Muzaffarnagar में NHM संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का धरना शुरू, मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
Muzaffarnagar NHM संविदा कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अब खुलकर आंदोलन के मैदान में उतर आए हैं। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आह्वान पर मुजफ्फरनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने धरना शुरू कर दिया है। धरने में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संविदा कर्मचारी शामिल हुए और उन्होंने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
धरने के दौरान कर्मचारियों ने अपने लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को उठाया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
आंदोलन को स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अलग-अलग संगठनों का भी समर्थन मिला। राजकीय नर्सिंग ऑफिसर संगठन, आशा संगठन, डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन और मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने धरनास्थल पर पहुंचकर संविदा कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर जुटे सैकड़ों कर्मचारी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आह्वान पर मुजफ्फरनगर में शुरू हुए इस धरने में सैकड़ों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि वे अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं।
धरने पर मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी सेवाओं के अनुरूप अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। कर्मचारियों की ओर से यह भी कहा गया कि मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर में कर्मचारियों की मौजूदगी के कारण स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न संगठनों की सक्रियता भी दिखाई दी।
राजकीय नर्सिंग ऑफिसर संगठन ने दिया खुला समर्थन
धरने को राजकीय नर्सिंग ऑफिसर संगठन की अध्यक्ष श्रीमती सरिता सिंह ने समर्थन दिया। उन्होंने धरनास्थल पर पहुंचकर कहा कि राजकीय नर्सिंग ऑफिसर संगठन पूरी तरह से एनएचएम संविदा कर्मचारियों के साथ खड़ा है।
उनका समर्थन आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले कर्मचारियों और संगठनों के बीच इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई दे रही है।
सरिता सिंह ने संविदा कर्मचारियों के पक्ष में आवाज उठाते हुए उनके आंदोलन को समर्थन देने का आह्वान किया।
आशा संगठन ने भी कहा—संविदा कर्मचारियों के साथ खड़े हैं
धरने को आशा संगठन की जिलाध्यक्ष निर्मला चौधरी ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि आशा संगठन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ हाथ से हाथ मिलाकर खड़ा है।
निर्मला चौधरी ने संविदा कर्मचारियों की सेवा अवधि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एनएचएम के अनेक संविदा कर्मचारी 15-15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके मुताबिक इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद सरकारों की ओर से कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वेतन वृद्धि नहीं होने का मुद्दा भी कर्मचारियों के लिए गंभीर है। उनके अनुसार वर्षों तक सेवाएं देने के बाद भी वेतन में अपेक्षित वृद्धि नहीं होना कर्मचारियों के साथ शोषण की स्थिति पैदा करता है।
15 साल से सेवा, फिर भी नियमितीकरण का इंतजार
धरने के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दों में लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों का नियमितीकरण रहा। कर्मचारियों और उनके समर्थन में पहुंचे संगठनों का कहना है कि कई कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं में योगदान दे रहे हैं।
आशा संगठन की जिलाध्यक्ष निर्मला चौधरी ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 15-15 साल तक सेवाएं देने के बाद भी संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है।
कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के साथ-साथ वेतन वृद्धि भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। धरने में इस बात पर जोर दिया गया कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन ने भी आंदोलन में उतरने की चेतावनी दी
धरने को डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगें जायज हैं और उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।
मनोज त्यागी ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो डिप्लोमा एसोसिएशन और फार्मासिस्ट संगठन भी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठेंगे।
उनके इस बयान से संकेत मिला कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन को अन्य स्वास्थ्य संगठनों का भी समर्थन मिल सकता है।
मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन भी समर्थन में आया
धरनास्थल पर मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पाकेश कुमार, स्टेनो भी पहुंचे और आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया।
उन्होंने भी कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगें जायज हैं और उनका जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए।
इस तरह धरने में केवल एनएचएम संविदा कर्मचारियों की भागीदारी नहीं रही, बल्कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर की।
डा. सचिन जैन ने किया धरने का संचालन
धरने का सफल संचालन डा. सचिन जैन, जिलाध्यक्ष, एनएचएम संगठन द्वारा किया गया। उन्होंने आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
धरने के दौरान बड़ी संख्या में चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मचारी और संगठन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई और आंदोलन जारी रखने की बात कही।
जिला महिला चिकित्सालय से लेकर सीएचसी-पीएचसी तक के कर्मचारी शामिल
मुजफ्फरनगर में आयोजित इस धरने में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े संविदा कर्मचारी शामिल हुए। जिला महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय पुरुष के साथ-साथ जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी भी धरने में पहुंचे।
इसके अलावा नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल रहे।
इससे धरने का दायरा जिले के अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों तक दिखाई दिया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि संविदा कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में भी असंतोष और चिंता मौजूद है।
धरने में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
धरने में डा. फैसल सिद्दीकी, डा. राकेश बंसल, डा. शमशेर, तंजीम, सचिन कुमार, गौरव चौधरी, डा. रमन, डा. प्रीति गर्ग, डा. बलजीत कौर, अविनाश भारद्वाज, हसरत अली, डा. अनिल कुमार, डा. इन्दू कटारिया, मदन कुमार, संध्या शर्मा, डा. प्रीति गर्ग, शोभित, ओम कुमार, संदीप धीमान, अतुल भारद्वाज, डा. बबिता, डा. इफ्तिखार अहमद, अंकित कुमार, संजय कुमार, राकेश कुमार और रवि धीमान समेत अनेक कर्मचारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
इसके साथ ही श्रीमती डिम्पल, देवेन्द्र कुमार, अश्वनी कुमार, प्रवीण पाल, डा. सुदेश वर्मा, डा. सुधा, अरविन्द बालियान, मणीकान्त त्यागी, डा. आमिर, रोहित एलटी, जुनैद, सानतनु सोम, विपिन कुमार एलटी, रूचिर एसटीएलएस, विपुल कुमार, आकाश, छाया, गौरव कुमार, रिजवान, अश्वनी कुमार, सध्या शर्मा, अनुज कुमार, नीलम त्यागी, अमर दीप, अंगद प्रसाद, मोहित कुमार, रोबिन शर्मा, अरूण मावी और अशोक कुमार आदि भी धरने में शामिल रहे।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
धरने पर कर्मचारियों की ओर से साफ संदेश दिया गया कि उनकी मांगों पर समाधान होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को उठाया और संबंधित स्तर पर जल्द कार्रवाई की मांग की।
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में उनके नियमितीकरण और वेतन वृद्धि जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
आंदोलन को मिले विभिन्न कर्मचारी संगठनों के समर्थन के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।

