Bareilly में मृतक दरोगा के नाम से फर्जी Instagram ID, पुलिस पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाला युवक गिरफ्तार
News-Desk
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BNS, IT Act, आकाश यादव, उत्तर प्रदेश, क्राइम न्यूज़, दीपक कौशिक, फर्जी इंस्टाग्राम आईडी, बरेली, बरेली पुलिस, बरेली साइबर क्राइम, साइबर अपराध, साइबर क्राइम थानाBareilly में साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया से जुड़े एक मामले में 28 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने कुछ माह पहले सड़क हादसे में जान गंवा चुके उपनिरीक्षक आकाश यादव के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हुए फर्जी Instagram ID बनाई और उसके जरिए बरेली पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक एवं अभद्र टिप्पणियां पोस्ट कीं।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीपक कौशिक के रूप में हुई है। वह मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है और वर्तमान में बरेली में रह रहा था। पुलिस ने उसे झुमका चौराहे से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से कथित तौर पर घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
मामला सामने आने के बाद पहले अज्ञात Instagram यूजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस कथित फर्जी अकाउंट के पीछे मौजूद व्यक्ति तक पहुंची। अब पुलिस ने मामले में आईटी एक्ट की अतिरिक्त धाराओं के साथ BNS की धाराएं भी बढ़ाई हैं।
मृतक दरोगा आकाश यादव की फोटो लगाकर बनाई गई थी ID
पुलिस जांच में सामने आया कि जिस Instagram अकाउंट से आपत्तिजनक पोस्ट और कमेंट किए जा रहे थे, उसमें मृतक उपनिरीक्षक आकाश यादव की फोटो लगाई गई थी। आकाश यादव पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात रहे थे और उनकी पोस्टिंग अयोध्या में भी रही थी।
आकाश यादव की कुछ महीने पहले सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके नाम और तस्वीर का कथित तौर पर सोशल मीडिया अकाउंट बनाने में इस्तेमाल किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी वास्तविक पहचान के बजाय ‘दीपक जाट बरेली’ नाम से Instagram ID तैयार की थी।
इसी अकाउंट के माध्यम से बरेली पुलिस के खिलाफ अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस गतिविधि से विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
14 सितंबर 2026 को सामने आया था मामला
यह पूरा मामला 14 सितंबर 2026 को पुलिस के संज्ञान में आया। उस समय उपनिरीक्षक अनूप सिंह ने अज्ञात Instagram यूजर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर बरेली के कोतवाली थाने में आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। शुरुआत में पुलिस के सामने आरोपी की पहचान स्पष्ट नहीं थी, इसलिए मामला अज्ञात सोशल मीडिया यूजर के खिलाफ दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जांच को साइबर क्राइम थाने में स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट, उससे जुड़ी गतिविधियों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
तकनीकी जांच के बाद आरोपी तक पहुंची पुलिस
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में आरोपी की पहचान करना अक्सर केवल सोशल मीडिया प्रोफाइल देखने तक सीमित नहीं रहता। पुलिस को अकाउंट के पीछे इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच करनी पड़ती है।
इस मामले में भी साइबर क्राइम पुलिस ने कथित फर्जी Instagram अकाउंट की जांच की। जांच के दौरान पुलिस आरोपी दीपक कौशिक तक पहुंची। इसके बाद उसे बृहस्पतिवार को झुमका चौराहे से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने उसके पास से वह मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिन्हें घटना में इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के आधार पर पुलिस मामले से जुड़े अन्य तकनीकी साक्ष्यों को भी सामने ला सकती है।
पूछताछ में सामने आई आरोपी की पहचान और नौकरी
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह बीएससी पास है। वह बरेली के मीरगंज स्थित डीबीओएल शुगर मिल में केमिकल एनालिसिस अधिकारी के रूप में काम करता है।
आरोपी की उम्र 28 वर्ष बताई गई है। वह मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में बरेली में रह रहा था।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी अकाउंट बनाने और उस पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने के पीछे आरोपी का उद्देश्य क्या था। हालांकि, किसी आरोपी द्वारा पूछताछ में कही गई बातों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
‘दीपक जाट बरेली’ नाम से बनाया गया था अकाउंट
जांच में पुलिस के सामने एक और अहम जानकारी आई। आरोप है कि दीपक कौशिक ने ‘दीपक जाट बरेली’ नाम से Instagram ID बनाई थी। इस अकाउंट पर मृतक उपनिरीक्षक आकाश यादव की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।
इसके बाद इसी अकाउंट से बरेली पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां पोस्ट की गईं। पुलिस के अनुसार, इस वजह से मामला केवल फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की छवि से भी जुड़ गया।
मृतक पुलिसकर्मी की तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने से मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई। पुलिस अब सोशल मीडिया गतिविधियों के डिजिटल रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
पहले धारा 67 IT Act में दर्ज हुआ था मुकदमा
जब मामला पहली बार पुलिस के सामने आया था, तब अज्ञात Instagram यूजर के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67 में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान आरोपी की पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में और धाराएं जोड़ी हैं।
अब पुलिस ने धारा 66C आईटी एक्ट के साथ धारा 319(2)/356 BNS भी बढ़ाई है।
आईटी एक्ट की धारा 66C पहचान संबंधी डिजिटल जानकारी के दुरुपयोग से संबंधित है। वहीं पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं को भी मामले में शामिल किया है। इन धाराओं के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया साक्ष्यों और जांच के आधार पर चलेगी।
सोशल मीडिया पर किसी और की पहचान इस्तेमाल करने पर फिर उठे सवाल
यह मामला सोशल मीडिया पर किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान, तस्वीर या नाम के कथित दुरुपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण है। Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति की तस्वीर लगाकर दूसरे नाम से अकाउंट चलाना केवल एक सोशल मीडिया गतिविधि नहीं रह जाता, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार यह कानूनी विवाद का विषय भी बन सकता है।
इस मामले में पुलिस का आरोप है कि मृतक दरोगा की तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान बनाई गई और उसके माध्यम से पुलिस के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई। इसलिए जांच में अकाउंट बनाने वाले व्यक्ति की पहचान के साथ-साथ यह भी देखा जा रहा है कि अकाउंट से कौन-कौन सी गतिविधियां की गईं और उनका डिजिटल रिकॉर्ड क्या है।
मृतक पुलिसकर्मी के नाम और फोटो के इस्तेमाल से बढ़ी संवेदनशीलता
आकाश यादव की कुछ महीने पहले सड़क हादसे में मृत्यु हो चुकी थी। ऐसे में उनके नाम और फोटो का कथित रूप से इस्तेमाल कर सोशल मीडिया अकाउंट चलाए जाने ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
पुलिस के मुताबिक, फर्जी अकाउंट पर बरेली पुलिस के खिलाफ अभद्र कमेंट किए गए थे। शिकायत के बाद जब पुलिस ने इसकी जांच शुरू की तो अकाउंट की वास्तविकता और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश की गई।
अब आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बरामद मोबाइल फोन और दोनों सिम कार्ड को जांच का हिस्सा बनाएगी। डिजिटल डिवाइस से मिलने वाली जानकारी यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती है कि संबंधित अकाउंट कब बनाया गया, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया और कथित आपत्तिजनक पोस्ट किस समय और किस डिवाइस से की गईं।
साइबर क्राइम पुलिस की जांच में आगे क्या होगा?
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड से संबंधित तकनीकी जानकारी की जांच कर सकती है। साथ ही कथित Instagram अकाउंट की गतिविधियों का रिकॉर्ड भी मामले में साक्ष्य के तौर पर देखा जाएगा।
पुलिस के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि फर्जी अकाउंट के जरिए कितनी पोस्ट या टिप्पणियां की गईं, उनका स्वरूप क्या था और अकाउंट का संचालन किस अवधि तक किया गया। इन सभी तथ्यों के आधार पर आगे की विवेचना पूरी की जाएगी।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी दीपक कौशिक को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में पहले दर्ज धारा 67 के अलावा 66C आईटी एक्ट तथा 319(2)/356 BNS की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

