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Muzaffarnagar साइबर पुलिस की बड़ी कामयाबी: 7 बड़ी ठगी होने से रोकी, 5 करोड़ बचाए, 1.25 करोड़ की रकम फ्रीज

Muzaffarnagar में बढ़ते साइबर अपराध के बीच मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस ने बड़ी कामयाबी का दावा किया है। साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता और रोकथाम अभियान के दौरान पुलिस टीम ने अब तक 7 बड़ी साइबर ठगी की घटनाओं को समय रहते होने से रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के मुताबिक, इन कार्रवाइयों के चलते आम लोगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की करीब 5 करोड़ रुपये की रकम साइबर अपराधियों के हाथों में जाने से बचाई गई।

इतना ही नहीं, साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों की जांच और तकनीकी विश्लेषण के बाद 4 बैंक खातों में मौजूद कुल 1 करोड़ 25 लाख रुपये की धनराशि को होल्ड/फ्रीज कराया गया है।

पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

अक्टूबर को साइबर जागरूकता माह के रूप में चल रहा अभियान

उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आम नागरिकों को डिजिटल अपराधों से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में मेरठ जोन और सहारनपुर परिक्षेत्र के अधिकारियों के निर्देशन तथा मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण में साइबर थाना पुलिस की ओर से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी अपराध सुभाषचंद के मार्गदर्शन और साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के नेतृत्व में टीम साइबर अपराधों को रोकने के साथ-साथ लोगों को इनके नए तरीकों के बारे में भी जानकारी दे रही है।

अक्टूबर माह में लोगों को डिजिटल फ्रॉड, फिशिंग, मालवेयर, फर्जी ऐप, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

7 बड़ी साइबर ठगी, समय रहते पुलिस ने रोकी

मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस के अनुसार, विशेष अभियान के दौरान अब तक 7 ऐसे बड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई की गई, जिनमें लोगों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों को आर्थिक नुकसान पहुंचने की आशंका थी।

पुलिस का दावा है कि त्वरित कार्रवाई और जागरूकता के कारण करीब 5 करोड़ रुपये की धनराशि साइबर अपराधियों तक पहुंचने से बच गई।

इस कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह के साथ कंप्यूटर ऑपरेटर ज्ञान सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर अतुल सिंह और आरक्षी अभिषेक चौहान की विशेष भूमिका बताई गई है।

पुलिस के मुताबिक टीम ने संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, तकनीकी जांच और समय पर कार्रवाई करते हुए इन मामलों में प्रभावी कदम उठाए।

चार बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज

साइबर अपराधी ठगी की रकम हासिल करने के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों की जांच के दौरान मुजफ्फरनगर साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर चार बैंक खातों को होल्ड/फ्रीज कराया।

इन चार खातों में कुल 1 करोड़ 25 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रकम को होल्ड कराया, जिससे ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर किए जाने की संभावना पर रोक लगाई जा सके।

यह कार्रवाई इस बात का भी संकेत देती है कि साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद शुरुआती समय कितना महत्वपूर्ण होता है।

व्यापारियों और कंपनियों को खास तौर पर बनाया जा रहा निशाना

मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों का एक तरीका विशेष रूप से व्यापारिक प्रतिष्ठानों, कंपनियों, होटल, फर्म और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाना है।

इस तरह की ठगी में अपराधी किसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक, मालिक या प्रबंधन से जुड़े व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बाद कर्मचारी को तत्काल भुगतान, बैंक ट्रांसफर या किसी अन्य वित्तीय कार्रवाई का निर्देश दिया जाता है।

मैसेज या कॉल देखने वाले कर्मचारी को ऐसा लग सकता है कि निर्देश वास्तव में उसके वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया है। जल्दबाजी में बिना सत्यापन भुगतान करने पर रकम सीधे साइबर अपराधियों के हाथ में जा सकती है।

व्यापारी संगठनों और अकाउंटेंट्स को दी गई ट्रेनिंग

इस खतरे को देखते हुए साइबर थाना पुलिस ने जिले के प्रमुख व्यापारी संगठनों, व्यापारियों, प्रतिष्ठान संचालकों और अकाउंटेंट्स के साथ विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

इन कार्यक्रमों में बताया गया कि संदिग्ध कॉल और संदेशों की पहचान कैसे की जाए और किसी भी वित्तीय भुगतान से पहले स्वतंत्र रूप से सत्यापन क्यों जरूरी है।

पुलिस ने व्यापारियों और कर्मचारियों से कहा कि केवल किसी मैसेज, सोशल मीडिया अकाउंट या फोन कॉल के आधार पर वित्तीय निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए, भले ही संदेश भेजने वाला व्यक्ति किसी बड़े अधिकारी या मालिक के नाम का इस्तेमाल कर रहा हो।

‘वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर आए मैसेज पर भी तुरंत भुगतान न करें’

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक, मालिक या प्रबंधन के नाम से यदि अचानक तत्काल भुगतान या बैंक ट्रांसफर का निर्देश मिलता है तो पहले स्वतंत्र माध्यम से उसकी पुष्टि की जाए।

मसलन, यदि किसी अधिकारी के नाम से सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भुगतान का निर्देश आता है तो उसी चैट पर भरोसा करके पैसा ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित व्यक्ति से उसके आधिकारिक नंबर या किसी दूसरे विश्वसनीय माध्यम से संपर्क कर पुष्टि करनी चाहिए।

यही छोटी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

साइबर ठगी हो तो 1930 पर तुरंत करें शिकायत

मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस ने आम लोगों, व्यापारियों, कंपनियों और सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अपील की है कि साइबर ठगी होने या ठगी का प्रयास सामने आने पर तुरंत इसकी सूचना दी जाए।

इसके लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।

पुलिस का संदेश साफ है—साइबर ठगी के बाद चुप बैठने या शिकायत में देरी करने के बजाय जितनी जल्दी संभव हो, पुलिस को सूचना दें।

एक छोटी गलती से बच सकता है लाखों का नुकसान

डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। पहले जहां फर्जी बैंक कॉल या लिंक के जरिए ठगी आम थी, वहीं अब अपराधी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग करके कंपनियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं।

ऐसे मामलों में तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ कर्मचारी और खाताधारक की सतर्कता भी बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान या असामान्य वित्तीय निर्देश पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय उसकी पुष्टि करना सबसे अहम सुरक्षा उपायों में से एक है।

मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस की कार्रवाई से यह साफ है कि साइबर ठगी के मामलों में जागरूकता और समय पर कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है। पुलिस के अनुसार 7 बड़ी ठगी की घटनाओं को समय रहते रोककर करीब 5 करोड़ रुपये बचाए गए और चार खातों में मौजूद 1.25 करोड़ रुपये होल्ड/फ्रीज कराए गए। आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि किसी भी वित्तीय निर्देश पर बिना स्वतंत्र सत्यापन के भुगतान न करें और ठगी या ठगी के प्रयास की स्थिति में तुरंत 1930 पर सूचना दें।

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