ जैसे शारीरिक कार्यक्रम के लिए मौसम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बारिश के बावजूद आयोजन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया।
प्रतिभागियों में मौसम को लेकर उत्साह दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोगों ने दौड़ में हिस्सा लिया।
मुजफ्फरनगर में देशभक्ति और फिटनेस का संगम
जज्बा दौड़-12 ने देशभक्ति और शारीरिक सक्रियता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया। हजारों लोगों ने सुबह दौड़ लगाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और फिटनेस का संदेश भी दिया।
131 फीट तिरंगा इस पूरे आयोजन का दृश्य केंद्र रहा। उसके नीचे हजारों लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
छात्रों, युवाओं, महिलाओं और पुरुषों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक रूप दिया।
आयोजन ने दिया एकता और नागरिक भागीदारी का संदेश
ऐसे सार्वजनिक आयोजनों का एक महत्वपूर्ण पक्ष लोगों को एक साथ लाना होता है। जज्बा दौड़ में विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोग एक साथ दिखाई दिए।
देशभक्ति के साथ मतदान और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश जोड़ने का प्रयास भी किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सिविक सेंस की बात रखी गई।
इस तरह दौड़ को केवल खेल गतिविधि के बजाय सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की कोशिश की गई।
मुजफ्फरनगर की धरती पर गूंजा देशभक्ति का जज्बा
जज्बा दौड़-12 के दौरान राजकीय इंटर कॉलेज का मैदान सुबह से ही उत्साह और ऊर्जा से भरा रहा। 131 फीट ऊंचे तिरंगे के नीचे हजारों लोगों का जुटना और फिर अलग-अलग वर्गों के धावकों का सड़क पर दौड़ना कार्यक्रम की सबसे बड़ी तस्वीर रही।
बारिश के बाद भी प्रतिभागियों की संख्या और उत्साह में कमी नहीं आई। बच्चे, युवा, महिलाएं, पुरुष, छात्र, किसान, मजदूर, व्यापारी और जनप्रतिनिधि एक साथ इस आयोजन का हिस्सा बने।
पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत प्रशासक डॉ. वीरपाल निर्वाल, नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप, भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, राष्ट्रीय लोकदल जिलाध्यक्ष संजय राठी सहित कई प्रमुख लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक बनाया।
शहीदों की याद में दौड़, नई पीढ़ी के लिए संदेश
जज्बा दौड़ का सबसे भावनात्मक पक्ष स्वतंत्रता दिवस के शहीदों को श्रद्धांजलि देना रहा। हजारों लोगों ने दौड़ के जरिए उन बलिदानियों को याद किया जिनके संघर्ष और त्याग से देश को आजादी मिली।
आयोजकों ने इसे नई पीढ़ी को शहीदों की कुर्बानी और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने का माध्यम बताया।
131 फीट तिरंगे के नीचे छात्र-छात्राओं और युवाओं का एक साथ खड़ा होना इस संदेश को और प्रभावशाली बनाता रहा।
जज्बा दौड़-12 ने छोड़ी यादगार छाप
मुजफ्फरनगर में आयोजित जज्बा दौड़-12 ने देशभक्ति, युवा ऊर्जा, फिटनेस और सामाजिक भागीदारी का एक बड़ा दृश्य पेश किया। सुबह पांच बजे शुरू हुई हलचल से लेकर दौड़, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लकी ड्रॉ तक आयोजन में लगातार उत्साह बना रहा।
केसरिया झंडी से शुरू हुई बालक और बालिका वर्ग की दौड़ में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। मैदान और सड़क पर जज्बा की टी-शर्ट पहने धावकों की कतार ने आयोजन को अलग पहचान दी।
भारत माता के जयकारों, जय श्री राम और ‘एक देश-एक चुनाव’ के नारों से माहौल गूंजता रहा। वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए देशभक्ति और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश देने का प्रयास किया गया।
अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोगों का एक साथ दौड़ना आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीरों में रहा। यही सामूहिक भागीदारी इस कार्यक्रम को केवल एक दौड़ से आगे ले गई।

