Shahjahanpur में करंट ने छीन ली 8 साल के मासूम की जिंदगी, खंभे के सपोर्टिंग तार में उतरा था बिजली का करंट; मां गोद में लेकर दौड़ीं अस्पताल
Shahjahanpur के मीरानपुर कटरा में बिजली के करंट ने एक परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल दीं। रामनगर कॉलोनी में गुरुवार सुबह महज आठ साल का मासूम असद उस समय हादसे का शिकार हो गया, जब सड़क किनारे लगे सीमेंटेड बिजली खंभे के सपोर्ट में लगाए गए तार में करंट उतर आया। खेलते-खेलते बच्चा इस तार के संपर्क में आ गया और बुरी तरह झुलस गया।
बच्चे की आवाज सुनकर उसकी मां रेशमा बेगम घर से बाहर दौड़ीं। सामने बेटे को करंट की चपेट में तड़पता देख उनकी चीख निकल गई। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे और किसी तरह बच्चे को तार के संपर्क से अलग किया गया। मां ने उम्मीद नहीं छोड़ी और अचेत बेटे को गोद में उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं, लेकिन वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आठ साल के बच्चे की अचानक मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। जिस गली में कुछ देर पहले बच्चे खेल रहे थे, वहीं देखते ही देखते मातम छा गया।
खेलने निकला था असद, घर नहीं लौट सका
रामनगर कॉलोनी निवासी जलालुद्दीन अंसारी पेशे से कार चालक हैं। उनका आठ वर्षीय बेटा असद मोहल्ले के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा दो का छात्र था।
गुरुवार को असद की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए वह स्कूल नहीं गया था।
सुबह करीब 10 बजे वह घर से बाहर निकला और मोहल्ले के दूसरे बच्चों के साथ खेलने लगा।
किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यह खेल उसके परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन जाएगा।
बताया गया कि खेलते समय असद गली में मकान के पास सड़क किनारे लगे सीमेंटेड बिजली खंभे के सपोर्टिंग तार के संपर्क में आ गया। इसी तार में बिजली का करंट उतर रहा था।
खंभे का सपोर्टिंग तार बना मौत का कारण
बिजली के खंभों को स्थिर रखने के लिए कई स्थानों पर सपोर्टिंग तार लगाए जाते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इन तारों में विद्युत प्रवाह नहीं होना चाहिए।
लेकिन रामनगर कॉलोनी में कथित तौर पर सपोर्टिंग तार में करंट उतर आया था।
असद जैसे ही उसके संपर्क में आया, वह करंट की चपेट में आ गया।
बच्चे के लिए अचानक पैदा हुई यह स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह खुद को तार से अलग नहीं कर सका।
उसकी चीख सुनकर मां बाहर आईं और फिर आसपास के लोगों को बुलाया गया।
बेटे की आवाज सुनकर दौड़ी मां
मां रेशमा बेगम के लिए वह पल जिंदगी भर नहीं भूलने वाला है।
घर के बाहर से बेटे की आवाज सुनाई दी तो वह तुरंत बाहर आईं। वहां उन्होंने असद को बिजली के करंट की चपेट में देखा।
बच्चा छटपटा रहा था।
मां ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। कुछ ही समय में आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए।
लोगों ने किसी तरह बच्चे को करंट की चपेट से बाहर निकाला।
इसके बाद असद को अचेत अवस्था में देखकर परिवार के लोग उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही टूट गई आखिरी उम्मीद
मां को उम्मीद थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर उसके बेटे को बचा लेंगे।
रेशमा बेगम अपने अचेत बेटे को गोद में लेकर अस्पताल पहुंचीं।
परिवार के लोगों को भी उम्मीद थी कि शायद असद की सांसें चल रही हों और इलाज से उसकी हालत सुधर जाए।
लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
यह सुनते ही परिवार में मातम छा गया।
जिस बेटे को मां बचाने की उम्मीद में गोद में लेकर अस्पताल पहुंची थीं, वह वापस नहीं लौट सका।
आठ साल की उम्र में बुझ गई जिंदगी
असद की उम्र महज आठ साल थी।
वह कक्षा दो में पढ़ता था और स्कूल तथा मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलना उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था।
गुरुवार को तबीयत खराब होने के कारण स्कूल नहीं गया था। शायद परिवार को लगा होगा कि घर के आसपास खेलकर वह समय बिताएगा।
लेकिन घर के ठीक पास मौजूद बिजली के खंभे के सपोर्टिंग तार में उतरा करंट उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।
इस घटना ने मोहल्ले के लोगों को भी झकझोर दिया है।
मासूम की मौत के बाद बिजली विभाग पर सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल बिजली व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर उठ रहा है।
यदि किसी बिजली खंभे के सपोर्टिंग तार में करंट उतर रहा था तो यह स्थिति बेहद गंभीर थी।
ऐसे तारों और बिजली के खंभों की नियमित जांच तथा अर्थिंग व्यवस्था की निगरानी जरूरी होती है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को खतरा न हो।
खासकर रिहायशी इलाकों में जहां बच्चे सड़कों और गलियों में खेलते हैं, वहां विद्युत सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
अधीक्षण अभियंता ने जेई को जारी किया नोटिस
हादसे के बाद बिजली विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है।
अधीक्षण अभियंता अनुज प्रताप सिंह ने अवर अभियंता संजय कुमार को नोटिस जारी किया है।
उन्हें शुक्रवार दोपहर तक पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि विभाग हादसे के कारणों की जांच करना चाहता है।
अब यह भी देखा जाएगा कि सपोर्टिंग तार में करंट कैसे पहुंचा और क्या बिजली व्यवस्था में किसी तरह की तकनीकी खामी या लापरवाही थी।
क्या तार में करंट पहले से उतर रहा था?
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सपोर्टिंग तार में विद्युत प्रवाह किस वजह से आया।
क्या किसी तार में लीकेज था?
क्या खंभे की अर्थिंग में खराबी थी?
क्या बिजली के तार और सपोर्टिंग सिस्टम के बीच कोई तकनीकी समस्या थी?
या फिर बारिश, नमी अथवा किसी अन्य कारण से करंट सपोर्टिंग तार तक पहुंचा?
इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बच्चा जिस तार के संपर्क में आया, उसमें करंट मौजूद था और इसी वजह से वह गंभीर हादसे का शिकार हुआ।
सीओ तिलहर ने कही जांच की बात
घटना की जानकारी पुलिस तक भी पहुंची है।
सीओ तिलहर विदुष सक्सेना ने बताया कि तहरीर मिलने पर जांच की जाएगी और उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की जांच में हादसे की परिस्थितियों, मौके की स्थिति और बिजली विभाग की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं को देखा जा सकता है।
यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
परिवार में मचा कोहराम
असद की मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।
जिस बच्चे के स्कूल जाने और दोस्तों के साथ खेलने की आवाज से घर में रौनक रहती थी, उसी घर में अचानक चीख-पुकार मच गई।
मां रेशमा बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि घटना घर के आसपास ही हुई और कुछ ही दूरी पर रहने वाले लोगों की मौजूदगी के बावजूद बच्चे को बचाया नहीं जा सका।
मोहल्ले में भी पसरा मातम
असद की मौत की जानकारी मिलते ही रामनगर कॉलोनी में लोगों की भीड़ जुट गई।
मोहल्ले के लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
स्थानीय लोगों के बीच बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
लोगों का सवाल है कि यदि खंभे के सपोर्टिंग तार में करंट उतर रहा था तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई।
रिहायशी इलाके में बिजली से जुड़े उपकरणों और खंभों की नियमित जांच की मांग भी उठ सकती है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि रिहायशी क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
बच्चे अक्सर घरों के बाहर, गलियों और सड़क किनारे खेलते हैं। उन्हें यह समझ नहीं होती कि बिजली का कोई तार या खंभा सुरक्षित है या खतरनाक।
ऐसे में विद्युत विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि खुले तार, लीकेज, खराब खंभे या करंट वाले सपोर्ट सिस्टम जैसी समस्या तत्काल ठीक की जाए।
बिजली के सपोर्टिंग तार में करंट कैसे खतरनाक हो सकता है?
बिजली के खंभे को सहारा देने वाला तार सामान्यतः विद्युत प्रवाह के लिए नहीं होता। लेकिन यदि किसी कारण से बिजली का रिसाव खंभे या सपोर्टिंग सिस्टम तक पहुंच जाए तो पूरा हिस्सा खतरनाक हो सकता है।
विशेष रूप से नमी वाली जमीन, पानी या धातु के संपर्क में करंट का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति अनजाने में तार या खंभे को छू ले तो गंभीर चोट या मौत तक हो सकती है।
इसलिए किसी संदिग्ध बिजली खंभे या तार को छूने के बजाय तुरंत बिजली विभाग को सूचना देना जरूरी है।
अगर बिजली का तार जमीन या सपोर्टिंग तार में करंट उतार दे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे पहली सावधानी यह है कि सीधे व्यक्ति को हाथ से खींचने की कोशिश न की जाए।
यदि बिजली की सप्लाई चालू है तो बचाव करने वाला व्यक्ति भी करंट की चपेट में आ सकता है।
सबसे पहले बिजली विभाग या संबंधित आपात सेवा को सूचना देकर विद्युत आपूर्ति बंद कराने की कोशिश करनी चाहिए। यदि सुरक्षित परिस्थितियों में संभव हो तो गैर-विद्युत और सूखी वस्तु का इस्तेमाल करके व्यक्ति को स्रोत से अलग करने की प्रक्रिया प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा की जा सकती है।
इसके बाद तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
रिहायशी इलाकों में अर्थिंग की जांच क्यों जरूरी
बिजली के खंभों और विद्युत उपकरणों में सही अर्थिंग सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
अर्थिंग का उद्देश्य विद्युत रिसाव को सुरक्षित रूप से जमीन की ओर प्रवाहित करना है, ताकि खंभे या अन्य धातु के हिस्से में खतरनाक वोल्टेज न बन सके।
यदि अर्थिंग प्रणाली खराब हो या किसी कारण से करंट लीक हो रहा हो तो धातु के ऐसे हिस्से भी खतरनाक बन सकते हैं जिन्हें सामान्यतः विद्युत प्रवाह वाला नहीं माना जाता।
इसीलिए बिजली विभाग की तकनीकी जांच इस हादसे में महत्वपूर्ण होगी।
बारिश और नमी के मौसम में बढ़ जाता है करंट का खतरा
बारिश के मौसम में विद्युत सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
नमी और पानी बिजली के रिसाव के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। यदि किसी बिजली उपकरण, खंभे या तार में पहले से तकनीकी खराबी हो तो बारिश के दौरान स्थिति अधिक खतरनाक हो सकती है।
इसलिए बिजली विभाग को बरसात के मौसम में रिहायशी क्षेत्रों में विशेष निरीक्षण करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों को भी किसी खंभे, तार या विद्युत उपकरण के आसपास पानी जमा होने पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
एक परिवार की जिंदगी बदल गई
असद के परिवार के लिए गुरुवार की सुबह हमेशा के लिए एक दुखद याद बन गई।
कुछ घंटे पहले तक घर में आठ वर्षीय बच्चे की मौजूदगी थी। वह स्कूल नहीं गया था और बच्चों के साथ खेलने के लिए बाहर निकला था।
लेकिन एक ऐसा बिजली का तार, जिसे शायद किसी ने खतरे के रूप में देखा भी नहीं होगा, उसकी जिंदगी का आखिरी कारण बन गया।
अब परिवार के सामने बेटे की यादों के साथ जीवन आगे बढ़ाने की कठिन चुनौती है।
जांच से सामने आएगी जिम्मेदारी
फिलहाल हादसे की पूरी तकनीकी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता द्वारा जेई को नोटिस जारी किया जाना इस मामले में विभागीय जांच की शुरुआत माना जा सकता है।
पुलिस भी तहरीर मिलने पर कार्रवाई की बात कह रही है।
ऐसे में आगे की जांच यह तय करेगी कि घटना केवल तकनीकी दुर्घटना थी या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही की भूमिका भी रही।
एक मासूम की मौत से उठे कई सवाल
असद की मौत ने बिजली सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिहायशी कॉलोनी में बिजली खंभों की स्थिति कैसी है?
सपोर्टिंग तारों की नियमित जांच होती है या नहीं?
अर्थिंग व्यवस्था सही है या नहीं?
बिजली विभाग को किसी स्थानीय व्यक्ति ने पहले शिकायत की थी या नहीं?
यदि शिकायत हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आना जरूरी है, ताकि केवल इस हादसे की जिम्मेदारी ही तय न हो बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका भी जा सके।
मासूमों की सुरक्षा के लिए जरूरी है समय रहते जांच
रिहायशी इलाकों में बिजली के खंभे और तार लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा को सामान्य व्यवस्था मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और गलियों में खेलने वाले छोटे बच्चों के आसपास विद्युत सुरक्षा का स्तर बेहतर होना जरूरी है।
यदि किसी खंभे के आसपास तार ढीला हो, स्पार्किंग हो, करंट महसूस हो, खंभा क्षतिग्रस्त हो या सपोर्टिंग वायर संदिग्ध लगे तो तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दी जानी चाहिए।
एक छोटी शिकायत कभी-कभी बड़े हादसे को रोक सकती है।
शाहजहांपुर के इस हादसे से सबक लेने की जरूरत
मीरानपुर कटरा की रामनगर कॉलोनी में आठ वर्षीय असद की मौत ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि बिजली की छोटी सी तकनीकी खामी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
हादसे के बाद नोटिस जारी हो गया है और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जांच के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य बिजली खंभों और सपोर्टिंग तारों की भी व्यापक जांच की जाएगी?
यदि ऐसा किया जाता है तो शायद असद की मौत के बाद कम से कम दूसरे बच्चों और परिवारों को ऐसी दुर्घटना से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सके।

