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12 हज़ार साल की नींद टूटते ही अफ्रीका दहला: Ethiopia के हेली गूबी ज्वालामुखी का ऐतिहासिक विस्फोट, राख यमन-ओमान से भारत तक पहुँची

अफ्रीका के अफार क्षेत्र में रविवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने न सिर्फ Ethiopia बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया को भी चौंका दिया। लगभग 12,000 साल बाद पहली बार शांत पड़े हेली गूबी ज्वालामुखी ने अचानक ताकतवर विस्फोट किया। यह विस्फोट इतना तीव्र था कि राख और धुएं का स्तंभ 15 किलोमीटर ऊंचाई तक उठ गया और कुछ ही घंटों में लाल सागर पार कर यमन और ओमान तक फैल गया।

इस Ethiopia volcano eruption की शक्ति इतनी अप्रत्याशित थी कि वैज्ञानिकों के पास इस ज्वालामुखी का कोई आधुनिक रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं था। फिर भी, सबसे राहत की बात यह रही कि इथियोपिया के स्थानीय क्षेत्रों से किसी भी जनहानि की सूचना नहीं मिली है।

हालांकि, यमन और ओमान में सरकार ने हवाई चेतावनी जारी करते हुए खासकर अस्थमा या सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है।


राख का बादल पूरे क्षेत्र पर हावी—हवाई उड़ानों पर असर, भारत ने भी अलर्ट बढ़ाया

हेली गूबी ज्वालामुखी से निकली राख का गुबार इतना विशाल है कि आसमान में फैला यह काला बादल अब अंतरराष्ट्रीय उड्डयन मार्गों के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम से लिए गए डेटा के मुताबिक—

  • कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को reroute किया गया

  • कई ने अपनी ऊंचाई और मार्ग बदल दिए

  • और कुछ उड़ानें रद्द भी करनी पड़ीं

भारत के ऊपर भी राख पहुंचने की आशंका बनी है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और जयपुर जैसे क्षेत्रों के ऊपर के वायुमंडल पर विशेष नजर रखी जा रही है।

कोच्चि हवाई अड्डे से उड़ने वाली दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सोमवार को सीधे-सीधे इस volcanic ash असर के चलते रद्द कर दी गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार उड़ान के दौरान ज्वालामुखीय राख का कण—

  • इंजन के टर्बाइन को नुकसान पहुंचाता है

  • विंडशील्ड को खुरदरा बना सकता है

  • और नेविगेशन सिस्टम में बाधा डाल सकता है

इसी के चलते वैश्विक मानदंडों के तहत उच्चतम सतर्कता लागू की गई है।


भारत की DGCA ने जारी की सख्त गाइडलाइंस—फ्लाइट रूट से लेकर फ्यूल मैनेजमेंट तक बदलाव

राख का बादल भारतीय हवाई क्षेत्र तक पहुंचने की संभावनाओं को देखते हुए DGCA (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने एयरलाइंस के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा गया—

  • एयरलाइंस प्रभावित flight levels से दूर रहें

  • रूटिंग और फ्लाइट प्लानिंग तुरंत अपडेट करें

  • आवश्यक हो तो अतिरिक्त ईंधन लेकर उड़ान भरें

  • किसी भी विमान में इंजन की आवाज़, बदबू, धुआं, नियंत्रण में कठिनाई दिखाई दे तो तुरंत रिपोर्ट किया जाए

यदि राख हवाई अड्डों के संचालन को प्रभावित करती है, तो—

  • रनवे

  • टैक्सीवे

  • एप्रन

इन सभी की तत्काल जांच की जानी होगी, क्योंकि राख के महीन कण surface friction को भी प्रभावित कर सकते हैं।


ज्वालामुखी शांत जरूर दिख रहा… पर असल खतरा अभी बाकी? विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

हालांकि सोमवार शाम तक ज्वालामुखी शांत होता दिखाई दिया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ अस्थायी शांति हो सकती है।
एमिरात एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के प्रमुख इब्राहिम अल जरवान ने कहा—

“अगर ज्वालामुखी बड़ी मात्रा में SO₂ छोड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि अंदर दबाव फिर से बढ़ रहा है। यह भविष्य में और धमाकों का संकेत हो सकता है।”

हेली गूबी को भूवैज्ञानिक शील्ड ज्वालामुखी मानते हैं—और ऐसे ज्वालामुखी सामान्यतः—

  • लंबी नींद के बाद

  • कई छोटे-बड़े विस्फोटों की श्रृंखला

दिखा सकते हैं।
इसलिए वैज्ञानिक सैटेलाइट डेटा और thermal imaging के माध्यम से लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं।


हेली गूबी: अफार रिफ्ट का रहस्यमय हिस्सा—जहां पृथ्वी की प्लेटें आज भी खिसक रही हैं

अफार रिफ्ट दुनिया के उन बेहद दुर्लभ भूभागों में से एक है जहां धरती की बड़ी टेक्टॉनिक प्लेटें एक-दूसरे से दूर खिसक रही हैं
यही कारण है कि यहां लगातार—

  • भूकंपीय हलचल

  • भूमिगत मैग्मा में दबाव

  • छोटे-बड़े ज्वालामुखीय बदलाव

देखे जाते हैं।

लेकिन हेली गूबी जैसे शांत, बिना रिकॉर्ड वाले ज्वालामुखी का अचानक फटना वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बड़ा सवाल है।
इससे शोधकर्ताओं को समझने का मौका मिलेगा कि—

  • मैग्मा किस तरह ऊपर उठता है

  • क्या अफार रिफ्ट तेजी से बदल रहा है

  • क्या अफ्रीका में plate divergence गति पकड़ रही है

अर्थ साइंस के लिहाज से यह विस्फोट आने वाले दशकों तक महत्वपूर्ण अध्ययन का आधार बनने वाला है।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्यों जरूरी है? राख हजारों किलोमीटर तक फैलती है

हेली गूबी से निकली राख सिर्फ अफ्रीका तक सीमित नहीं रही।
VAAC (Volcanic Ash Advisory Center) की सैटेलाइट रिपोर्टों के अनुसार, राख—

  • लाल सागर पार कर यमन और ओमान

  • अरब के रेगिस्तानी इलाकों

  • और अब संभावित रूप से भारत

तक पहुंच चुकी है।

इसी कारण—

  • मौसम एजेंसियाँ

  • पर्यावरण विभाग

  • अंतरराष्ट्रीय हवाई सुरक्षा संगठन

सभी मिलकर लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं।

ज्वालामुखीय राख का असर—

  • उड़ानों

  • कृत्रिम वर्षा

  • वायु प्रदूषण

  • खेती

  • और तापमान

—सब पर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह Ethiopia volcano eruption स्थानीय घटना नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन गया है।


वैज्ञानिकों की दुनिया में उत्सुकता—12 हजार साल शांत रहे ज्वालामुखी की नींद आखिर क्यों टूटी?

हेली गूबी अब अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के लिए प्राथमिक अध्ययन स्थल बनने जा रहा है।
विशेषज्ञ जानना चाहते हैं—

  • मैग्मा चैम्बर में क्या बदल रहा था?

  • क्या अफार रिफ्ट के नीचे नया magma inflow शुरू हुआ?

  • क्या पृथ्वी की प्लेटों की गति तेज हुई है?

  • क्या यह विस्फोट अफ्रीका के भूगोल में बड़े बदलाव का संकेत है?

ऐसे ज्वालामुखी जो हजारों साल शांत रहे हों, उनका अचानक फटना भूविज्ञान का बेहद दुर्लभ और रोमांचक अध्याय होता है।
इसलिए आने वाले समय में इस क्षेत्र पर शोध निधि और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट भी बढ़ सकते हैं।


इथियोपिया के हेली गूबी ज्वालामुखी का विस्फोट न सिर्फ अफ्रीका बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक भूगोलिक चेतावनी की तरह है। 12 हजार साल बाद जागे इस ज्वालामुखी ने दर्शाया कि धरती के भीतर ऊर्जा कैसे अप्रत्याशित रूप से बदलती रहती है। राख का फैलाव यमन, ओमान और भारत तक पहुंच चुका है, जबकि वैज्ञानिक अभी भी यह समझने में जुटे हैं कि लंबी शांति के बाद यह विस्फोट आखिर क्यों हुआ। फिलहाल ज्वालामुखी शांत दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खतरा पूरी तरह टला नहीं है और आने वाले दिनों में इसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

 

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