Agra- कुसियारपुर गांव में हादसा, 13 युवक नदी में डूबे, दो परिवारों के चिराग बुझ गए
Agra- नवरात्रि का पर्व खुशियों और उल्लास का होता है, लेकिन इस बार कुसियारपुर गांव में यह पर्व अकल्पनीय दुःख लेकर आया। मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दौरान गांव के 13 युवक उटंगन नदी में डूब गए, जिससे गांव में मातम छा गया। इस हादसे ने दो परिवारों के चिराग छीन लिए, और गांव में हर किसी का दिल टूट गया। किसी ने अपना बेटा खो दिया तो किसी ने अपना पति। हादसे की खबर सुनते ही घरों में दहाड़ें मच गईं और आंखों से आंसुओं की झड़ी लग गई।
हादसा और अफरा-तफरी का माहौल
बृहस्पतिवार को, जैसे ही कुसियारपुर के युवक उटंगन नदी में दुर्गा की मूर्ति विसर्जित करने पहुंचे, वे गहरे पानी में डूब गए। नदी के पानी में अचानक आई गहराई ने 13 युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। गांव के लोग और रिश्तेदार मदद के लिए दौड़े, लेकिन अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने कड़ी मेहनत और कोशिशों के बाद एक युवक, विष्णु को बचा लिया। इसके बाद पुलिस और एसडीआरएफ की मदद से डेढ़ घंटे बाद दो और युवकों, ओमपाल और गगन के शव निकाले गए। देर रात, एक अन्य किशोर, मनोज का शव भी बाहर निकाला गया।
पीड़ित परिवारों की स्थिति
हादसे के बाद, पीड़ित परिवारों का हाल बेहाल हो गया। गांव के लोग और रिश्तेदार सांत्वना देने आए, लेकिन कोई भी दुख का सामना करने के लिए तैयार नहीं था।
अभिषेक (17 साल) के पिता कुंवरराज टेलर हैं और उसकी मां नीतू और बहनें सोनिया (12 साल) और आशिकी (19 साल) हैं। अभिषेक इंटर के छात्र थे। उनकी मौत से मां नीतू का हाल बेहाल हो गया और वह अपने बेटे को बाहर निकालने के लिए रातभर नदी के किनारे बैठी रहीं।
सचिन उर्फ महावीर (15 साल) के पिता रामवीर सिंह मार्बल कारीगर हैं। सचिन का बड़ा भाई अंकित 18 साल का है और बहन खुशबू है। सचिन की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
वीनेश (20 साल) के पिता बब्बू उर्फ विजय सिंह किसान हैं। वीनेश की मां ममता देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। उसकी छोटी बहन वर्षा है। वीनेश की मौत ने परिवार में गहरे घाव दिए हैं।
भगवती (22 साल) के पिता मुरारीलाल किसान हैं। भगवती की शादी आठ महीने पहले हुई थी, और अब उसकी पत्नी चंचल का बुरा हाल था। भगवती का शव अभी तक नहीं मिल पाया है।
ओकेश (16 साल) के पिता किशन सिंह किसान हैं। ओकेश छह भाइयों में सबसे छोटा था, और उसकी मां शांति देवी का दिल टूट गया है। वह बार-बार कह रही थीं, “कोई मेरे बेटे को वापस ला दो।”
गजेंद्र (20 साल) के पिता रेवती प्रसाद किसान हैं। गजेंद्र तीन भाइयों में सबसे छोटा था और इंटरमीडिएट का छात्र था। उसकी मां ने इस दुखद घटना के बाद सदमे में अपना होश खो दिया।
दीपक (15 साल) के पिता सुकखन की छह साल पहले बीमारी से मृत्यु हो गई थी। दीपक के माता-पिता के लिए यह हादसा और भी कष्टकारी था। उसकी मां तुलसी देवी को बेटे के डूबने की खबर सुनकर गहरा सदमा पहुंचा।
मनोज (14 साल) के पिता रामनिवास किसान हैं। मनोज के डूबने के बाद उसकी मां राजन देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। देर रात एसडीआरएफ की टीम ने मनोज का शव बाहर निकाला।
करन (21 साल) के पिता रामवीर किसान हैं। करन की शादी सपना से हुई थी और उनका एक साल का बेटा विनय है। करन की मां सामंती देवी ने बेटे के डूबने की खबर सुनते ही रोते हुए अपने बेटे के शव का इंतजार किया।
गांव में मातम और शोक की लहर
कुसियारपुर गांव में यह हादसा गांव के प्रत्येक सदस्य के लिए एक गहरे सदमे की तरह था। लोग एक-दूसरे को सांत्वना देते रहे, लेकिन कुछ भी उनकी पीड़ा को कम नहीं कर पा रहा था। डूबने वाले युवक और उनके परिवार के सदस्य अब उस डरावनी रात के बाद जिंदगी को फिर से सामान्य बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। यह हादसा न केवल कुसियारपुर गांव, बल्कि पूरे इलाके के लिए एक गहरी धक्का देने वाली घटना है।

