Balrampur-छांगुर धर्मांतरण कांड में पुलिस अफसरों की मिलीभगत: करोड़ों की जमीन और ‘सिस्टम’ की साजिश का भंडाफोड़
Balrampur। आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) की तफ्तीश ने जिस तरह से अवैध धर्मांतरण रैकेट के सरगना छांगुर उर्फ जमालुद्दीन की परतें खोली हैं, उसने उत्तर प्रदेश पुलिस तंत्र की सच्चाई को उजागर कर दिया है। अब मामला सिर्फ धर्म परिवर्तन का नहीं, बल्कि सत्ता, पुलिस और अवैध पैसों के गठजोड़ का बन चुका है। ATS की रिपोर्ट में छांगुर के साथ बलरामपुर के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की गंभीर सांठगांठ का खुलासा हुआ है।
🚨 छांगुर का रुतबा पुलिस की छाया से बना, विपक्षियों पर मुकदमे, जमीन पर कब्जे, सब कुछ हुआ प्लान के तहत
ATS की रिपोर्ट बताती है कि छांगुर ने वर्ष 2010 से ही उतरौला क्षेत्र में जड़ें जमानी शुरू कर दी थीं। लेकिन यह अकेले संभव नहीं था। एक चर्चित कोतवाल, जिसकी प्रशासन में मजबूत पकड़ मानी जाती थी, छांगुर का सबसे बड़ा संरक्षक बनकर सामने आया।
विपक्षियों पर झूठे मुकदमे दर्ज कराना
जमीनों पर अवैध कब्जा दिलवाना
धार्मिक रूपांतरण में सीधा समर्थन देना
यह सब कुछ कोतवाल की छत्रछाया में होता रहा। बदले में छांगुर ने धन की बौछार कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक छांगुर ने ‘पानी की तरह पैसा’ बहाया, और कोतवाल ने भी पूरी वफादारी निभाई।
🏗️ करोड़ों की जमीन की खरीद, इकाना स्टेडियम के पास 15 हजार स्क्वायर फीट का सौदा
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि इसी गठजोड़ के दौरान उसी चर्चित कोतवाल ने लखनऊ के इकाना स्टेडियम के पास 15,000 स्क्वायर फीट जमीन खरीदी।
बाजार दर के अनुसार, इस जमीन की कीमत करीब 6 करोड़ रुपये है।
इस क्षेत्र में औसत दर ₹4000 प्रति स्क्वायर फीट मानी जा रही है।
सवाल यह है कि एक पुलिस अफसर की आय का स्रोत क्या इतना बड़ा हो सकता है?
यह जमीन कैसे खरीदी गई, किसके नाम से खरीदी गई, और किस पैसे से – इन सवालों के जवाब शासन को देने होंगे।
🕵️♂️ ATS की रिपोर्ट में छांगुर के खिलाफ दर्ज मुकदमों में साफ जिक्र
ATS ने छांगुर के खिलाफ जिन 10 लोगों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए हैं, उनमें नीतू, नवीन, महबूब आदि शामिल हैं। इन सभी के साथ पुलिस अफसरों की कथित मिलीभगत रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है।
बड़ी बात यह है कि धर्मांतरण के मामलों में शामिल कई नामों को पुलिस ने लंबे समय तक बचाने की कोशिश की। ATS की रिपोर्ट ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह मामला केवल कानून तोड़ने का नहीं, बल्कि संपूर्ण ‘सिस्टम’ के नैतिक पतन का है।
🙏 देवीपाटन मंदिर में दिख रहा पश्चाताप या पर्दा डालने की कोशिश?
रिपोर्ट में सामने आया कि जब से छांगुर का रैकेट उजागर हुआ और ATS की जांच तेज़ हुई, तब से वही चर्चित कोतवाल रोजाना देवीपाटन मंदिर में माथा टेकने पहुंच रहा है। यह पश्चाताप है या साजिश पर पर्दा डालने की कवायद, यह तो आने वाले वक्त में ही साफ होगा। मगर जनता सब देख रही है।
📁 जिलाधिकारी अरविंद सिंह की जांच रिपोर्ट बनी ‘धूल खाती फाइल’
बड़ा सवाल यह भी है कि तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह द्वारा इस मामले पर की गई जांच रिपोर्ट आज भी शासन की फाइलों में धूल फांक रही है।
क्यों नहीं ली गई रिपोर्ट पर कार्रवाई?
कौन दबा रहा है फाइल?
क्या सत्ता से जुड़े किसी ‘बड़े नाम’ का संरक्षण है?
जवाब जितना डरावना है, उतना ही राजनीति और प्रशासनिक गठजोड़ का प्रमाण भी है।
🚨 सादुल्लानगर कनेक्शन: धीरे-धीरे सामने आ रहा है धर्मांतरण का नेटवर्क
सादुल्लानगर से जुड़े संदिग्ध लिंक, धर्मांतरण का आधार बने। ATS की पूछताछ में पता चला कि बलरामपुर पुलिस और छांगुर के गठजोड़ की जड़ें सादुल्लानगर से शुरू होती हैं। वहां से ‘फंडिंग’, संरक्षण, और प्रचार तंत्र तक, सब कुछ सुव्यवस्थित तरीके से चला।
📣 जनता का सवाल: आखिर कब तक अफसर बचते रहेंगे?
क्या इतने गंभीर आरोपों के बावजूद उक्त कोतवाल पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं होना, सिस्टम की नाकामी नहीं?
क्या केवल धर्मांतरण करने वाले दोषी हैं?
क्या उनकी रक्षा करने वाले अफसर नहीं?
जब तक सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़ने की नीति रहेगी, तब तक इस तरह की रैकेट बनते रहेंगे और जनता ठगी जाती रहेगी।
⚖️ अब जनता को चाहिए जवाब, केवल पूजा से नहीं मिटेगा पाप
अब वक्त है कि शासन और प्रशासन, उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जिन्होंने अपने पद की गरिमा को बेच डाला। देवीपाटन मंदिर जाकर माथा टेकने से गुनाहों की माफी नहीं मिलती, उसके लिए सिस्टम को जवाबदेह बनाना होगा।

