उत्तर प्रदेश

Agra शास्त्रीपुरम में कारोबारी युवक की दर्दनाक मौत: वीडियो कॉल पर परिवार से बात, बंद कार में मिली लाश, अवसाद की परतों में छिपी सच्चाई

Agra suicide case ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में शनिवार रात जो हुआ, उसने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे को भी केंद्र में ला खड़ा किया। थाना सिकंदरा क्षेत्र के शास्त्रीपुरम इलाके में एक युवा कारोबारी की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया।


🔴 शास्त्रीपुरम की रात, जब सब कुछ थम गया

शनिवार की रात शास्त्रीपुरम क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब डीपीएस स्कूल के पास खड़ी एक कार के भीतर युवक के गोली लगने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तो कार अंदर से बंद थी। कुछ ही देर में परिजन भी वहां पहुंच गए। पिछला शीशा तोड़कर जब कार का लॉक खोला गया, तो ड्राइविंग सीट पर 23 वर्षीय विश्वजीत सिंह रजावत का रक्तरंजित शव मिला।

विश्वजीत आगरा में सूर्या ऑयल मिल के संचालक थे। इतनी कम उम्र में कारोबार संभाल रहे विश्वजीत की मौत ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर अंदर ही अंदर वह किस पीड़ा से गुजर रहे थे।


🔴 वीडियो कॉल पर आखिरी बातचीत, जिसने सब कुछ बदल दिया

इस Agra suicide case की सबसे भावुक और विचलित कर देने वाली कड़ी वह वीडियो कॉल है, जो विश्वजीत ने अपनी मौत से कुछ समय पहले की थी। परिजनों के अनुसार, विश्वजीत ने ग्रुप वीडियो कॉल किया, जिसमें उनकी मां रजनी देवी, पिता अमर रजावत और दोनों भाई शामिल हुए।

कॉल के दौरान विश्वजीत सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन शब्दों में गहरी उदासी झलक रही थी। उन्होंने पिता से भावुक होकर कहा कि अब जीने का मन नहीं करता और ‘आई लव यू’ कहते हुए कॉल काट दी। परिजनों को आशंका हुई, लेकिन इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, पुलिस से सूचना आ गई।


🔴 अवसाद से लंबी लड़ाई, पहले भी कर चुके थे प्रयास

परिवार ने बताया कि विश्वजीत लंबे समय से अवसाद में थे। उनका निजी चिकित्सक से इलाज चल रहा था और वह नियमित दवाइयां भी ले रहे थे। यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने अपनी जान लेने की कोशिश की हो।

बीते वर्ष जुलाई में उन्होंने अपने दो मंजिला घर की छत से कूदकर जान देने का प्रयास किया था। एक अन्य घटना में वह रेलवे ट्रैक पर लेट गए थे, लेकिन राहगीरों की सतर्कता से उनकी जान बच गई थी। इसके बावजूद मानसिक पीड़ा का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता चला गया।


🔴 बंद कार में मिले सामान, कई सवाल खड़े

पुलिस को कार के भीतर से कई चीजें बरामद हुईं, जिनमें हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन, नकदी, शराब की बोतल, दवाइयां और कुछ दस्तावेज शामिल थे। इन बरामदगियों ने जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए अवैध हथियार रखने से संबंधित कार्रवाई भी दर्ज की है। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।


🔴 पिता से गहरा लगाव, भावनात्मक रिश्ता

परिजनों के अनुसार, विश्वजीत का अपने पिता से गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। वह स्वयं शराब नहीं पीते थे, लेकिन पिता के लिए शराब की बोतल खरीदकर लाए थे। यह छोटी-सी बात उनके व्यक्तित्व और पारिवारिक संबंधों को बयां करती है।

परिवार का कहना है कि विश्वजीत बाहर से मजबूत दिखते थे, लेकिन भीतर ही भीतर वह खुद से जंग हारते जा रहे थे।


🔴 शादी नहीं हुई थी, जिम्मेदारियों का दबाव

23 वर्ष की उम्र में कारोबार, पारिवारिक अपेक्षाएं और भविष्य की जिम्मेदारियां—इन सबका दबाव विश्वजीत पर लगातार बढ़ रहा था। उनकी शादी नहीं हुई थी और वह व्यवसाय को आगे बढ़ाने की चुनौतियों से भी जूझ रहे थे।

पड़ोसियों का कहना है कि वह मिलनसार और शांत स्वभाव के थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि उनके मन में इतना बड़ा तूफान चल रहा है।


🔴 मरने से पहले अपनों से संपर्क, अंतिम विदाई जैसा व्यवहार

इस Agra suicide case में एक और बात जिसने सभी को चौंका दिया, वह यह कि विश्वजीत ने मरने से पहले अपने लगभग हर करीबी से बात की थी। दोस्तों और रिश्तेदारों ने बताया कि शनिवार को विश्वजीत ने उनसे सामान्य बातचीत की थी।

किसी को भी यह महसूस नहीं हुआ कि वह इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं। मौत की खबर मिलते ही हर कोई स्तब्ध रह गया।


🔴 मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल

यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। अवसाद एक ऐसी बीमारी है, जो अक्सर चुपचाप इंसान को भीतर से तोड़ देती है। बाहरी सफलता, उम्र या सामाजिक स्थिति मानसिक पीड़ा को कम नहीं कर पाती।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते संवाद, परामर्श और सहयोग ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।


आगरा शास्त्रीपुरम की यह घटना एक परिवार की निजी त्रासदी होने के साथ-साथ समाज के लिए गंभीर संदेश है। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता, संवाद और समय पर मदद—ये ही ऐसे कदम हैं जो भविष्य में किसी और घर को सूना होने से बचा सकते हैं। यह खबर केवल सूचना नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।

 

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