खेल जगत

यूपी पुलिस की दरोगा Asmita Dey ने रचा इतिहास: कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में जीता गोल्ड, संघर्ष, भूख और पिता की याद के बीच भारत को दिलाया स्वर्ण

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में भारत के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के पद पर तैनात जूडो खिलाड़ी Asmita Dey  ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। कनाडा की मजबूत प्रतिद्वंद्वी हेडी क्वाच को रोमांचक मुकाबले में हराकर अस्मिता ने न केवल भारत का तिरंगा बुलंद किया, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस, अपने गृह राज्य त्रिपुरा और पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया।

यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, अनुशासन, मानसिक मजबूती, पारिवारिक दुख, अथक मेहनत और देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज़्बे की मिसाल भी है। शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद जिस आत्मविश्वास और धैर्य के साथ अस्मिता ने वापसी की, उसने पूरे मुकाबले को यादगार बना दिया।


शुरुआत में पिछड़ीं, लेकिन गोल्डन स्कोर में पलट दिया पूरा मुकाबला

महिला 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। मुकाबले की शुरुआत कनाडा की खिलाड़ी हेडी क्वाच के पक्ष में गई। उन्होंने शुरुआती दौर में ही युको अंक हासिल कर बढ़त बना ली। वहीं, अस्मिता डे को एक शिदो पेनल्टी भी मिली, जिससे मुकाबला और चुनौतीपूर्ण हो गया।

हालांकि, दबाव की इस स्थिति में भी अस्मिता ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने शानदार तकनीक और बेहतरीन रणनीति के साथ मुकाबले में वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। निर्धारित समय तक कोई भी खिलाड़ी निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंच गया।

गोल्डन स्कोर में हर पल निर्णायक था। इसी दौरान अस्मिता ने सही समय पर शानदार दांव लगाया और दूसरा युको अंक हासिल करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। जैसे ही निर्णायक अंक मिला, भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।


फाइनल तक का सफर भी रहा दमदार

फाइनल मुकाबले तक पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं था। अस्मिता डे ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया।

उन्होंने पहले स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को हराया और इसके बाद समर शॉ को मात देकर फाइनल में प्रवेश किया। दोनों मुकाबलों में अस्मिता का प्रदर्शन संतुलित, आक्रामक और रणनीतिक रहा। यही लय उन्होंने फाइनल तक बरकरार रखी और आखिरकार स्वर्ण पदक जीतकर पूरे अभियान का शानदार समापन किया।


गोल्ड जीतने के बाद सीएम योगी का जताया आभार

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता डे भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मिले सहयोग और यूपी पुलिस में मिली नौकरी को दिया।

अस्मिता ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं और इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष रूप से धन्यवाद करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के बाद उन्हें आर्थिक और मानसिक संबल मिला, जिससे वे अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकीं।

उनके अनुसार, यदि यह सहयोग नहीं मिलता तो अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकारी सहयोग और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों ने उनके सपनों को नई उड़ान दी।


पिता के निधन के बाद टूट गई थीं, फिर खुद को संभालकर बनीं चैंपियन

अस्मिता डे की सफलता के पीछे संघर्ष की एक भावुक कहानी भी छिपी है।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में उनके पिता का निधन हो गया था। पिता हमेशा उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत और समर्थक रहे। उनके जाने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि जीवन में सब कुछ खत्म हो गया है।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। केवल दो महीने बाद आयोजित एशियन गेम्स ट्रायल्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। उसी प्रदर्शन ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स तक पहुंचाया।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता ने कहा कि यह पदक उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके दिवंगत पिता के सपनों की पूर्ति है। उन्होंने यह स्वर्ण पदक अपने पिता और अपने कोच को समर्पित किया।


800 मीटर दौड़ से जूडो तक का प्रेरणादायक सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि अस्मिता डे ने अपने खेल करियर की शुरुआत जूडो से नहीं, बल्कि 800 मीटर दौड़ से की थी।

त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स की खिलाड़ी थीं। इसी दौरान उनकी रुचि जूडो की ओर बढ़ी। उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए एथलेटिक्स छोड़ दी और पूरी तरह जूडो को अपना लक्ष्य बना लिया।

यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन लगातार अभ्यास और मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया।


SAI भोपाल में मिली विश्वस्तरीय ट्रेनिंग

अस्मिता डे ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के भोपाल रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

लगातार मेहनत, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और अनुशासित जीवनशैली ने उनके खेल को नई ऊंचाई दी। वर्तमान में वह केंद्र सरकार की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के डेवलपमेंट ग्रुप का हिस्सा हैं, जहां उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, पोषण और प्रतियोगिताओं की तैयारी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसी का परिणाम है कि आज वह भारत की प्रमुख जूडो खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं।


वजन बनाए रखने के लिए फाइनल से पहले भूखे रहना पड़ा

अंतरराष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिताओं में वजन प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है।

अस्मिता ने बताया कि फाइनल मुकाबले से पहले उन्हें रैंडम वेट-इन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। नियमों के अनुसार उनका वजन 50 किलोग्राम से कम होना जरूरी था।

सुबह जब उन्होंने अपना वजन जांचा तो वह 50 किलो 300 ग्राम निकला। केवल 300 ग्राम अधिक वजन के कारण उन्होंने कुछ भी खाने-पीने से परहेज किया।

उन्होंने बताया कि जब उनका नाम रैंडम वेट-इन के लिए आया और औपचारिक जांच पूरी हो गई, तभी उन्होंने भोजन और पानी लिया। इसके लगभग एक घंटे बाद ही उन्हें स्वर्ण पदक का मुकाबला खेलना पड़ा।

इस घटना से उनके अनुशासन और मानसिक मजबूती का अंदाजा लगाया जा सकता है।


डीजीपी राजीव कृष्ण ने दी बधाई, बताया अनुशासन और मेहनत की मिसाल

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने अस्मिता डे को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने महिला 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतकर यूपी पुलिस, उत्तर प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि अस्मिता की उपलब्धि यह साबित करती है कि अनुशासन, निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त कर सकता है।

डीजीपी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखाई दे रहा है। खेल कोटे के माध्यम से खिलाड़ियों को पुलिस सेवा में अवसर मिलने से वे आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं और खेल पर पूरा ध्यान दे पाते हैं।


भारत की पदक तालिका में भी आई मजबूती

कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। अस्मिता डे के स्वर्ण पदक के साथ भारत की पदक संख्या में और बढ़ोतरी हुई।

ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत अब तक 19 पदक जीत चुका है, जिनमें 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

भारतीय खिलाड़ियों के लगातार बेहतर प्रदर्शन से आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।


महिला खिलाड़ियों के लिए बनी प्रेरणा

अस्मिता डे की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि देशभर की उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां, पारिवारिक दुख, आर्थिक चुनौतियां या शुरुआती असफलताएं किसी भी खिलाड़ी के सपनों को रोक नहीं सकतीं।

जूडो जैसे कठिन और प्रतिस्पर्धी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना भारत के लिए गर्व का विषय है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, रोजगार और सुविधाएं मिलती रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक खेल मंचों पर और अधिक मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।


कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में अस्मिता डे का स्वर्ण पदक केवल भारत की पदक तालिका में एक और गोल्ड जोड़ने भर की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरक कहानी भी है। यूपी पुलिस की सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन, कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है। उनकी यह ऐतिहासिक जीत आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

 

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: info@poojanews.com

News-Desk has 22420 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eight − one =