Banke Bihari Temple में भोग पर रोक से मचा घमासान: बिना लिखित आदेश हटाए गए भंडारी, श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ के आरोप
मथुरा-वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर से बुधवार को एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं, सेवायतों और मंदिर परंपराओं से जुड़े लोगों को स्तब्ध कर दिया। Banke Bihari Mandir में अब श्रद्धालुओं द्वारा लाया गया माला और प्रसाद भोग के रूप में अर्पित नहीं किया गया, और इसके साथ ही मंदिर की परंपरागत व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भंडारियों को उनके कार्य से हटा दिया गया।
इस अचानक लागू की गई व्यवस्था के बाद मंदिर परिसर में अव्यवस्था का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिना भोग अर्पित किए ही लौटने को मजबूर हो गए।
हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के कथित मौखिक आदेश पर कार्रवाई
मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के कथित मौखिक आदेश के आधार पर की गई।
कोई लिखित आदेश, नोटिस या आधिकारिक दिशा-निर्देश सामने नहीं आए, लेकिन इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन ने जगमोहन में खड़े होकर भंडारियों को कार्य से हटा दिया।
यही नहीं, चंदन कोठरी तक जाने का अधिकार रखने वाले भंडारियों को भी प्रवेश से रोक दिया गया।
इस कदम को लेकर Banke Bihari Mandir में दिनभर चर्चा और असंतोष का माहौल बना रहा।
श्रद्धालुओं की माला-प्रसाद अर्पण की परंपरा पर सीधा असर
परंपरागत रूप से श्रद्धालु अपनी माला और प्रसाद भंडारियों के माध्यम से बिहारी जी को भोग के रूप में अर्पित करते आए हैं।
बुधवार को यह व्यवस्था अचानक बंद हो जाने से—
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का भोग अर्पित नहीं हो सका
मंदिर में भीड़ और अफरा-तफरी बढ़ गई
लोग कारण पूछते रहे, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला
कई श्रद्धालुओं ने इसे अपनी आस्था पर सीधा आघात बताया। Banke Bihari Mandir में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अचानक बंद होने से भावनात्मक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली।
सेवायत रजत गोस्वामी का आरोप: आस्था के साथ खिलवाड़
मंदिर सेवायत रजत गोस्वामी ने इस नई व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खुला खिलवाड़ है और इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
रजत गोस्वामी ने आरोप लगाया कि—
कोई लिखित आदेश नहीं दिखाया गया
केवल मौखिक निर्देश के आधार पर कार्रवाई की गई
भंडारियों को हटाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया
उनका कहना है कि Banke Bihari Mandir जैसे ऐतिहासिक और श्रद्धा के केंद्र में इस तरह के फैसले पारदर्शिता के साथ होने चाहिए।
मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन, वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई
रजत गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला पहले से ही माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इसी वजह से बुधवार को मंदिर परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई, ताकि इसे आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि—
किस आधार पर भंडारियों को हटाया गया?
किस नियम या आदेश के तहत यह व्यवस्था बदली गई?
क्या सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के बावजूद इस तरह का कदम उचित है?
इन सवालों ने Banke Bihari Mandir विवाद को कानूनी और संवैधानिक स्तर तक पहुंचा दिया है।
सेवायत मम्मू गोस्वामी की मांग: पुराने भोग भंडार की बहाली
मंदिर सेवायत मम्मू गोस्वामी ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने बताया कि पहले भी पुराने भोग भंडार को पुनः शुरू करने की मांग हाई पावर कमेटी के समक्ष रखी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
उनका कहना है कि भंडारियों को हटाने से—
मंदिर की पारंपरिक सेवा व्यवस्था प्रभावित हुई है
श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है
सेवायतों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बन रही है
परंपरा बनाम प्रबंधन: टकराव की ओर बढ़ता मामला
वृंदावन के संत-समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या Banke Bihari Mandir में सदियों पुरानी परंपराओं को बिना संवाद और लिखित आदेश के बदला जाना उचित है।
कई लोगों का मानना है कि—
मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का केंद्र है
किसी भी बदलाव से पहले सेवायतों और श्रद्धालुओं को विश्वास में लेना जरूरी है
अचानक लिए गए फैसले तनाव और अव्यवस्था को जन्म देते हैं
श्रद्धालुओं में असंतोष, आगे और विरोध की आशंका
बुधवार की घटना के बाद मंदिर आने वाले कई श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताई।
कई लोगों ने कहा कि वे दूर-दराज से भोग और माला लेकर आए थे, लेकिन बिना अर्पण किए लौटना पड़ा।
यदि स्थिति जल्द स्पष्ट नहीं हुई, तो Banke Bihari Mandir में आगे और विरोध या प्रदर्शन की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।

