उत्तर प्रदेश

Bareilly में गूंजा ‘जय हिंद’: 1280 रिक्रूट्स बने भारतीय सेना का हिस्सा, जाट रेजिमेंट सेंटर की पासिंग आउट परेड में दिखा जोश, अनुशासन और गौरव

Bareilly स्थित जाट रेजिमेंट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में हुआ। इस अवसर पर 1280 रिक्रूट्स ने 24 सप्ताह के कठिन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद भारतीय सेना के सैनिक के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की। परेड मैदान में अनुशासन, देशभक्ति और सैन्य परंपराओं का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को गर्व से भर दिया।

पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उन युवाओं के सपनों के साकार होने का क्षण था जिन्होंने कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण के माध्यम से देश सेवा का मार्ग चुना। परेड के दौरान रिक्रूट्स के आत्मविश्वास, कदमताल और सैन्य कौशल ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।


बख्शी परेड ग्राउंड बना देशभक्ति और गौरव का केंद्र

बरेली का बख्शी परेड ग्राउंड शनिवार को विशेष रूप से सजा हुआ था। चारों ओर सैन्य परंपराओं की झलक दिखाई दे रही थी। परेड में शामिल रिक्रूट्स ने बेहतरीन तालमेल, अनुशासन और प्रशिक्षण का प्रदर्शन किया। मैदान में जब सैनिकों के कदम एक साथ गूंजे तो पूरा वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठा।

मुख्य अतिथि के रूप में जाट रेजिमेंट सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को पदक देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रशिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में सैनिकों के परिवारजन मौजूद रहे।


24 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद मिली सैनिक बनने की पहचान

भारतीय सेना में शामिल होने से पहले इन रिक्रूट्स ने लगभग 24 सप्ताह का कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता, युद्ध कौशल, हथियार संचालन, फायरिंग अभ्यास, सैन्य अनुशासन, रणनीतिक प्रशिक्षण और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण का यह चरण किसी भी युवा को एक सामान्य नागरिक से अनुशासित और जिम्मेदार सैनिक में बदल देता है। इसी प्रक्रिया से गुजरकर ये 1280 युवा अब भारतीय सेना का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।

प्रशिक्षण के दौरान उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में कार्य करने, कठिन चुनौतियों का सामना करने और टीम भावना के साथ आगे बढ़ने का अभ्यास कराया गया।


परिजनों की आंखों में गर्व, भावुक कर देने वाले रहे कई पल

पासिंग आउट परेड का सबसे भावनात्मक पहलू उन अभिभावकों और परिवारजनों की मौजूदगी रही जिन्होंने अपने बेटों को पहली बार सैनिक की वर्दी में देखा। कई माता-पिता की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे।

कई परिवारों ने बताया कि उनके बेटे बचपन से सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देखते थे और आज वह सपना साकार हो गया। जब जवानों ने परेड मैदान में कदमताल की तो परिजनों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया।

यह अवसर केवल सैनिकों के लिए ही नहीं बल्कि उनके परिवारों के लिए भी जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक बन गया।


ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह ने दिया प्रेरणादायक संदेश

Bareilly Jat Regimental Centre Passing Out Parade के दौरान ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह ने रिक्रूट्स को संबोधित करते हुए कहा कि उनके कदमों की खनक उनके कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण की गवाही दे रही है।

उन्होंने कहा कि यह दिन केवल एक समारोह नहीं बल्कि जिम्मेदारी की शुरुआत है। अब ये युवा भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व करेंगे और देश की सुरक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

ब्रिगेडियर सिंह ने सैनिकों को संगठन, अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक सैनिक का चरित्र उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है।


‘पलटन ही सैनिक का परिवार होती है’

अपने संबोधन में ब्रिगेडियर सिंह ने सेना की मूल भावना को समझाते हुए कहा कि एक सैनिक के लिए उसकी पलटन ही उसका परिवार होती है। उन्होंने कहा कि सैनिकों को अपने साथियों के प्रति उसी निष्ठा और विश्वास का भाव रखना चाहिए जैसा वे अपने परिवार के प्रति रखते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पलटन के प्रति वफादारी ही देश के प्रति वफादारी का सबसे बड़ा रूप है। सेना की ताकत केवल हथियारों में नहीं बल्कि उसके जवानों के बीच मौजूद विश्वास, अनुशासन और एकता में निहित होती है।

उनके इस संदेश को जवानों और उपस्थित लोगों ने बेहद ध्यान से सुना।


उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को मिला सम्मान

परेड के दौरान प्रशिक्षण में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को विभिन्न श्रेणियों में पदक प्रदान किए गए। यह सम्मान उन जवानों को दिया गया जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान अपनी मेहनत, अनुशासन और प्रतिभा से विशेष पहचान बनाई।

अकादमिक वर्ग में कुलवीर को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पदक प्रदान किया गया। युद्ध कौशल और शारीरिक दक्षता के क्षेत्र में चित्रांश तोमर को सर्वश्रेष्ठ युद्ध कौशल एवं शारीरिक पदक से सम्मानित किया गया।

सर्वश्रेष्ठ ड्रिल का पुरस्कार सुशांत मलिक को मिला, जबकि विपुल मलिक को सर्वश्रेष्ठ फायर पदक प्रदान किया गया। विवेक ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए समग्र सर्वश्रेष्ठ रिक्रूट का प्रतिष्ठित पदक अपने नाम किया।

इसके अतिरिक्त मुल्तान कंपनी को विजेता कंपनी का खिताब देकर सम्मानित किया गया।


230 वर्षों से अधिक पुरानी जाट रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत

ब्रिगेडियर सिंह ने नए सैनिकों को जाट रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास से भी परिचित कराया। उन्होंने बताया कि 230 वर्षों से अधिक पुरानी यह रेजिमेंट भारतीय सैन्य इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित रेजिमेंटों में से एक है।

देश की विभिन्न लड़ाइयों, सीमाई संघर्षों और सैन्य अभियानों में जाट रेजिमेंट ने असाधारण वीरता, साहस और बलिदान का परिचय दिया है। रेजिमेंट के अनेक सैनिकों ने सर्वोच्च सैन्य सम्मान प्राप्त किए हैं और राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि अब इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नए सैनिकों के कंधों पर है।


धर्मगुरुओं ने दिलाई शपथ, राष्ट्रीय एकता का दिखा संदेश

समारोह के अंतिम चरण में नवप्रशिक्षित सैनिकों को उनके धर्म के अनुसार शपथ दिलाई गई। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरुओं ने सैनिकों को राष्ट्र के प्रति समर्पण, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की शपथ दिलाई।

यह दृश्य भारतीय सेना की उस परंपरा को दर्शाता है जिसमें विविधता में एकता की भावना सर्वोपरि मानी जाती है। अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि से आने वाले जवान एक ही उद्देश्य—राष्ट्र सेवा—के लिए एक साथ खड़े दिखाई दिए।

शपथ ग्रहण समारोह ने उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का प्रेरणादायक संदेश दिया।


‘जय हिंद’ के नारों से गूंज उठा परेड मैदान

समारोह के समापन पर पूरा परेड मैदान ‘जय हिंद’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। नवप्रशिक्षित सैनिकों के चेहरों पर आत्मविश्वास, उत्साह और देश सेवा का संकल्प साफ दिखाई दे रहा था।

कमांडेंट ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह ने सभी सैनिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल सैन्य भविष्य की कामना की। उन्होंने प्रशिक्षकों और परिवारों को भी बधाई दी, जिनके सहयोग और समर्पण ने इन युवाओं को भारतीय सेना का गौरवशाली हिस्सा बनने में मदद की।


बरेली स्थित जाट रेजिमेंट सेंटर की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य आयोजन नहीं थी, बल्कि राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, समर्पण और गौरव का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई। 1280 युवा अब भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की रक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके कदमों की गूंज आने वाले वर्षों में भारत की सुरक्षा, सम्मान और गौरव को नई मजबूती देने का संकल्प लेकर आगे बढ़ेगी। परेड मैदान में गूंजता ‘जय हिंद’ का उद्घोष इस बात का प्रतीक था कि देश को अपने नए सैनिकों पर गर्व है और ये सैनिक राष्ट्र की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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