AMU में बड़ा आरोप: महिला प्रोफेसर का दावा—27 साल से हिंदू होने पर उत्पीड़न, डीन पर सांप्रदायिक टिप्पणियों और भेदभाव के गंभीर आरोप
News-Desk
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Aligarh news, AMU News, Campus Issue, Education News, Professor Allegation, University Controversy, uttar pradesh newsAMU professor harassment case को लेकर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने विश्वविद्यालय परिसर से लेकर शैक्षणिक जगत तक हलचल मचा दी है। राजनीति विज्ञान विभाग की वरिष्ठ महिला प्रोफेसर रचना कौशल ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 27 वर्षों से केवल हिंदू होने के कारण मानसिक, पेशेवर और सामाजिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
🔴 1998 से शुरू हुआ उत्पीड़न का आरोप
प्रोफेसर रचना कौशल का कहना है कि वर्ष 1998 में नियुक्ति के बाद से ही उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर उन्हें लगातार अलग-थलग किया गया और उनके साथ ऐसा व्यवहार हुआ, जो एक शैक्षणिक संस्था की गरिमा के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यह उत्पीड़न केवल पेशेवर सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय-समय पर उन्हें सांप्रदायिक ताने भी सुनने पड़े।
🔴 विभागाध्यक्ष और डीन पर सीधे आरोप
महिला प्रोफेसर ने अपने शिकायती पत्र में विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि डीन द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया गया और उन्हें जानबूझकर महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से बाहर रखा गया।
शिकायत में कहा गया है कि वरिष्ठता के बावजूद उन्हें बोर्ड ऑफ स्टडीज़ जैसी अहम बैठकों से दूर रखा गया और जिम्मेदारियां नहीं सौंपी गईं।
🔴 गर्भावस्था के दौरान दबाव और निजी क्षति का दावा
शिकायत का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह है, जिसमें प्रोफेसर रचना कौशल ने दावा किया है कि गर्भावस्था के दौरान भी उन पर अत्यधिक कार्य दबाव बनाया गया। उनके अनुसार, इस मानसिक और शारीरिक दबाव का असर इतना गंभीर रहा कि उन्हें जुड़वां बच्चों का मिसकैरेज झेलना पड़ा।
उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि संस्थागत असंवेदनशीलता का परिणाम बताया है।
🔴 ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेज सौंपे
महिला प्रोफेसर ने कुलपति कार्यालय को दिए गए शिकायती पत्र के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग, उसकी ट्रांसक्रिप्ट और अन्य सहायक दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि ये साक्ष्य उनके आरोपों की पुष्टि करते हैं और निष्पक्ष जांच की मांग को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
🔴 ‘हिंदू हो तो बीएचयू चले जाओ’—सबसे गंभीर आरोप
प्रोफेसर कौशल का आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर यह कहा गया कि “हिंदू हो इसलिए बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी चले जाना चाहिए।” इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
उनका कहना है कि यह टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की धर्मनिरपेक्ष छवि पर भी सवाल खड़े करती है।
🔴 AMU प्रशासन की चुप्पी, लेकिन अंदरूनी हलचल
इस पूरे मामले के सार्वजनिक होने के बावजूद अभी तक AMU प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कुलपति कार्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लिया है और प्रारंभिक स्तर पर उसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है।
विश्वविद्यालय के भीतर इस प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है और शिक्षकों के बीच भी चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
🔴 निष्पक्ष जांच और पद से हटाने की मांग
प्रोफेसर रचना कौशल ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित डीन को पद से हटाया जाए, ताकि किसी प्रकार का प्रभाव या दबाव जांच प्रक्रिया पर न पड़े।
उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ उनका नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा है।
🔴 शिक्षा संस्थानों में समानता पर फिर बहस
AMU professor harassment case ने एक बार फिर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में समानता, निष्पक्षता और कार्यस्थल की गरिमा जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध निर्णय विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

