Mathura में 11 हजार वोल्ट की टूटी लाइन बनी मौत का फंदा, पिता के लिए चाय लेकर जा रहा 15 साल का विवेक करंट की चपेट में आया; बचाने दौड़ा गुलाब भी नहीं बचा
Mathura के सुरीर कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक विद्युत हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। नगला औहावा गांव के समीप खेत में टूटकर पड़े 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के तार ने एक किशोर और एक युवक की जान ले ली। हादसे में नगला औहावा निवासी 15 वर्षीय विवेक और बैकुंठपुर निवासी करीब 20 वर्षीय गुलाब की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से हुई थी। विवेक अपने पिता के लिए चाय लेकर खेत की ओर जा रहा था। उसे क्या पता था कि खेत में पड़ा एक टूटा हुआ बिजली का तार उसकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन जाएगा। तार पर पैर पड़ते ही वह करंट की चपेट में आ गया और चीखने लगा।
उसकी चीख सुनकर पड़ोसी खेत में चारा लेने गया गुलाब उसे बचाने के लिए दौड़ा। लेकिन मदद की कोशिश करते हुए वह भी उसी जानलेवा तार की चपेट में आ गया। देखते ही देखते दोनों की मौत हो गई।
पिता के लिए चाय लेकर निकला था विवेक, रास्ते में मिला मौत का तार
नगला औहावा निवासी रामकिशन बघेल का 15 वर्षीय बेटा विवेक गुरुवार सुबह घर से खेत की ओर निकला था। वह अपने पिता के लिए चाय लेकर जा रहा था।
विवेक की उम्र अभी केवल 15 साल थी। परिवार के लिए वह बेहद महत्वपूर्ण था और पिता के लिए चाय लेकर खेत तक जाना उसके लिए रोजमर्रा की सामान्य जिम्मेदारी जैसी ही बात थी।
लेकिन खेत के रास्ते में 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन का टूटा तार पड़ा था।
बताया गया कि विवेक का पैर जैसे ही टूटे हुए तार पर पड़ा, वह तेज करंट की चपेट में आ गया।
एक चीख और फिर मच गया हड़कंप
बिजली के करंट की चपेट में आते ही विवेक चीख उठा।
उसकी आवाज आसपास के खेतों तक पहुंची। उसी समय बैकुंठपुर निवासी करीब 20 वर्षीय गुलाब पड़ोसी खेत में चारा लेने गया हुआ था।
विवेक को परेशानी में देखकर गुलाब उसे बचाने के लिए दौड़ा।
उस समय शायद उसे यह अंदाजा नहीं था कि जमीन पर पड़ा बिजली का तार अभी भी जानलेवा करंट से भरा हुआ है।
गुलाब ने किशोर को बचाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उसका पैर भी उसी विद्युत तार के संपर्क में आ गया।
बचाने गया गुलाब, खुद भी करंट की चपेट में आया
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यही रहा कि एक युवक दूसरे को बचाने के लिए आगे आया और खुद भी जान गंवा बैठा।
11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन के संपर्क में आने के बाद दोनों करंट की चपेट में आ गए।
मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
कुछ ही देर पहले खेत की ओर चाय लेकर निकला विवेक और चारा लेने गया गुलाब अब अपने परिवारों के बीच वापस नहीं लौटने वाले थे।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुटने लगे।
दो गांवों में पसरा मातम
हादसे की खबर जैसे ही नगला औहावा और बैकुंठपुर गांव में पहुंची, दोनों स्थानों पर मातम छा गया।
परिवारों को जब घटना की जानकारी मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
एक ओर 15 वर्षीय विवेक की मौत ने उसके परिवार को तोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर गुलाब की आकस्मिक मृत्यु ने उसके घर के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक दोनों परिवारों के लिए यह ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
विवेक था पिता की इकलौती संतान
हादसे में जान गंवाने वाले 15 वर्षीय विवेक को लेकर परिवार का दुख और भी गहरा है।
बताया गया कि विवेक अपने पिता रामकिशन बघेल की इकलौती संतान था।
जिस बच्चे के भविष्य को लेकर परिवार ने सपने देखे होंगे, जिसकी पढ़ाई और जिंदगी को लेकर उम्मीदें रही होंगी, उसकी जिंदगी महज 15 वर्ष की उम्र में एक बिजली के तार ने खत्म कर दी।
परिवार के लिए यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि पूरी जिंदगी बदल देने वाली त्रासदी बन गई है।
गुलाब भी परिवार का सहारा बताया जा रहा
दूसरी ओर बैकुंठपुर निवासी करीब 20 वर्षीय गुलाब भी अपने परिवार के लिए महत्वपूर्ण था।
वह खेतों से जुड़ा काम करता था और घटना के समय पड़ोसी खेत में चारा लेने गया था।
विवेक की चीख सुनकर वह मदद के लिए आगे बढ़ा था।
लेकिन जिस व्यक्ति ने संकट में फंसे किशोर को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की, वही प्रयास उसके लिए घातक साबित हुआ।
11 हजार वोल्ट की लाइन कितनी खतरनाक होती है?
11 हजार वोल्ट यानी 11 kV की विद्युत लाइन उच्च वोल्टेज वाली लाइन होती है।
ऐसी लाइन के संपर्क में आना बेहद खतरनाक हो सकता है। केवल तार को सीधे छूना ही जोखिमपूर्ण नहीं है; परिस्थितियों के अनुसार विद्युत प्रवाह जमीन या आसपास की वस्तुओं तक भी पहुंच सकता है।
यही वजह है कि टूटे हुए उच्च वोल्टेज तार के आसपास जाना बेहद खतरनाक माना जाता है।
ऐसे तार को देखकर उसे हटाने, पैर से किनारे करने या किसी व्यक्ति को सीधे हाथ से खींचने की कोशिश करना भी जानलेवा हो सकता है।
टूटे तार के आसपास क्यों नहीं जाना चाहिए?
बिजली का तार जमीन पर पड़ा हो तो दूर से देखने पर वह मृत या निष्क्रिय लग सकता है।
लेकिन यदि विद्युत आपूर्ति चालू हो तो वह अत्यंत खतरनाक हो सकता है।
कई बार जमीन पर पड़े तार के आसपास भी विद्युत प्रवाह का जोखिम रहता है। विशेष रूप से नमी या गीली जमीन की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है।
इसलिए ऐसे मामलों में सबसे जरूरी कदम लोगों को उस स्थान से दूर रखना और तुरंत बिजली विभाग को सूचना देना होता है।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची
घटना की जानकारी मिलते ही सुरीर पुलिस सक्रिय हुई।
थानाध्यक्ष अरुण कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस की ओर से विद्युत विभाग को भी मामले की जानकारी दी गई है, ताकि टूटे हुए तार और बिजली आपूर्ति से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सके।
विद्युत विभाग को भी दी गई सूचना
हादसे के बाद विद्युत विभाग को घटना की जानकारी दी गई।
अब यह जांच का विषय है कि 11 हजार वोल्ट की लाइन किस कारण से टूटी और तार कितनी देर तक खेत में पड़ा रहा।
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विद्युत विभाग को इस लाइन में किसी खराबी या टूटने की जानकारी पहले मिली थी या नहीं।
यदि किसी तरह की पूर्व शिकायत हुई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है।
ग्रामीणों में फूटा गुस्सा
दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्युत लाइनों के निरीक्षण और रखरखाव में पर्याप्त गंभीरता नहीं बरती जाती।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते टूटी लाइन की जानकारी हो जाती और विद्युत आपूर्ति बंद कर दी जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और किसी विभागीय लापरवाही की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में खेतों के बीच से गुजरने वाली विद्युत लाइनों की नियमित जांच होनी चाहिए।
खासकर 11 हजार वोल्ट जैसी उच्च क्षमता वाली लाइनों के मामले में थोड़ी सी तकनीकी खराबी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
ग्रामीणों की मांग है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई न हो, बल्कि क्षेत्र की सभी संवेदनशील विद्युत लाइनों का निरीक्षण भी कराया जाए।
क्या समय पर लाइन बंद होती तो बच जाती दो जानें?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि टूटे हुए तार के बारे में बिजली विभाग को कब जानकारी हुई और बिजली आपूर्ति कितनी देर तक जारी रही।
यदि लाइन टूटने के बाद तत्काल विद्युत आपूर्ति बंद हो जाती तो जमीन पर पड़ा तार इतना खतरनाक नहीं रहता।
लेकिन यह तय करने के लिए तकनीकी जांच आवश्यक है कि लाइन कब टूटी, किस कारण से टूटी और उसे बंद करने में कितना समय लगा।
इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होगा।
ग्रामीण इलाकों में बिजली की लाइनों की निगरानी क्यों जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कई लाइनें खेतों के बीच से होकर गुजरती हैं।
इन लाइनों के नीचे किसान काम करते हैं, पशु चरते हैं और ग्रामीण नियमित रूप से आते-जाते हैं।
यदि तार टूटकर जमीन पर गिर जाए तो यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों के लिए हर टूटे तार को संभावित खतरे के रूप में देखना जरूरी है और बिजली विभाग के लिए ऐसी शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना उतना ही महत्वपूर्ण है।
बिजली हादसों में बचाव के दौरान भी बढ़ जाता है खतरा
मथुरा की घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि गुलाब विवेक को बचाने के लिए आगे आया था।
किसी व्यक्ति को बिजली के करंट में फंसा देखकर स्वाभाविक रूप से लोग उसे बचाने दौड़ते हैं।
लेकिन यदि विद्युत आपूर्ति जारी हो तो बिना सावधानी के ऐसा करना बचाव करने वाले व्यक्ति के लिए भी जानलेवा हो सकता है।
इसलिए विद्युत दुर्घटना की स्थिति में पहले बिजली की सप्लाई बंद कराना जरूरी है।
जब तक लाइन सुरक्षित न हो, लोगों को घटनास्थल से दूर रखना चाहिए।
एक हादसा, दो परिवारों की दुनिया उजड़ गई
विवेक के परिवार ने अपने 15 वर्षीय बेटे को खो दिया।
गुलाब के परिवार ने करीब 20 वर्षीय युवक को खो दिया।
दोनों की मौत एक ही दुर्घटना में हुई, लेकिन दोनों परिवारों पर इसका असर जिंदगी भर रहेगा।
एक तरफ बेटे के भविष्य के सपने अचानक खत्म हो गए, दूसरी तरफ परिवार के सहारे की मौत ने घर की जिम्मेदारियों को भी बदल दिया।
गांव में इन दोनों परिवारों के घरों पर लोगों का पहुंचना और सांत्वना देना जारी रहा।
खेत में चारा लेने गया था गुलाब
गुलाब किसी असामान्य गतिविधि में नहीं था।
वह पड़ोसी खेत में चारा लेने गया था।
उसी दौरान उसने विवेक की चीख सुनी और मदद के लिए आगे आया।
यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि खेतों और ग्रामीण रास्तों में विद्युत लाइनों की स्थिति केवल बिजली विभाग का तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि सीधे आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
परिवारों को राहत और जांच दोनों का इंतजार
हादसे के बाद अब दोनों परिवारों के सामने भावनात्मक दुख के साथ-साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी है।
ऐसी घटनाओं के बाद परिवारों को सरकारी स्तर पर उपलब्ध राहत और सहायता का लाभ मिलना महत्वपूर्ण होता है।
साथ ही हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
विद्युत सुरक्षा को लेकर स्थानीय स्तर पर उठने चाहिए ठोस कदम
मथुरा के ग्रामीण इलाकों में इस घटना के बाद बिजली विभाग के सामने कई सवाल हैं।
पुरानी विद्युत लाइनों की स्थिति क्या है?
कितनी लाइनें ऐसी हैं जिनके तार कमजोर हो चुके हैं?
कितने स्थानों पर खंभे या तार खेतों और रास्तों के बेहद करीब हैं?
क्या शिकायतों के लिए स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था प्रभावी है?
इन सवालों पर काम करना जरूरी है ताकि अगली बार किसी टूटे हुए तार को लेकर खबर किसी परिवार की मौत के बाद न बने।
बच्चों को भी बिजली के खतरे के बारे में जागरूक करना जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का खेतों और खुले स्थानों में खेलना सामान्य है।
ऐसे में बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि जमीन पर पड़ा बिजली का तार कभी नहीं छूना चाहिए।
यदि कोई तार टूटकर गिरा दिखाई दे तो उसके पास जाने के बजाय तुरंत किसी बड़े व्यक्ति को सूचना देनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि करंट की चपेट में आए व्यक्ति को सीधे हाथ से पकड़कर खींचने की कोशिश न की जाए, जब तक बिजली की आपूर्ति सुरक्षित रूप से बंद न हो जाए।
मथुरा हादसा छोड़ गया कई सवाल
नगला औहावा के समीप हुआ यह हादसा केवल दो मौतों की घटना नहीं है।
इसने ग्रामीण बिजली व्यवस्था, लाइन रखरखाव, शिकायतों पर कार्रवाई और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं और जांच शुरू कर दी गई है।
अब विद्युत विभाग की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि 11 हजार वोल्ट की लाइन क्यों टूटी और जमीन पर पड़े तार के संबंध में सुरक्षा व्यवस्था क्या थी।
जांच के साथ जरूरी है भविष्य की सुरक्षा
दो परिवारों को हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं है।
लेकिन अगर इस घटना के बाद संबंधित क्षेत्र की विद्युत लाइनों की व्यापक जांच होती है, खतरनाक तारों और खंभों की मरम्मत की जाती है तथा शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत होती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
विवेक और गुलाब की मौत ने ग्रामीण बिजली सुरक्षा की उस चुनौती को सामने ला दिया है जिसे नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है।

