ग्रहों के बुरे प्रभाव: अशुभ Shani से हो सकता है लकवा?
भारतीय संस्कृति में नौ ग्रहों की पूजा विशेष महत्वपूर्ण है, और उनमें से एक हैं शनि देव। शनि देव, कर्मफल का पालनकर्ता, न्याय और धर्म के देवता के रूप में जाने जाते हैं। उनकी पूजा और श्रद्धाभाव से माना जाता है कि वे व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं और उन्हें मुक्ति की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।
Shani देव को कालपुरुष कहा जाता है, और उनका रूप कालभैरव के साथ जुड़ा होता है। उनकी धारा पर काले रंग के वस्त्र और अशोक वृक्ष का आभूषण होता है। वे धनुष और कांड़ीवरी धारण करते हैं, और एक वृषभ को भी अपने वाहन के रूप में चुनते हैं।
शनि जब अशुभ फल देने लगता है, तो जातक को घर की परेशानी आती है। शनि अशुभ होने से घर गिरने की स्थिति भी आ सकती है। जातक के शरीर के बाल भी झड़ने लगते हैं। विशेषकर भौंह के बाल झड़ने लगें, तो समझना चाहिए कि शनि अशुभ फल दे रहा है।
Shani से होने वाले रोग
लकवा, वात रोग, घुटनों में दर्द, गठिया, पैरों में पीड़ा, आकस्मिक दुर्घटना आदि।
बचने के लिए करें ये सरल उपाय
1. शनिवार का व्रत करें।
2. रोटी में तेल लगाकर कुत्ते या कौए को खिलाएं।
3. नीलम अथवा जामुनिया मध्यमा अंगुली में पहनें।
4. सांप को दूध पिलाएं।
5. लोहे का छल्ला जिसका मुंह खुला हो मध्यमा अंगुली में पहनें।
6. नित्य प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ पर काले तिल व कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए। यदि पीपल वृक्ष के नीचे शिवलिंग हो तो अति उत्तम होता है।
7. सुंदरकांड का पाठ सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करता है।
अशुभ Shani के प्रभाव
कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो तो व्यक्ति बीमार रहने लगता है। आंखे कमजोर और बाल झड़ने लगते हैं। कुछ पेट की समस्याओं से भी घिरे रहते हैं। शनि के अशुभ प्रभाव से नौकरी में भी संघर्ष करना पड़ता है। शनि से प्रभावित व्यक्ति का स्वभाव धीरे-धीरे बदलने लगता है और ऐसा व्यक्ति झूठ बोलने लग जाता है। शनि के दुष्प्रभाव के कारण धर्म-कर्म पर व्यक्ति का विश्वास नहीं रहता है और अकारण क्रोध आ जाता है। शनि ग्रह खराब हो तो कभी-कभी व्यक्ति बिना कुछ करे ही झूठे इल्जाम में फंस जाता है।
शनिवार के दिन करें ये काम
शनि को बलवान बनाने और शनि दोष के लिए हनुमान, शिव, पीपल के पेड़ और ब्रह्मा जी की पूजा करें। हर दिन हनुमान चालीसा, शनि चालीसा और दशरथ शनि स्तोत्र का पाठ करें। इससे शनि के बुरे प्रभाव कम होने लगते हैं। शनि उपाय के रूप में शनिवार के दिन चमड़े का सामान जैसे चप्पल, सैंडल, जूते, जूते या काला तिल गरीबों को दान करें।
शाकाहार का पालन करना और शराब से बचना भी शनि के लिए एक प्रबल उपाय है। झूठ बोलने और धोखा देने से भी दूर रहना चाहिए। शनि के लिए सबसे आसान उपायों में से एक चांदी की एक छोटी सी गेंद खरीदना और इसे हर समय अपने बटुए या पर्स में रखना है।
शनि देव के विशेष गुण:
- कर्मफल का पालन: शनि देव को कर्मफल का न्यायपालक माना जाता है। वे व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे फल प्रदान करते हैं, चाहे वह शुभ हो या अशुभ।
- विवेक और संयम: शनि देव की पूजा से विवेक और संयम बढ़ता है। व्यक्ति अपने जीवन में सही और न्यायपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम होता है।
- ध्यान और साधना: शनि देव की पूजा ध्यान और साधना का मार्ग प्रशस्त करती है। उनकी अराधना से व्यक्ति मानसिक शांति और सत्य की ओर प्रगट होता है।
- न्यायप्रिय: शनि देव न्यायप्रिय देवता हैं और उन्हें इसलिए ‘धर्मराज’ भी कहा जाता है। उनका न्यायप्रिय स्वभाव व्यक्ति को सही और न्यायिक रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
शनि जयंती और पूजा:
शनि जयंती भारत में शनिवार को मनाई जाती है, और इस दिन शनि देव की विशेष पूजा और अर्चना की जाती है। भक्त शनि देव को तिल, ऊरद दाल, काले उड़द दाल, राजमा और काले रंग के फलों से प्रसन्न करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इसके अलावा, नीला और काला रंग भी शनि देव के पूजन में प्रयुक्त होते हैं।
साकारात्मक एवं निराकारात्मक भावना:
शनि देव की पूजा से साकारात्मक भावना के साथ ही निराकारात्मक भावना भी जुड़ी होती है। उनके पूजन से मनुष्य को सांसारिक सुख और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
Shani देव भक्ति में लीन व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करने में सहायक होते हैं। उनकी पूजा से व्यक्ति को धैर्य, संयम, और न्यायपूर्ण बुद्धि प्राप्त होती है, जो उसे अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इसलिए, शनि देव की उपासना से ही व्यक्ति अपने जीवन को एक उच्च स्तर पर पहुँचा सकता है।

