US-Iran युद्ध फिर भड़का: 3 दिन में दूसरी बार अमेरिकी हमला, शादी समारोह पर मिसाइल गिरने का दावा; 4 साल के बच्चे समेत कई मौतें
US Iran एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने ईरान पर तीन दिनों के भीतर दूसरी बार सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान के सिरिक, खुजस्तान, केशम द्वीप और बंदर अब्बास से जुड़े इलाकों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान की ओर से इन हमलों में नागरिकों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया गया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसके हमलों का निशाना ईरान के सैन्य ठिकाने थे।
सबसे ज्यादा चिंता सिरिक से सामने आए उस दावे ने बढ़ाई है, जिसमें ईरान की ओर से कहा गया कि एक मिसाइल ऐसे स्थान पर गिरी जहां शादी समारोह चल रहा था। ईरानी पक्ष के मुताबिक, इस घटना में कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग बताई गई है। एक रिपोर्ट में 5 लोगों की मौत और 68 लोगों के घायल होने की बात कही गई, जबकि ईरानी सरकारी टेलीविजन की शुरुआती रिपोर्ट में 4 मौतों और 50 घायलों का जिक्र किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दर्दनाक दावा यह है कि मृतकों में एक 4 साल का बच्चा भी शामिल है। हमले के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में घायल बच्चों को अस्पताल में इलाज कराते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन तस्वीरों और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। इसलिए नागरिकों के हताहत होने से जुड़े आंकड़ों को फिलहाल ईरानी अधिकारियों और स्थानीय रिपोर्टों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सिरिक में शादी समारोह के दौरान मिसाइल गिरने का दावा, बच्चों के घायल होने की तस्वीरें सामने आईं
ईरान के मुताबिक, सिरिक के कुहस्तक इलाके में एक रिहायशी घर को अमेरिकी हमले में निशाना बनाया गया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने आरोप लगाया कि जिस घर पर हमला हुआ, वहां एक परिवार शादी का जश्न मना रहा था।
बघाई के अनुसार, इस हमले में 50 से ज्यादा निर्दोष पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए या घायल हुए। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को बेहद गंभीर बताते हुए इसे “बर्बर अपराध” करार दिया और कहा कि ईरान इन हमलों का जवाब देगा।
ईरान के सरकारी टीवी चैनल IRIB की शुरुआती रिपोर्ट में सिरिक में हुए हमले में 4 लोगों की मौत और 50 लोगों के घायल होने की बात कही गई। वहीं, अन्य रिपोर्ट में मृतकों की संख्या 5 और घायलों की संख्या 68 बताई गई।
इन अलग-अलग आंकड़ों से साफ है कि हमले के तुरंत बाद हताहतों की संख्या को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी और आंकड़ों में बदलाव संभव है।
चार साल के बच्चे की मौत के दावे ने बढ़ाई चिंता
सिरिक हमले से जुड़ी खबरों में सबसे ज्यादा चिंता उस दावे को लेकर है जिसमें कहा गया कि मृतकों में केवल चार वर्ष का एक बच्चा भी शामिल था।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें अस्पताल में घायल बच्चों का इलाज किए जाने का दावा किया गया। तस्वीरों और वीडियो में बच्चों को चिकित्सा सहायता लेते हुए दिखाया गया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या तस्वीर को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम प्रमाण मानना उचित नहीं है। ईरान की ओर से इसे नागरिक इलाके पर हमला बताया गया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्य अभियान का लक्ष्य ईरानी सैन्य ढांचा था।
यही अंतर इस संघर्ष की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है—एक ही घटना को दोनों पक्ष पूरी तरह अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं।
खुजस्तान में भी अमेरिकी हमले का दावा, 7 लोगों की मौत
ईरान ने खुजस्तान प्रांत में अमेरिकी मिसाइल हमले में 7 लोगों के मारे जाने और 8 लोगों के घायल होने का दावा किया है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, अमेरिका ने खुजस्तान में तीन स्थानों को निशाना बनाया। ईरानी पक्ष के अनुसार, इन हमलों में जान-माल का नुकसान हुआ।
दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई ईरान के सैन्य ठिकानों के खिलाफ थी। यानी अमेरिका इन हमलों को सैन्य अभियान के तौर पर पेश कर रहा है, जबकि ईरान नागरिक नुकसान को सामने रखकर इसकी आलोचना कर रहा है।
ऐसे में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि खुजस्तान में बताए गए मृतकों और घायलों की संख्या फिलहाल ईरानी दावे पर आधारित है।
तीन दिन में दूसरी बार अमेरिकी हमला, तनाव तेजी से बढ़ा
मौजूदा घटनाक्रम को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका ने कुछ ही दिनों में ईरान पर दो बार सैन्य कार्रवाई की है।
इससे पहले 30 अगस्त, रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाने का दावा किया था।
अमेरिका के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य सैन्य खतरे को रोकना था। वहीं ईरान ने भी उस हमले में लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही थी, हालांकि उस समय मृतकों या घायलों की संख्या सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई थी।
अब मंगलवार रात की कार्रवाई के बाद तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका ने किन इलाकों को बनाया निशाना?
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े विवरण में सिरिक, खुजस्तान, केशम द्वीप और बंदर अब्बास का नाम सामने आया है।
इन क्षेत्रों का महत्व केवल भौगोलिक नहीं है। इनमें कुछ स्थान ईरान की समुद्री गतिविधियों और होर्मुज क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक इलाकों के करीब हैं। यही कारण है कि यहां होने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह सकता।
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बन चुकी है।
ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई का दावा किया है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उसने जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी पक्ष ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा भी किया।
लेकिन इस दावे को अमेरिकी अधिकारियों ने खारिज किया है।
दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी हमले जारी रहने के कारण स्थिति बदल सकती है।
यानी यहां भी दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा, अमेरिका ने किया खंडन
युद्ध और सैन्य संघर्ष के दौरान हताहतों की संख्या को लेकर विरोधी पक्षों के दावे अक्सर अलग-अलग होते हैं। इस मामले में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है।
ईरान ने जहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की बात कही, वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी के आधार पर किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने से इनकार किया।
ऐसे में जब तक स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध नहीं होती, दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग दर्ज करना ही जिम्मेदार पत्रकारिता का रास्ता है।
होर्मुज स्ट्रेट बना अमेरिका-ईरान टकराव का सबसे बड़ा केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव की जड़ में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में सी-माइंस यानी बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की है। समुद्र में ऐसी माइंस जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं और समुद्री यातायात को बाधित करने की क्षमता रखती हैं।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इसी खतरे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज के आसपास ईरानी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया।
ट्रम्प ने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब देता है तो अमेरिका उससे भी ज्यादा कड़ा जवाब देगा।
इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका पैदा हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो पूरी दुनिया पर पड़ेगा असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल और गैस इसी क्षेत्र से होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है।
इसलिए यहां सैन्य तनाव केवल अमेरिका और ईरान का मामला नहीं रह जाता। अगर संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री परिवहन लागत में वृद्धि और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता जैसे प्रभाव सामने आ सकते हैं।
यही कारण है कि दुनिया के कई देश होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सैन्य तनाव को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।
ईरान के दो टैंकरों को भी अमेरिकी सेना ने निशाना बनाया
2 सितंबर की सुबह अमेरिकी सेना द्वारा दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई।
इस घटनाक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी उस समय उपलब्ध नहीं थी। लेकिन यदि ईरान से जुड़े समुद्री जहाज लगातार सैन्य कार्रवाई के दायरे में आते हैं, तो इससे समुद्री क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पहले ही इस संघर्ष का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। ऐसे में टैंकरों पर कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
USS Abraham Lincoln थाईलैंड पहुंचा, 200 दिनों से ज्यादा समुद्र में रहा
अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln बुधवार को थाईलैंड पहुंचा। यह युद्धपोत 200 दिनों से ज्यादा समय तक लगातार समुद्र में रहने के बाद करीब पांच दिनों के आराम के लिए थाईलैंड पहुंचा है।
इस पोत पर लगभग 5,000 सैनिक और कर्मचारी तैनात हैं। यह पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े मिशन पर रहा था।
लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज पर मौजूद सैन्यकर्मियों को किसी बंदरगाह पर रुकने का सीमित अवसर मिला। लंबे सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों की मानसिक स्थिति और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई गई है।
USS Abraham Lincoln की तैनाती यह दिखाती है कि अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों को बड़े स्तर पर सक्रिय रखा हुआ है।
रूस पर भी गंभीर आरोप, ईरान को सुपरसोनिक मिसाइल तकनीक देने की रिपोर्ट
अमेरिका-ईरान टकराव के बीच रूस और ईरान के सैन्य सहयोग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस कथित तौर पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक विकसित करने में गुप्त सहायता दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच यह कथित कार्यक्रम वर्ष 2023 से चल रहा है।
इस कार्यक्रम का कथित कोडनेम C430L बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ ईरान के साथ काम कर रहे हैं और ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में सहायता दी जा रही है।
हालांकि, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि रूस की मदद से विकसित किसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने वास्तविक सैन्य तैनाती में शामिल कर लिया है।
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से क्यों बढ़ सकती है चिंता?
सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें आवाज की गति से कई गुना तेज गति से उड़ने में सक्षम हो सकती हैं। अगर ऐसी मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ान भरती हैं तो कुछ परिस्थितियों में उन्हें पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए ट्रैक करना और रोकना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसी तकनीक का उपयोग समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाली एंटी-शिप मिसाइलों और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है।
ईरान के पास पहले से ही मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं हैं। ऐसे में अत्याधुनिक प्रोपल्शन तकनीक तक पहुंच उसके सैन्य कार्यक्रम को और उन्नत कर सकती है।
फिर भी कथित रूसी सहयोग और ईरान की वास्तविक सैन्य तैनाती के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी तकनीक का परीक्षण होना और उसे ऑपरेशनल सैन्य क्षमता में शामिल करना दो अलग-अलग बातें हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव आखिर फिर क्यों बढ़ा?
मौजूदा तनाव का केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है। अमेरिकी आरोप के अनुसार ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में सी-माइंस बिछाने की कोशिश की।
अमेरिका के लिए यह गंभीर सुरक्षा चिंता है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला समुद्री यातायात वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए जवाब देने की चेतावनी दी है।
इस तरह दोनों देशों के बीच कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया है।
30 अगस्त के हमले ने खोला नया सैन्य मोर्चा
30 अगस्त को अमेरिकी सेना ने ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाने का दावा किया था।
उस समय भी ईरान ने लोगों के मारे जाने और घायल होने की बात कही थी, लेकिन मृतकों की संख्या स्पष्ट नहीं की गई थी।
अब मंगलवार रात हुए नए हमलों ने यह संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव एक छोटी घटना तक सीमित नहीं रहा है। सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ रहा है और जवाबी कार्रवाई का खतरा भी लगातार बना हुआ है।
नागरिक इलाकों पर हमले के आरोप ने बढ़ाई चिंता
सिरिक में शादी समारोह को निशाना बनाए जाने का ईरानी आरोप इस पूरे संघर्ष का सबसे संवेदनशील पहलू है।
युद्ध के दौरान सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने और नागरिक आबादी के प्रभावित होने के बीच अंतर बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी सैन्य कार्रवाई में नागरिकों की मौत होती है, तो उसके कारण मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय चिंता दोनों बढ़ सकते हैं।
ईरान ने इसी आधार पर अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की है। अमेरिका का पक्ष अलग है और वह कह रहा है कि उसने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इसलिए सिरिक की घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर आगे अधिक स्पष्ट और स्वतंत्र जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
ईरान का जवाब कितना बड़ा हो सकता है?
ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
यदि दोनों देशों के बीच जवाबी हमलों की यह श्रृंखला आगे बढ़ती है तो संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान की सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले अन्य देशों पर भी सुरक्षा दबाव बढ़ सकता है।
जॉर्डन और बहरीन का नाम सामने आने के बाद क्षेत्रीय स्तर पर यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आने वाले समय में संघर्ष का भौगोलिक दायरा कितना बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में एक और बड़ा सैन्य संकट?
इजराइल और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव ने पश्चिम एशिया को अस्थिर बना रखा है। ऐसे वातावरण में अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमले शुरू होना पूरे क्षेत्र के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा करता है।
अगर संघर्ष और बढ़ता है तो इसके प्रभाव तेल, गैस, समुद्री व्यापार, विमानन, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजार तक पहुंच सकते हैं।
विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर हजारों किलोमीटर दूर स्थित देशों तक पहुंच सकता है।
अमेरिका के सामने भी आसान विकल्प नहीं
अमेरिका के लिए ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाना केवल मिसाइल हमलों तक सीमित रणनीति नहीं है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और सैनिक भी संभावित ईरानी जवाबी हमलों के दायरे में आ सकते हैं।
जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के खिलाफ ईरानी कार्रवाई के दावे इसी जोखिम को सामने लाते हैं।
यानी अमेरिका जितना सैन्य दबाव बढ़ाता है, उतना ही उसके क्षेत्रीय सैन्य संसाधनों की सुरक्षा का सवाल भी महत्वपूर्ण होता जाता है।
ईरान के लिए भी संघर्ष की कीमत भारी हो सकती है
दूसरी ओर ईरान के सामने भी कई चुनौतियां हैं। अमेरिकी सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय तैनाती का सामना करना आसान नहीं है।
यदि संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ-साथ ऊर्जा ढांचे, परिवहन, व्यापार और नागरिक जीवन पर भी असर पड़ सकता है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई अमेरिका को और कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच एक ऐसा चक्र बन सकता है जिसमें प्रत्येक हमला अगले हमले का आधार बन जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या यह संघर्ष और फैलेगा?
मौजूदा घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव कितनी दूर तक जाएगा।
तीन दिनों में दूसरी अमेरिकी कार्रवाई, ईरान की जवाबी कार्रवाई के दावे, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों का उल्लेख, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और क्षेत्र में अमेरिकी विमानवाहक पोत की सक्रियता—ये सभी घटनाक्रम स्थिति की गंभीरता को दिखाते हैं।
इसके साथ ही सिरिक में नागरिकों के मारे जाने के आरोप और बच्चों के घायल होने की तस्वीरों ने इस संघर्ष के मानवीय पहलू को भी सामने ला दिया है।
फिलहाल दोनों पक्षों के दावों में अंतर बना हुआ है और कई घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए आने वाले घंटों और दिनों में सामने आने वाली आधिकारिक और स्वतंत्र जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
तेल बाजार से लेकर समुद्री व्यापार तक, दुनिया की नजर होर्मुज पर
इस संघर्ष का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। होर्मुज स्ट्रेट के कारण पूरी दुनिया इस टकराव पर नजर रखे हुए है।
अगर समुद्री यातायात बाधित होता है तो तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है और परिवहन से लेकर उद्योग तक कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि US Iran War अब केवल दो देशों के बीच सैन्य टकराव नहीं रह गया है। इसका हर नया घटनाक्रम वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।

