मानहानि केस में Sayani Gupta को अंतरिम राहत: सीन चोरी के आरोप लगाने वालीं फिल्ममेकर का मानहानिकारक कंटेंट हटाना होगा; मेटा-रेडिट भी नामजद, जानिए पूरा विवाद
News-Desk
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यह विवाद फिल्ममेकर विनीता नेगी के उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि सयानी गुप्ता की डायरेक्टोरियल डेब्यू शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों की कथित तौर पर नकल की गई है।
सयानी गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है और उन्हें झूठा, भ्रामक तथा बिना ठोस आधार वाला बताया है। इसी विवाद के बीच सयानी ने विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
कोर्ट ने कथित मानहानिकारक कंटेंट पर लगाई अंतरिम रोक
लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल सेशंस जज शुद्धिकुमार मुरलीधरराव बुके ने सयानी गुप्ता की ओर से दायर अंतरिम राहत की अर्जी मंजूर की।
कोर्ट ने विनीता नेगी और अन्य प्रतिवादियों को सयानी गुप्ता के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने अथवा पहले से मौजूद ऐसी सामग्री को आगे प्रसारित करते रहने से रोक दिया है।
अंतरिम आदेश में मेटा, रेडिट और डेकन क्रॉनिकल जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने का निर्देश भी शामिल है।
हालांकि, कोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है। आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सयानी गुप्ता से जुड़े सच्चे तथ्यों पर आधारित समाचार या जानकारी के प्रकाशन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
यानी मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और कोर्ट का यह आदेश अंतरिम राहत से संबंधित है।
क्या है ‘आसमानी’ फिल्म से जुड़ा पूरा विवाद?
सयानी गुप्ता की शॉर्ट फिल्म ‘आसमानी’ उनके डायरेक्टोरियल डेब्यू के तौर पर सामने आई है। फिल्म को लेकर फिल्ममेकर विनीता नेगी ने गंभीर आरोप लगाए थे।
विनीता नेगी, जो FTII की पूर्व छात्रा और फिल्ममेकर हैं, का दावा था कि वह ‘प्रभा’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री पर काम कर रही थीं। उनका आरोप था कि ‘आसमानी’ में उनकी अधूरी डॉक्यूमेंट्री के कुछ सीन और महत्वपूर्ण हिस्सों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
विनीता ने कहानी चोरी, कॉपीराइट और धोखाधड़ी जैसे आरोप लगाए।
दूसरी ओर, सयानी गुप्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे, भ्रामक और बिना ठोस आधार वाले हैं।
इस तरह विवाद सिर्फ दो फिल्ममेकर्स के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए भी व्यापक रूप से सामने आया।
सयानी ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी की थी शिकायत
विवाद बढ़ने के बाद सयानी गुप्ता ने स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन में भी शिकायत की थी।
सयानी के पक्ष के मुताबिक, इस शिकायत पर कार्रवाई होने से पहले ही विनीता ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर आरोप लगाने शुरू कर दिए। सयानी का दावा था कि सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए ये आरोप बड़े स्तर पर फैलाए गए।
उनकी याचिका में कहा गया कि इससे उनकी पेशेवर छवि और फिल्म के काम को नुकसान पहुंचा।
इसके बाद सयानी गुप्ता ने विनीता नेगी के खिलाफ 9 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया।
फिल्म की स्क्रीनिंग पर भी पड़ा कथित असर
सयानी गुप्ता की याचिका में फिल्म के फेस्टिवल से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया गया।
सयानी के अनुसार, उनकी फिल्म ‘आसमानी’ को इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूजीलैंड में स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था। हालांकि बाद में फिल्म को फेस्टिवल से हटा दिया गया।
सयानी की ओर से दावा किया गया कि विवाद और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के प्रसार का फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा।
याचिका में इस कथित नुकसान को भी मानहानि के दावे से जोड़ा गया है।
9 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
सयानी गुप्ता ने कोर्ट से 9 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
इसके अलावा उन्होंने कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाने और विनीता नेगी की ओर से सार्वजनिक रूप से बयान वापस लेने तथा माफी मांगने की मांग भी की है।
सयानी की ओर से कथित मानहानिकारक सामग्री वाली प्रतियों या डिवाइस को अपने कब्जे में लेने के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने की मांग भी की गई थी।
फिलहाल कोर्ट ने इस चरण में उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की है।
फिल्म की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं दीया मिर्जा
‘आसमानी’ फिल्म से जुड़े प्रोजेक्ट में अभिनेत्री दीया मिर्जा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर जुड़ी हैं।
सयानी गुप्ता के लिए यह फिल्म इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके डायरेक्टोरियल डेब्यू के रूप में सामने आई है।
ऐसे में फिल्म को लेकर उठे आरोप और उसके बाद शुरू हुआ कानूनी विवाद उनके पेशेवर करियर से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बन गया है।
कोर्ट ने सच्ची जानकारी के प्रकाशन पर पूरी रोक नहीं लगाई
इस मामले में कोर्ट के अंतरिम आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित मानहानिकारक कंटेंट पर रोक लगाने के बावजूद अदालत ने सच्चे तथ्यों पर आधारित जानकारी के प्रकाशन को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया है।
इसका मतलब है कि अदालत का आदेश अंतरिम राहत के दायरे में है और इसे मामले का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
‘आसमानी’ से जुड़े आरोपों और सयानी गुप्ता के पक्ष के बीच विवाद पर अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और मामले की विस्तृत कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
दोनों पक्षों की दलीलें अब भी अहम
विनीता नेगी की ओर से लगाया गया मुख्य आरोप फिल्म की कथित समानता और उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के हिस्सों के कथित इस्तेमाल से संबंधित है।
वहीं सयानी गुप्ता इन आरोपों से इनकार कर रही हैं और उनका कहना है कि सोशल मीडिया तथा मीडिया के जरिए लगाए गए आरोपों से उनकी प्रतिष्ठा और फिल्म को नुकसान हुआ।
ऐसे मामलों में अदालत के सामने आरोपों की सत्यता, कथित सामग्री की प्रकृति, उसके प्रसार और उससे हुए संभावित नुकसान जैसे कई कानूनी पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
फिलहाल कोर्ट ने सयानी की अंतरिम राहत की मांग पर उन्हें राहत दी है।
अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को
अंतरिम राहत के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
सयानी गुप्ता की ओर से एडवोकेट मोनिल पंजाबी, प्रियंका सिन्हा, भाव्या शाह और मुजतबा अंबेकर ने पैरवी की।
वहीं विनीता नेगी की ओर से एडवोकेट सायली शिंदे और लक्ष्मी जेनकिंस पेश हुईं।
आगे की सुनवाई में मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें और कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
‘आसमानी’ विवाद में फिलहाल सयानी को अंतरिम राहत
‘आसमानी’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। एक तरफ विनीता नेगी अपनी डॉक्यूमेंट्री ‘प्रभा’ के कथित इस्तेमाल को लेकर आरोप लगा रही हैं, जबकि सयानी गुप्ता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
मुंबई सिटी सिविल कोर्ट के ताजा अंतरिम आदेश से सयानी गुप्ता को फिलहाल राहत मिली है। कथित मानहानिकारक कंटेंट के प्रकाशन और प्रसारण पर रोक लगाई गई है और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री हटाने का निर्देश भी दिया गया है।
हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है। 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

