टीम इंडिया से 4 साल दूर Mayank Agarwal की काउंटी में वापसी, डरहम ने आखिरी 4 मैचों के लिए जोड़ा; जिस टीम के खिलाफ जड़ा था 175, अब उसी के साथ नया सफर
News-Desk
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मयंक का काउंटी क्रिकेट से रिश्ता नया नहीं है। पिछले साल उन्होंने यॉर्कशायर के लिए काउंटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था और खराब शुरुआत के बाद जिस अंदाज में वापसी की, वह खास तौर पर चर्चा में रही। शुरुआती पारियों में दो बार शून्य पर आउट होने के बाद उन्होंने अपने आखिरी मुकाबले में 175 रन की शानदार पारी खेली थी।
दिलचस्प बात यह थी कि मयंक ने यह बड़ी पारी डरहम के खिलाफ ही खेली थी। अब वही बल्लेबाज डरहम की टीम का हिस्सा बनकर काउंटी चैंपियनशिप के अंतिम चार मैच खेलेगा।
डरहम के लिए मयंक अग्रवाल का बड़ा दांव
डरहम ने सीजन के आखिरी चरण में मयंक को टीम में शामिल करने का फैसला ऐसे समय में किया है जब उसे अपने प्रमुख बल्लेबाज डेविड बेडिंगहम की सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी।
बेडिंगहम अंतरराष्ट्रीय लाल गेंद क्रिकेट के लिए दक्षिण अफ्रीका लौटेंगे। ऐसे में डरहम को काउंटी चैंपियनशिप के बचे हुए मुकाबलों के लिए एक अनुभवी और उच्च स्तर का बल्लेबाज चाहिए था।
मयंक का अनुभव इस जरूरत को पूरा करता दिखाई देता है। भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके मयंक के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी शानदार रिकॉर्ड है।
कोच रयान कैंपबेल ने मयंक को बताया बेहद प्रतिभाशाली
डरहम के हेड कोच रयान कैंपबेल ने मयंक अग्रवाल के टीम से जुड़ने पर खुशी जताई।
उन्होंने कहा कि काउंटी चैंपियनशिप अभियान के दौरान मयंक के टीम में शामिल होने से डरहम खुश है। कैंपबेल के मुताबिक, डेविड बेडिंगहम के दक्षिण अफ्रीका लौटने के बाद सीजन के बाकी हिस्से के लिए किसी उच्च स्तर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को टीम में शामिल करना जरूरी था।
कैंपबेल ने मयंक की बल्लेबाजी क्षमता और फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड की भी तारीफ की। उन्होंने उम्मीद जताई कि मयंक डरहम के लिए महत्वपूर्ण योगदान देंगे और टीम को काउंटी चैंपियनशिप के डिवीजन वन में वापसी की कोशिश में मदद करेंगे।
डरहम का लक्ष्य डिवीजन वन में वापसी
मयंक को सिर्फ व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिए टीम में नहीं जोड़ा गया है। डरहम के लिए काउंटी चैंपियनशिप का यह चरण टीम के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
कोच रयान कैंपबेल ने स्पष्ट किया कि टीम डिवीजन वन में वापसी की कोशिश कर रही है। ऐसे में शीर्ष क्रम में एक अनुभवी बल्लेबाज की मौजूदगी डरहम के अभियान को मजबूती दे सकती है।
मयंक को लंबे फॉर्मेट का अनुभव है और वह टेस्ट स्तर पर भारत के लिए भी खेल चुके हैं। इसलिए काउंटी क्रिकेट की परिस्थितियों में उनसे बड़ी पारियों की उम्मीद की जा रही होगी।
पिछले साल यॉर्कशायर के लिए खेलते हुए किया था कमाल
मयंक अग्रवाल ने पिछले साल यॉर्कशायर के साथ अपना पहला काउंटी करार किया था।
उन्होंने टीम के लिए तीन मुकाबले खेले। शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रही। शुरुआती तीन पारियों में वह दो बार बिना खाता खोले आउट हुए।
लेकिन इसके बाद उन्होंने ऐसी पारी खेली जिसने पूरे अभियान की तस्वीर बदल दी।
अपने आखिरी मैच में मयंक ने 175 रन ठोक दिए। यह पारी उन्होंने डरहम के खिलाफ खेली थी।
यानी जिस टीम के खिलाफ पिछले साल उन्होंने काउंटी क्रिकेट में अपना बड़ा स्कोर बनाया था, अब उसी टीम की जर्सी में मैदान पर उतरेंगे।
175 रन की पारी अब भी चर्चा में क्यों?
काउंटी क्रिकेट में परिस्थितियां भारतीय घरेलू क्रिकेट से अलग होती हैं। इंग्लैंड में गेंद के मूवमेंट और मौसम की परिस्थितियां बल्लेबाजों के लिए चुनौती पेश करती हैं।
ऐसे माहौल में मयंक की 175 रन की पारी उनके लिए खास उपलब्धि थी। खासकर इसलिए कि उन्होंने इससे पहले लगातार संघर्ष किया था।
दो बार शून्य पर आउट होने के बाद वापसी करते हुए बड़ी पारी खेलना उनके मानसिक और तकनीकी पक्ष की मजबूती को दिखाता है।
अब डरहम के साथ उनका नया अध्याय शुरू हो रहा है और टीम को उम्मीद होगी कि वह उसी तरह की बड़ी पारियां दोहरा सकेंगे।
टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर हैं मयंक
मयंक अग्रवाल पिछले करीब चार वर्षों से भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं।
उन्होंने भारत के लिए आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच मार्च में श्रीलंका के खिलाफ बेंगलुरु में खेला था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में लगातार जगह नहीं मिल सकी।
उनका अंतरराष्ट्रीय करियर एक समय तेजी से ऊपर गया था, लेकिन बाद में वह टीम की योजनाओं से बाहर होते चले गए।
अब काउंटी क्रिकेट में वापसी उनके लिए प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अपनी फॉर्म और फिटनेस को दिखाने का एक और मंच होगी।
टेस्ट क्रिकेट में मयंक के नाम दोहरा शतक
मयंक अग्रवाल का टेस्ट रिकॉर्ड बताता है कि वह लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं।
भारत के लिए उन्होंने 21 टेस्ट मैच खेले हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम दोहरा शतक भी दर्ज है।
मयंक ने टेस्ट क्रिकेट में शुरुआत के दौर में कई प्रभावशाली पारियां खेलीं और कुछ समय तक भारतीय टेस्ट टीम के शीर्ष क्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
दोहरा शतक उनके टेस्ट करियर की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में शामिल है।
वनडे में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं
मयंक अग्रवाल का अंतरराष्ट्रीय अनुभव केवल टेस्ट क्रिकेट तक सीमित नहीं है।
उन्होंने भारत के लिए 5 वनडे मैच भी खेले हैं।
हालांकि उनका सबसे मजबूत रिकॉर्ड लाल गेंद के क्रिकेट में रहा है। यही कारण है कि डरहम ने उन्हें काउंटी चैंपियनशिप जैसे लंबे फॉर्मेट के लिए चुना है।
काउंटी क्रिकेट में लगातार कई दिनों तक बल्लेबाजी करने का मौका मिलता है और यही प्रारूप मयंक के अनुभव के अनुरूप भी है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अब भी सक्रिय
अंतरराष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बावजूद मयंक ने क्रिकेट को छोड़ा नहीं है।
वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार सक्रिय रहने से उन्हें लंबे फॉर्मेट की लय बनाए रखने में मदद मिली है।
यही अनुभव अब इंग्लैंड में डरहम के लिए उपयोगी हो सकता है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड भी उनकी बल्लेबाजी क्षमता का बड़ा प्रमाण है। डरहम के कोच ने भी इसी रिकॉर्ड को मयंक को टीम में शामिल करने की एक अहम वजह बताया है।
RCB की IPL विजेता टीम का हिस्सा भी रहे
मयंक अग्रवाल पिछले साल आईपीएल में खिताब जीतने वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी रहे थे।
इससे उन्हें बड़े टूर्नामेंट और दबाव वाले मुकाबलों का अनुभव मिला। हालांकि काउंटी चैंपियनशिप की चुनौती टी20 से बिल्कुल अलग होती है।
टी20 में जहां बल्लेबाज को तेजी से रन बनाने होते हैं, वहीं काउंटी क्रिकेट में धैर्य, तकनीक और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
मयंक के लिए यह फॉर्मेट उनकी वास्तविक लाल गेंद वाली बल्लेबाजी क्षमता दिखाने का बेहतर अवसर भी हो सकता है।
इंग्लैंड की परिस्थितियों में होगी असली परीक्षा
डरहम के लिए खेलते हुए मयंक को इंग्लैंड की परिस्थितियों में बल्लेबाजी करनी होगी।
स्विंग होती गेंद, सीम मूवमेंट और बादल वाला मौसम बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन सकते हैं। शुरुआती कुछ ओवरों में विकेट बचाना और गेंद को अच्छी तरह छोड़ना काफी अहम होगा।
मयंक के पास टेस्ट क्रिकेट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट का पर्याप्त अनुभव है, इसलिए उनसे उम्मीद होगी कि वह इन परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालेंगे।
अगर वह शुरुआत में अच्छी पारियां खेलने में सफल रहते हैं तो डरहम के मध्यक्रम और शीर्ष क्रम को काफी मजबूती मिल सकती है।
मयंक के सामने सिर्फ चार मैचों का मौका
डरहम के साथ मयंक का करार फिलहाल सीजन के अंतिम चार काउंटी चैंपियनशिप मैचों के लिए है।
इसका मतलब है कि उनके पास खुद को साबित करने के लिए सीमित अवसर होंगे।
चार मैचों में बड़ी पारियां खेलने से वह न केवल डरहम के अभियान में योगदान दे सकते हैं, बल्कि इंग्लैंड में अपने लाल गेंद के प्रदर्शन को भी मजबूत कर सकते हैं।
उनके लिए हर पारी महत्वपूर्ण होगी।
क्या काउंटी क्रिकेट से टीम इंडिया का रास्ता खुलेगा?
मयंक के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या काउंटी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन उन्हें फिर से भारतीय टीम की दौड़ में ला सकता है।
फिलहाल राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना बेहद कठिन प्रतिस्पर्धा वाला क्षेत्र है। भारतीय टेस्ट टीम में शीर्ष क्रम के लिए कई बल्लेबाज लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
फिर भी फर्स्ट क्लास और काउंटी क्रिकेट में लगातार रन बनाना चयनकर्ताओं के सामने किसी भी खिलाड़ी की दावेदारी को मजबूत कर सकता है।
मयंक के लिए फिलहाल सबसे जरूरी लक्ष्य रन बनाना और लगातार प्रदर्शन करना होगा।
काउंटी क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजों का अनुभव
भारतीय बल्लेबाजों के लिए इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने का अनुभव लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
काउंटी क्रिकेट में खेलने से खिलाड़ियों को इंग्लैंड की परिस्थितियों, ड्यूक गेंद और सीम मूवमेंट से परिचित होने का मौका मिलता है।
मयंक पहले ही इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेल चुके हैं। इसलिए डरहम के साथ उनका अगला कार्यकाल उनके लिए परिस्थितियों के लिहाज से पूरी तरह नया नहीं होगा।
यह अनुभव उन्हें इस बार बेहतर शुरुआत करने में मदद कर सकता है।
डरहम के खिलाफ 175 से डरहम तक का सफर
मयंक की काउंटी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है।
पिछले साल वह यॉर्कशायर की तरफ से खेल रहे थे। शुरुआती पारियों में संघर्ष के बाद उन्होंने डरहम के खिलाफ 175 रन बनाए।
अब कुछ समय बाद वही डरहम उन्हें अपनी टीम में शामिल कर रही है।
क्रिकेट में प्रदर्शन के आधार पर परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं, मयंक का यह सफर उसका एक दिलचस्प उदाहरण है।
डरहम को मयंक से क्या उम्मीद होगी?
डरहम को मयंक से सबसे बड़ी उम्मीद शीर्ष क्रम में स्थिरता और बड़ी पारियों की होगी।
डेविड बेडिंगहम के उपलब्ध नहीं होने से टीम को बल्लेबाजी में अनुभव की जरूरत है। मयंक के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और फर्स्ट क्लास क्रिकेट दोनों का अनुभव है।
अगर वह नई गेंद के खिलाफ टिकते हैं और बड़ी साझेदारियां बनाते हैं, तो डरहम के लिए मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
उनका लक्ष्य व्यक्तिगत रन बनाने के साथ टीम को डिवीजन वन की ओर ले जाने में मदद करना भी होगा।
मयंक के करियर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय
मयंक अग्रवाल का करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है।
भारत के लिए टेस्ट में दोहरा शतक लगाने से लेकर राष्ट्रीय टीम से बाहर होने तक उन्होंने कई अलग-अलग चरण देखे हैं। घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए सक्रिय रहने के बाद अब एक बार फिर इंग्लैंड का रुख कर रहे हैं।
डरहम के साथ यह चार मैचों का करार उनके लिए सिर्फ एक विदेशी लीग का अनुभव नहीं होगा। यह अपनी बल्लेबाजी क्षमता को फिर से बड़े मंच पर साबित करने का अवसर भी है।
अब नजर होगी मयंक की बल्ले से वापसी पर
डरहम ने मयंक अग्रवाल को ऐसे समय में चुना है जब उसे अनुभवी बल्लेबाज की जरूरत है। दूसरी तरफ मयंक के सामने भी अपनी उपयोगिता साबित करने का अच्छा मौका है।
पिछले साल 175 रन की पारी से उन्होंने दिखाया था कि इंग्लैंड की परिस्थितियों में बड़ी पारी खेलने की क्षमता उनमें है। अब अंतर सिर्फ इतना है कि उस समय वह डरहम के खिलाफ थे और इस बार डरहम के लिए बल्लेबाजी करेंगे।
टीम इंडिया से लंबे समय से बाहर चल रहे मयंक के लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि लाल गेंद के क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन उनके करियर को फिर से चर्चा में ला सकता है।
चार मैच, सीमित समय और बड़ा मंच—अब मयंक के बल्ले से निकलने वाले रन ही बताएंगे कि डरहम का यह फैसला कितना सफल रहता है।

