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Badshah Tatiri Song Controversy: NCW के सामने पेश हुए बदशाह, बिना शर्त माफी; 50 लड़कियों की पढ़ाई और महिला सशक्तिकरण गीत का वादा

Badshah Tatiri Song Controversy ने एक बार फिर मनोरंजन जगत में गीतों की भाषा और प्रस्तुति को लेकर जिम्मेदारी पर बड़ी बहस छेड़ दी है। बॉलीवुड सिंगर-रैपर बदशाह मंगलवार को दिल्ली में राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश हुए और टटीरी गीत को लेकर उठे विवाद पर बिना शर्त माफी मांगी। आयोग ने गीत के बोल और उसके दृश्यांकन को महिलाओं की गरिमा के प्रतिकूल बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

सुनवाई के दौरान बदशाह के साथ निर्देशक जोबन संधू, महावीर सिंह और निर्माता हितेन भी उपस्थित रहे। मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर की अध्यक्षता में हुई।


महिला आयोग ने गीत की प्रस्तुति पर जताई गंभीर नाराजगी

राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि गीत के कुछ हिस्से महिलाओं के सम्मान के अनुरूप नहीं हैं और इस प्रकार की प्रस्तुति सामाजिक रूप से गलत संदेश दे सकती है। आयोग ने कलाकारों और निर्माताओं को भविष्य में अधिक जिम्मेदारी के साथ सामग्री तैयार करने की सलाह दी।

सुनवाई के दौरान आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि लोकप्रिय कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी अधिक होती है क्योंकि उनके गीतों का प्रभाव युवाओं और समाज के बड़े वर्ग पर पड़ता है।


बदशाह और टीम ने मांगी बिना शर्त माफी

सुनवाई के दौरान बदशाह और उनकी टीम ने आयोग के समक्ष बिना शर्त माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि भविष्य में इस प्रकार की गलती दोबारा नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि गीत के कुछ हिस्सों को लेकर गलत संदेश गया, जिसे लेकर वे खेद व्यक्त करते हैं।

उन्होंने आयोग को भरोसा दिलाया कि आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स में सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।


महिला सशक्तिकरण पर नया गीत बनाने का वादा

Badshah Tatiri Song Controversy के बीच बदशाह ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि अगले चार महीनों के भीतर महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण पर आधारित एक सकारात्मक गीत तैयार किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 50 लड़कियों की शिक्षा का खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी लेने की घोषणा की, जिसे आयोग ने एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा।


पहले भी वीडियो जारी कर जताया था खेद

गीत को लेकर विवाद बढ़ने के बाद बदशाह ने पहले ही एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि टटीरी गीत के कुछ हिस्सों की वजह से लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची, जिसका उन्हें दुख है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी महिला या बच्चे के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने खुद को हरियाणा का बेटा बताते हुए लोगों से माफी की अपील की थी और उम्मीद जताई थी कि उनके इरादों को गलत नहीं समझा जाएगा।


हरियाणा की पहचान से जुड़े होने का किया उल्लेख

वीडियो संदेश में बदशाह ने कहा था कि उनकी पहचान हरियाणा से जुड़ी है और वे कभी भी अपनी संस्कृति या समाज का अपमान नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि गीत में इस्तेमाल किए गए शब्दों का आशय महिलाओं या बच्चों के संदर्भ में नहीं था।

हालांकि इसके बावजूद विवाद बढ़ता गया और मामला राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया।


क्या है टटीरी सॉन्ग और कैसे शुरू हुआ विवाद

टटीरी गीत को लेकर विवाद उसके कुछ लिरिक्स और विजुअल प्रस्तुति को लेकर सामने आया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध बताते हुए आपत्ति जताई थी।

इसके बाद मामला तेजी से वायरल हुआ और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, जिसके चलते आयोग ने संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।


हरियाणा की सिंगर सिमरन जागलान ने दी थी फीमेल वोकल

इस गीत में फीमेल वोकल देने वाली 20 वर्षीय सिमरन जागलान हरियाणा के कैथल जिले के पट्टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी संगीत से जुड़े रहे हैं।

बताया गया कि सिमरन ने करीब तीन वर्ष पहले पारंपरिक शैली में टटीरी गीत गाया था, जिसे बाद में बदशाह को पसंद आया। इसके बाद गीत को नए रूप में रिकॉर्ड कर पेश किया गया।


जींद और दुबई में हुई थी गीत की शूटिंग

गीत की शूटिंग हरियाणा के जींद जिले के सच्चा खेड़ा और नरवाना क्षेत्र के साथ-साथ दुबई में भी की गई थी। गीत के प्रमोशन के लिए बदशाह 26 फरवरी को कैथल और सोनीपत भी पहुंचे थे।

इसके अलावा 14 मार्च को मुंबई में सिमरन और बदशाह का एक संयुक्त शो भी निर्धारित किया गया था, लेकिन विवाद बढ़ने और गीत को यूट्यूब से हटाए जाने के बाद यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।


विवाद के बाद सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

Badshah Tatiri Song Controversy के बाद सोशल मीडिया पर गीतों की भाषा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कलाकारों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की, जबकि कुछ ने रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन भी किया।

इस बहस ने मनोरंजन उद्योग में सामग्री निर्माण के मानकों को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दिया है।


मनोरंजन उद्योग में बढ़ रही सामाजिक जिम्मेदारी की अपेक्षा

पिछले कुछ वर्षों में लोकप्रिय कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स से सामाजिक संवेदनशीलता की अपेक्षा बढ़ी है। विशेष रूप से ऐसे गीत जिनका प्रभाव युवाओं पर पड़ता है, उनके शब्दों और प्रस्तुति को लेकर अब अधिक सतर्कता बरती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं मनोरंजन उद्योग को संतुलित और जिम्मेदार सामग्री निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करती हैं।


राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष पेश होकर बदशाह द्वारा मांगी गई बिना शर्त माफी और महिला सशक्तिकरण के लिए सकारात्मक कदम उठाने की घोषणा ने इस विवाद को एक नई दिशा दी है। आने वाले समय में उनके द्वारा घोषित पहलें किस तरह समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं, इस पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।

 

News-Desk

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