Etah में दर्दनाक हादसा: 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया राजमिस्त्री, 55 वर्षीय रामसरन की मौत; सात बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
Etah जिले के अलीगंज थाना क्षेत्र के सिमौर गांव में रविवार सुबह एक दर्दनाक विद्युत हादसे ने एक परिवार की जिंदगी बदल दी। घर की दीवार पर प्लास्टर करने का काम कर रहे 55 वर्षीय राजमिस्त्री रामसरन अचानक 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आ गए। तेज करंट की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गए।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजन और आसपास के लोग उन्हें तत्काल निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अलीगंज लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। रामसरन की मौत की खबर घर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
जिस व्यक्ति के कंधों पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी, उसकी अचानक मौत ने पत्नी और बच्चों के सामने भविष्य का बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सिमौर गांव में सुबह करीब 10 बजे हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार रामसरन पुत्र दीनदयाल निवासी चमन नगरिया, मोहम्मद नगर बझेरा राजमिस्त्री का काम करते थे। इसी काम से वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
रविवार सुबह करीब 10 बजे वह सिमौर गांव पहुंचे थे। बताया गया कि हरदयाल के परिवार में सचिन के यहां घर के बाहर दीवार पर प्लास्टर का काम चल रहा था। रामसरन इसी काम में लगे हुए थे।
दीवार के बाहर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही थी। काम के दौरान रामसरन अचानक इस विद्युत लाइन की चपेट में आ गए।
करंट का झटका इतना तेज था कि वह गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और उन्हें बचाने के लिए तत्काल प्रयास शुरू किए गए।
तेज करंट से बुरी तरह झुलसे रामसरन
हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने के बाद रामसरन के शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उनके हाथ की त्वचा बुरी तरह झुलस गई और उंगलियां तक क्षतिग्रस्त हो गईं।
परिजन उन्हें बिना समय गंवाए निजी वाहन से सीएचसी अलीगंज लेकर पहुंचे। परिवार को उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिलने से उनकी जान बचाई जा सकेगी, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अचानक हुई इस मौत से परिवार के लोग सदमे में हैं।
भाई ने बिजली आपूर्ति बंद नहीं कराने का लगाया आरोप
रामसरन के भाई विजयपाल ने हादसे के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर प्लास्टर का काम कराया जा रहा था, उसके बेहद करीब से हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही थी।
विजयपाल के मुताबिक लाइन में करंट प्रवाहित हो रहा था, इसके बावजूद काम शुरू कराने से पहले बिजली आपूर्ति बंद नहीं कराई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि रामसरन को पाड़ पर चढ़ाकर दीवार पर प्लास्टर कराया जा रहा था और इसी दौरान वह हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गए।
परिवार का कहना है कि यदि काम शुरू होने से पहले बिजली आपूर्ति बंद करा दी जाती तो संभवतः यह हादसा टाला जा सकता था।
परिवार का सवाल—हाईटेंशन लाइन के पास काम से पहले क्यों नहीं बंद हुई बिजली?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल विद्युत सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। हाईटेंशन लाइन के आसपास निर्माण या प्लास्टर जैसे काम करते समय पर्याप्त सुरक्षा दूरी और विद्युत आपूर्ति की स्थिति को लेकर सावधानी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
रामसरन के भाई विजयपाल का आरोप है कि लाइन में करंट होने की जानकारी के बावजूद सप्लाई बंद नहीं कराई गई।
हालांकि, हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
एक कमाने वाले के जाने से परिवार पर टूटा आर्थिक संकट
रामसरन के परिवार के लिए यह हादसा सिर्फ एक सदस्य की मौत नहीं है, बल्कि घर की आर्थिक व्यवस्था पर भी बड़ा आघात है।
परिवार के मुताबिक रामसरन ही घर के मुख्य कमाने वाले थे। राजमिस्त्री का काम करके मिलने वाली आय से ही परिवार का खर्च चलता था।
उनकी अचानक मौत के बाद पत्नी सर्वेश देवी और सात बच्चों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।
पत्नी सर्वेश देवी का रो-रोकर बुरा हाल
रामसरन की मौत की सूचना के बाद उनकी पत्नी सर्वेश देवी का सीएचसी में रो-रोकर बुरा हाल रहा।
शव के पास बैठी सर्वेश बार-बार बिलखती रहीं। पति की अचानक मौत का सदमा उनके चेहरे और शब्दों में साफ दिखाई दे रहा था।
परिवार के अनुसार, सर्वेश के सामने अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों के भविष्य की है।
उन्होंने भावुक होकर कहा, “मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई है। अब बच्चों की शादी कैसे होगी।”
उनके इस दर्द में एक साथ पति को खोने का दुख और परिवार की जिम्मेदारियों की चिंता दोनों दिखाई दीं।
छह बेटियां और एक बेटा, अब परिवार के सामने बड़ी जिम्मेदारी
रामसरन के परिवार में पत्नी सर्वेश देवी के अलावा छह बेटियां और एक बेटा है।
उनका बेटा सुचित कुमार गौतम 23 वर्ष का है। बेटियों में सुजाता 30 वर्ष, सोनी 28 वर्ष, मोनी 25 वर्ष, गौरी 20 वर्ष, अन्नू 17 वर्ष और नव्या 13 वर्ष की हैं।
परिवार के अनुसार सुजाता, सोनी और मोनी की शादी हो चुकी है। सोनी ससुराल में विवाद के चलते फिलहाल मायके में रह रही हैं।
वहीं गौरी, अन्नू और नव्या अभी अविवाहित हैं। ऐसे में परिवार के सामने पहले से मौजूद जिम्मेदारियों के बीच रामसरन की मौत ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
बच्चों के भविष्य को लेकर मां की चिंता बढ़ी
रामसरन की मौत के बाद सर्वेश देवी के सामने अपने बच्चों की जिम्मेदारी आ गई है।
बेटियों की शादी, बेटे और छोटी बेटियों की जरूरतें तथा रोजमर्रा के घरेलू खर्च अब परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
परिवार के अनुसार रामसरन की आय ही घर की आर्थिक रीढ़ थी। उनकी मौत से परिवार अचानक ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां भावनात्मक सदमे के साथ आर्थिक असुरक्षा भी सामने खड़ी है।
सुबह काम के लिए निकले थे, घर नहीं लौट सके
रविवार की सुबह रामसरन रोज की तरह काम करने निकले थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद परिवार को उनकी मौत की खबर मिलेगी।
सिमौर गांव में दीवार पर प्लास्टर का काम करते समय हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने की घटना ने उनके परिवार की पूरी जिंदगी बदल दी।
काम की तलाश में घर से निकले एक मेहनतकश व्यक्ति की इस तरह अचानक मौत ने परिजनों और परिचितों को झकझोर दिया है।
राजमिस्त्री का काम कर परिवार चलाते थे रामसरन
रामसरन लंबे समय से राजमिस्त्री का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
निर्माण कार्य से जुड़ी मजदूरी और राजमिस्त्री का काम मेहनत और जोखिम से भरा होता है। ऐसे काम में सुरक्षा व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है, विशेषकर तब जब निर्माण स्थल के आसपास विद्युत लाइन गुजर रही हो।
परिवार का आरोप है कि काम वाली जगह के पास हाईटेंशन लाइन मौजूद थी और इसके बावजूद विद्युत आपूर्ति बंद नहीं कराई गई।
हाईटेंशन लाइन के नजदीक काम कितना जोखिम भरा हो सकता है
हाईटेंशन विद्युत लाइन के आसपास किसी भी तरह का निर्माण कार्य अत्यधिक सावधानी की मांग करता है। विद्युत तार से सीधा संपर्क ही हमेशा जरूरी नहीं होता; पर्याप्त सुरक्षा दूरी न होने पर भी गंभीर विद्युत हादसा हो सकता है।
ऐसे स्थानों पर काम शुरू करने से पहले लाइन की स्थिति, कार्यस्थल की दूरी और आवश्यक सुरक्षा उपायों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
रामसरन की मौत का मामला एक बार फिर निर्माण कार्यों के दौरान विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल सामने लाता है।
परिवार ने सप्लाई बंद कराने की जरूरत पर उठाए सवाल
विजयपाल ने कहा कि यदि प्लास्टर का काम शुरू होने से पहले बिजली की सप्लाई बंद करा दी जाती तो रामसरन की जान बच सकती थी।
परिवार की ओर से लगाए गए इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस ने घटना की जानकारी लेकर मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू की है।
हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सीएचसी अलीगंज पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
हादसे के बाद रामसरन को निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अलीगंज पहुंचाया गया।
परिजन उन्हें बचाने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इसके बाद अस्पताल परिसर में परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पुलिस ने घटना की जानकारी ली
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की जानकारी ली। पुलिस की ओर से घटनाक्रम से संबंधित आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
कोतवाली अलीगंज के प्रभारी निरीक्षक रूपेश कुमार वर्मा ने बताया कि घटना के संबंध में संबंधित पक्ष की ओर से मेमो प्राप्त हुआ है। थाना स्तर से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
हादसे के बाद गांव में भी शोक का माहौल
रामसरन की मौत की खबर के बाद परिवार के साथ परिचितों और ग्रामीणों में भी शोक की स्थिति है।
एक मेहनतकश व्यक्ति की अचानक मौत से परिवार पर आई विपत्ति ने लोगों को झकझोर दिया है। परिजन जहां रामसरन को खोने के सदमे में हैं, वहीं उनके बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
विद्युत सुरक्षा को लेकर फिर सामने आया बड़ा सवाल
एटा का यह हादसा निर्माण और मरम्मत कार्यों के दौरान विद्युत सुरक्षा के महत्व की ओर ध्यान खींचता है।
खासकर ऐसे स्थानों पर जहां भवन या दीवार के बेहद नजदीक हाईटेंशन लाइन गुजर रही हो, वहां काम शुरू करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
परिवार के आरोपों की जांच के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना संबंधित विभाग और प्रशासन की कार्रवाई का विषय होगा।
एक हादसा, कई सवाल और पीछे छूट गया पूरा परिवार
रामसरन की मौत ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या कार्यस्थल पर हाईटेंशन लाइन की मौजूदगी को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती गई थी? क्या काम शुरू करने से पहले बिजली आपूर्ति बंद कराने का प्रयास किया गया था? क्या निर्माण स्थल पर आवश्यक सुरक्षा दूरी और व्यवस्था मौजूद थी?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आ सकते हैं। फिलहाल इतना जरूर है कि रविवार सुबह काम करने निकले 55 वर्षीय रामसरन अब अपने परिवार के बीच नहीं हैं और उनके पीछे पत्नी तथा सात बच्चों का परिवार रह गया है।
सर्वेश देवी के सामने अब बच्चों की पूरी जिम्मेदारी
पति की मौत के बाद सर्वेश देवी के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार को संभालने की है। छह बेटियों और एक बेटे वाले परिवार में कई बच्चों की जिम्मेदारियां अभी बाकी हैं।
छोटी बेटियां अन्नू और नव्या अभी कम उम्र की हैं, जबकि गौरी भी अविवाहित हैं। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति आने वाले समय में किस तरह संभलेगी, यह एक बड़ा सवाल है।
रामसरन के परिजनों के लिए यह समय भावनात्मक सदमे के साथ भविष्य की अनिश्चितता से जूझने का भी है।
मेहनत से परिवार पालने वाले रामसरन की अचानक मौत ने छोड़ा गहरा दर्द
रामसरन रोज की मेहनत से अपने परिवार का पेट पालते थे। रविवार की सुबह भी वह इसी उम्मीद से काम पर पहुंचे थे कि दिनभर मेहनत करके घर लौटेंगे। लेकिन हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने के बाद उनकी जिंदगी वहीं थम गई।
परिवार के अनुसार, यदि बिजली आपूर्ति बंद होती तो शायद यह हादसा टल सकता था। यह आरोप अब जांच का विषय है, लेकिन घटना ने विद्युत लाइनों के आसपास काम करने वाले मजदूरों और निर्माण कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत जरूर सामने रखी है।
अलीगंज के सिमौर गांव में हुआ यह हादसा एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गया है। पत्नी सर्वेश देवी के आंसू और बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी चिंता इस त्रासदी की गंभीरता को बयां करती है। पुलिस ने मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या किसी स्तर पर लापरवाही की भूमिका रही।

