Swara Bhaskar के ‘पद्मावत’ वाले बयान पर फिर बवाल, सफाई के बाद भी नहीं थमा विवाद; जौहर पर टिप्पणी ने खड़ा किया बड़ा सवाल
News-Desk
11 min read
Padmaavat, swara bhaskar, Swara Bhasker, जौहर, दीपिका पादुकोण, पद्मावत, बॉलीवुड विवाद, रानी पद्मावती, संजय लीला भंसाली, सोशल मीडिया विवाद, स्वरा भास्करनई दिल्ली। अभिनेत्री Swara Bhaskar एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। इस बार मामला वर्ष 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘पद्मावत’ से जुड़ा है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की थी। उनके बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह दावा किया जाने लगा कि उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है।
बयान वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर स्वरा को जमकर ट्रोल किया गया। बढ़ते विवाद के बीच मंगलवार को अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो जारी कर सफाई दी। स्वरा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या किले की अन्य महिलाओं को कायर नहीं कहा था। उनके मुताबिक, उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया।
हालांकि, स्वरा की सफाई के बाद भी विवाद पूरी तरह थमता नजर नहीं आया है, क्योंकि असली सवाल केवल यह नहीं है कि उन्होंने किसे ‘कायर’ कहा या नहीं कहा, बल्कि यह भी है कि ऐतिहासिक जौहर की घटना को आधुनिक दौर में किस नजरिए से प्रस्तुत किया जाए और उस पर टिप्पणी करते समय शब्दों की सीमा क्या होनी चाहिए।
दिल्ली के कार्यक्रम में क्या कहा था स्वरा भास्कर ने?
विवाद की शुरुआत 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक के दौरान हुई। कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने ‘पद्मावत’ के जौहर सीन का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह का चित्रण रेप सर्वाइवर्स तक गलत संदेश पहुंचा सकता है।
स्वरा ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी प्रस्तुति से किसी बलात्कार पीड़िता को यह महसूस हो सकता है कि समाज उसके जीवित बचने को ही गलत मानता है। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल किया कि क्या किसी महिला की जिंदगी का अंत बलात्कार के साथ हो जाना चाहिए और क्या समाज किसी सर्वाइवर को यह संदेश देना चाहता है कि यदि वह वास्तव में सम्मानित या बहादुर महिला होती तो उसने खुद को खत्म कर लिया होता।
उनकी टिप्पणी का मूल मुद्दा आधुनिक समय में बलात्कार पीड़िताओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को लेकर था। लेकिन सोशल मीडिया पर बयान का एक हिस्सा तेजी से वायरल हुआ और उसके बाद चर्चा का केंद्र बदल गया।
जौहर सीन में गर्भवती महिला के दृश्य पर भी जताई थी आपत्ति
स्वरा ने कार्यक्रम में फिल्म के उस दृश्य का भी उल्लेख किया जिसमें एक गर्भवती महिला का पेट दिखाया जाता है और वह जौहर करने जा रही होती है। अभिनेत्री के अनुसार, इस दृश्य ने उन्हें बेहद विचलित किया था।
उन्होंने बताया कि फिल्म देखते समय उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने थिएटर में ही विरोध जताया था। इसके बाद उन्होंने लगभग पांच दिन तक इस विषय पर विचार किया और फिर निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक ओपन लेटर लिखा था।
यहीं से स्वरा की पुरानी ‘पद्मावत’ वाली आपत्ति एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि इस बार विवाद उनकी मूल आपत्ति से आगे निकलकर रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को लेकर उनके कथित शब्दों तक पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर दावा- रानी पद्मावती को कायर कहा
बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई लोगों ने स्वरा पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया। कुछ पोस्ट में यह दावा किया गया कि अभिनेत्री ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को ‘कायर’ बताया।
यही दावा विवाद का सबसे बड़ा कारण बना। स्वरा को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा और देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक तथा सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया।
लेकिन स्वरा ने इस आरोप को सीधे खारिज कर दिया।
वीडियो जारी कर स्वरा ने कहा- ‘मैंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा’
भारी ट्रोलिंग के बाद स्वरा भास्कर ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बयान का एक छोटा क्लिप वायरल हो रहा है और वह स्पष्ट करना चाहती हैं कि उन्होंने रानी पद्मावती या महल की अन्य महिलाओं को कायर नहीं कहा था।
स्वरा ने अपनी सफाई में कहा कि अगर उनकी आलोचना करनी है तो वास्तविक बात के आधार पर की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने बारे में एक काल्पनिक स्थिति रखते हुए बात कही थी।
उन्होंने समझाया कि यदि वह खुद बलात्कार की पीड़िता होतीं और फिल्म का क्लाइमैक्स देखतीं, तो उन्हें यह महसूस हो सकता था कि बलात्कार के बाद जीवित बचना ही उनके द्वारा की गई ‘कायरता’ है।
यानी अभिनेत्री का कहना है कि उनका निशाना जौहर करने वाली महिलाओं का चरित्र या साहस नहीं था, बल्कि वह उस सामाजिक संदेश पर सवाल उठा रही थीं जो उन्हें उस दृश्य से महसूस हुआ।
स्वरा का बड़ा सवाल- क्या महिला की ‘पवित्रता’ उसकी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है?
स्वरा ने अपनी सफाई में आज के समाज में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में बलात्कार आज भी महामारी जैसी स्थिति बन चुका है।
उन्होंने हाल में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या ऐसी फिल्में बनाई जानी चाहिए जो किसी भी रूप में यह संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से अधिक महत्वपूर्ण है।
यही वह बिंदु है जहां स्वरा की टिप्पणी आधुनिक महिला अधिकारों और ऐतिहासिक घटनाओं के बीच बहस खड़ी करती है। एक तरफ उनका तर्क है कि आज के दौर में रेप सर्वाइवर्स को यह संदेश मिलना चाहिए कि उनका जीवन किसी भी परिस्थिति में कम मूल्यवान नहीं है। दूसरी तरफ आलोचकों का सवाल है कि सदियों पुराने युद्धकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों में हुई घटनाओं को आज की सामाजिक परिस्थितियों के चश्मे से देखने की भी अपनी सीमाएं हैं।
निर्भया का उदाहरण देकर स्वरा ने रखा अपना पक्ष
स्वरा ने अपने बयान में निर्भया मामले का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी।
उनका कहना था कि किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उनके तर्क का केंद्र यही रहा कि किसी महिला के साथ यौन हिंसा होने के बाद उसका जीवन समाप्त नहीं हो जाता और समाज को उसके जीवित रहने को कमजोरी या शर्म से जोड़ने के बजाय उसके जीवन और अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
इस दृष्टिकोण से देखें तो स्वरा की टिप्पणी का एक बड़ा हिस्सा आधुनिक समाज में रेप सर्वाइवर्स के प्रति संवेदनशीलता और उनके पुनर्वास से जुड़ा है।
लेकिन सवाल यह भी- क्या इतिहास को आज के चश्मे से तौलना सही है?
यहीं से Padmaavat Controversy का दूसरा पक्ष सामने आता है। जौहर भारतीय इतिहास और विशेष रूप से राजपूत इतिहास से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय रहा है। इसे लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्याख्याएं मौजूद हैं।
फिल्म ‘पद्मावत’ में जौहर को जिस तरह सिनेमाई रूप दिया गया, वह भी विवादों से अछूता नहीं रहा था। ऐसे में जब कोई कलाकार इस दृश्य को आधुनिक महिला अधिकारों और बलात्कार की घटनाओं के संदर्भ में देखता है, तो उसके विचार पर बहस होना स्वाभाविक है।
लेकिन आलोचकों का तर्क यह भी है कि ऐतिहासिक पात्रों और घटनाओं को आधुनिक नैतिक मानकों के आधार पर सीधे ‘सही’ या ‘गलत’ ठहराना इतिहास की जटिलता को कम कर सकता है।
यही कारण है कि स्वरा की टिप्पणी पर बहस केवल बॉलीवुड या सोशल मीडिया विवाद नहीं रह गई, बल्कि इतिहास, महिला अधिकार, व्यक्तिगत पसंद, सम्मान और सिनेमा की जिम्मेदारी जैसे कई सवालों को एक साथ सामने लेकर आई है।
प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई तीखी बहस
इस विवाद में शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया ने भी चर्चा को बढ़ा दिया। प्रियंका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्वरा के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब विकल्प मौत और गुलाम बनने के बीच हो, तो महिलाओं ने मौत को चुना और वह उनका फैसला था।
प्रियंका की इस टिप्पणी के जवाब में स्वरा ने कहा कि वह उनकी असल बात को नहीं समझ रही हैं।
स्वरा ने अपनी प्रतिक्रिया में मुद्दे को जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद से अलग बताया। उनका सवाल था कि चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि आज हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं।
उन्होंने फिर रेप सर्वाइवर्स का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि क्या बलात्कार के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का अधिकार नहीं है।
इस तरह सोशल मीडिया पर दोनों के बीच हुई बहस ने विवाद को और व्यापक बना दिया।
‘पद्मावत’ में क्या दिखाया गया था जौहर का सीन?
संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’ का जौहर सीन फिल्म के क्लाइमैक्स के करीब आता है। कहानी में अलाउद्दीन खिलजी की सेना चित्तौड़ के किले पर कब्जा कर लेती है और राजपूत पक्ष पराजित हो जाता है।
फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती का किरदार निभाया था। क्लाइमैक्स में रानी पद्मावती किले की अन्य महिलाओं के साथ जौहर करती दिखाई जाती हैं।
फिल्म में इस घटना को दुश्मन के हाथों पकड़े जाने से बचने के लिए स्वयं को आग के हवाले करने के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी दृश्य को लेकर स्वरा ने फिल्म देखने के बाद अपनी आपत्ति जाहिर की थी।
विवाद का असली केंद्र: सिनेमा, इतिहास और आज की संवेदनशीलता
इस पूरे विवाद को केवल ‘स्वरा बनाम सोशल मीडिया’ के रूप में देखना शायद तस्वीर को अधूरा कर देगा। यहां तीन अलग-अलग दृष्टिकोण आमने-सामने हैं।
पहला दृष्टिकोण ऐतिहासिक है, जिसमें जौहर को उस दौर के युद्ध, सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं के सामने मौजूद परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाता है। दूसरा दृष्टिकोण सिनेमाई है, जिसमें निर्देशक किसी ऐतिहासिक घटना को अपने रचनात्मक नजरिए से प्रस्तुत करता है। तीसरा दृष्टिकोण आधुनिक सामाजिक विमर्श का है, जिसमें महिलाओं के जीवन, गरिमा और यौन हिंसा के बाद उनके अधिकारों को केंद्र में रखा जाता है।
स्वरा भास्कर तीसरे दृष्टिकोण से सवाल उठा रही हैं। उनके आलोचक पहले और दूसरे दृष्टिकोण की अनदेखी पर सवाल कर रहे हैं। यही टकराव Swara Bhasker Padmaavat Controversy को इतना चर्चित बना रहा है।
सफाई के बाद भी सवाल बाकी
स्वरा ने यह साफ कर दिया है कि उनके अनुसार उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा। उन्होंने अपने बयान का संदर्भ भी बताया और कहा कि वह आधुनिक समय में रेप सर्वाइवर्स को मिलने वाले सामाजिक संदेश को लेकर चिंतित थीं।
लेकिन सोशल मीडिया विवादों की यही मुश्किल है कि कई बार लंबे बयान से निकला छोटा हिस्सा पूरे विमर्श पर हावी हो जाता है। दूसरी तरफ सार्वजनिक जीवन में रहने वाले कलाकारों के शब्दों का प्रभाव भी व्यापक होता है, इसलिए इतिहास और आस्था से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करते समय भाषा और संदर्भ दोनों का महत्व बढ़ जाता है।
स्वरा की आलोचना करने वालों के लिए सवाल यह है कि ऐतिहासिक जौहर को केवल आज की सामाजिक दृष्टि से देखना क्या उचित है। वहीं स्वरा का पक्ष रखने वालों के लिए सवाल यह है कि क्या किसी ऐतिहासिक घटना पर चर्चा करते हुए आज की महिलाओं और रेप सर्वाइवर्स की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया जा सकता है।
यही दो सवाल इस पूरे विवाद को लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं।

